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मंत्री के आदेशों के बाद भी सरपंच के विरुद्ध कार्रवाई नहीं ग्रामीणों में आक्रोश ।

बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले की ग्राम पंचायत राधाकृष्णनगर में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सरपंच और सचिव पर पंचायत की विभिन्न मदों की राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मामले में पहले भी आवेदन देकर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।
प्राप्त शिकायत आवेदन के अनुसार, पंचायत में मूलभूत राशि सहित विभिन्न मदों से किए गए भुगतान और निर्माण कार्यों में कथित गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है। शिकायत में कुल 14 लाख 73 हजार 472 रुपये की राशि को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने, संबंधित अभिलेखों का सत्यापन कराने और जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।

विभिन्न मदों में भुगतान को लेकर उठाए सवाल

शिकायत में मूलभूत मद से फील्ड सफाई एवं झाड़ू सफाई के नाम पर 1 लाख 40 हजार रुपये के भुगतान, सड़क पर पुलिया निर्माण के नाम पर 50 हजार रुपये की निकासी तथा अन्य विकास कार्यों में भुगतान को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ मामलों में भुगतान के अनुरूप कार्य नहीं हुआ अथवा कार्य की मात्रा और भुगतान की गई राशि में अंतर है।

आवेदन में सड़क के मुरमीकरण, छोटे तालाब के जीर्णोद्धार, पंचायत संचालन के लिए स्टेशनरी एवं फोटोकॉपी, तथा बैंक खातों में जमा राशि और ब्याज के हिसाब-किताब को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में अलग-अलग बिंदुओं पर भुगतान, बिल-वाउचर और कार्यों के भौतिक सत्यापन की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कुछ कार्यों में मुरुम की मात्रा और भुगतान की गई राशि के बीच अंतर होने की आशंका है। वहीं, कुछ भुगतानों को लेकर संबंधित बिल, वाउचर और कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति का मिलान कराने की मांग की गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

धारा 40 के तहत कार्रवाई की मांग

शिकायत में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत सरपंच के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए तथा नियमों के तहत वसूली योग्य राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
दस्तावेजों के अनुसार, इस मामले में प्रदेश के मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक रामविचार नेताम सहित जिला प्रशासन और जिला पंचायत के अधिकारियों को भी आवेदन दिए जाने का उल्लेख है। इसके बावजूद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं कि मामले की जांच कहां तक पहुंची और जिम्मेदारी तय करने में देरी क्यों हो रही है।

अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं ने पंचायत में भुगतान और निर्माण कार्यों के सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाले संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भुगतान बिना उचित सत्यापन या कार्यों की वास्तविक स्थिति की पुष्टि के किया गया है, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि संबंधित प्रक्रिया में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की क्या भूमिका रही।
हालांकि, किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि की संलिप्तता अथवा भ्रष्टाचार की पुष्टि अभी नहीं मानी जा सकती। इसके लिए निष्पक्ष जांच, संबंधित पक्षों का जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण आवश्यक है।

ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की

ग्रामीणों एवं शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की समयबद्ध जांच कराई जाए, संबंधित बैंक खातों, भुगतान संबंधी दस्तावेजों, बिल-वाउचर और निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन किया जाए। साथ ही जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कब तक पूरी होती है। फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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