Mon. Oct 19th, 2026

जेके निजाम अंसारी सुदर्शन टुडे ब्यूरो चीफ।

अवैध परिवहन करते चार हाइवा वाहन जब्त।

बलरामपुर,रामानुजगंज जिले में अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले में लगातार अभियान चलाकर अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में खनिज विभाग एवं संयुक्त टीम द्वारा बलरामपुर और पस्ता क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से गिट्टी परिवहन कर रहे चार हाइवा वाहनों को जब्त किया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार खनिज विभाग की टीम द्वारा क्षेत्र में नियमित जांच एवं मॉनिटरिंग की जा रही थी। अभियान के दौरान संदिग्ध वाहनों की जांच की गई, जिसमें संबंधित वाहन चालकों द्वारा खनिज परिवहन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज एवं वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं की जा सकी। दस्तावेजों में अनियमितता पाए जाने पर विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चारों हाइवा वाहनों को जब्त कर लिया। जब्त वाहनों के खिलाफ खनिज नियमों के तहत अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

कन्हर नदी में डूबने से 14 वर्षीय किशोर की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल,

रामानुजगंज। नगर में दशहरा मेले के दौरान बैलून बेचकर अपने परिवार की मदद करने आए झारखंड के एक परिवार की खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब कन्हर नदी में डूबने से 14 वर्षीय किशोर इरशाद अंसारी की मौत हो गई। सोमवार दोपहर हुई इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद नदी और एनीकट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नगर में चर्चा है कि यदि संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी और सांकेतिक बोर्ड लगाए गए होते, तो शायद इस तरह की घटना को रोकने में मदद मिल सकती थी। हालांकि, सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति और विभागीय जिम्मेदारी की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, झारखंड के डालटनगंज क्षेत्र अंतर्गत एक परिवार दशहरा मेले में बैलून बेचने के लिए रामानुजगंज आया हुआ था। सोमवार को दोपहर करीब एक बजे बैलून बेचने के बाद इरशाद अंसारी अपने दो चचेरे भाइयों शमशाद अंसारी (10) और सफीक अंसारी (9) के साथ राम मंदिर के पास स्थित कन्हर नदी में नहाने चला गया। इसी दौरान इरशाद नहाते हुए महामाया मंदिर के पास स्थित एनीकट की ओर बढ़ गया और गहरे पानी में चला गया। देखते ही देखते वह पानी में डूब गया।
घटना की जानकारी मिलने पर रामानुजगंज पुलिस मौके पर पहुंची और किशोर की तलाश शुरू कराई। करीब दो से तीन घंटे की तलाश के बाद कालिकापुर के एक युवक ने किशोर को पानी में देखा और बाहर निकाला। लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। दोपहर करीब तीन बजे किशोर का शव बरामद होने के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर मर्ग कायम किया और पोस्टमार्टम के लिए रामानुजगंज के सौ बिस्तर अस्पताल भेज दिया। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
इस दर्दनाक हादसे के बाद कन्हर नदी और एनीकट के आसपास सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि क्या नदी के गहरे हिस्सों और एनीकट के समीप पर्याप्त चेतावनी बोर्ड, खतरे के संकेत तथा सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं मौजूद थीं? यदि ऐसे स्थानों पर आम लोगों को सावधान करने के लिए स्पष्ट संकेतक नहीं लगाए गए थे, तो यह जांच का विषय है।
खासकर दशहरा मेले जैसे अवसरों पर दूसरे क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित नगर पहुंचते हैं। ऐसे में नदी और एनीकट जैसे जोखिमपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना और लोगों को संभावित खतरे से आगाह करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
घटना के बाद जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, हादसे के लिए किसी विभाग की लापरवाही को फिलहाल प्रमाणित नहीं माना जा सकता। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित स्थल पर सुरक्षा संकेतक लगाने, खतरे की जानकारी देने और आवश्यक सुरक्षा उपायों की जिम्मेदारी किस विभाग या एजेंसी की थी तथा वहां निर्धारित व्यवस्था लागू थी या नहीं।
नगर वासियों का कहना है कि एक मासूम की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या नदी और एनीकट के संवेदनशील हिस्सों का सुरक्षा ऑडिट किया जाता है? क्या वहां पर्याप्त चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं? और क्या मेले के दौरान लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष सतर्कता बरती गई थी?
इरशाद अंसारी की मौत उसके परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी घटना की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच करें, जिम्मेदारी तय करें और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएं, ताकि किसी दूसरे परिवार को इस तरह का असहनीय दुख न झेलना पड़े।

चलगली-रामानुजगंज सड़क निर्माण को मिली स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही शुरू होगा काम: मंत्री रामविचार नेताम

बलरामपुर-रामानुजगंज। प्रदेश में ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करने और गांवों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मंत्री रामविचार नेताम ने कपिलदेवपुर-बसेरा मार्ग पर पुलिया निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में सड़क सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि चलगली से रामानुजगंज सड़क निर्माण को स्वीकृति मिल चुकी है। निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही सड़क निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
मंत्री नेताम ने कहा कि चलगली को बलरामपुर और वाड्रफनगर से बेहतर सड़क मार्ग के माध्यम से जोड़ने के लिए भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस दिशा में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समन्वय से आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि क्षेत्र के लोगों को आवागमन में सुविधा मिले और विकास गतिविधियों को गति मिल सके।
मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। गांवों में सीसी रोड निर्माण सहित पंचायतों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इन कार्यों का उद्देश्य ग्रामीणों को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने के साथ गांवों में आधारभूत संरचना को मजबूत बनाना है।
उन्होंने बताया कि जिन विद्यालयों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां प्राथमिकता के आधार पर शौचालय निर्माण कराया जा रहा है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं के विस्तार के लिए मुक्तिधाम निर्माण की योजना भी तैयार की गई है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर जोर देते हुए मंत्री नेताम ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र माताओं और बहनों के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि अंतरित की जा रही है। इससे महिलाओं को आर्थिक सहयोग मिल रहा है और वे अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में अधिक सक्षम बन रही हैं।
उन्होंने स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही महिलाओं की सराहना करते हुए कहा कि सब्जी उत्पादन, मुर्गी पालन, बकरी पालन और ‘ड्रोन दीदी’ जैसी पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो रहे हैं।
मंत्री रामविचार नेताम ने किसानों से आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेती के साथ दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को व्यावसायिक रूप देकर किसान अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। कृषि के साथ अन्य आजीविका गतिविधियों को जोड़ने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति रही। पुलिया निर्माण के भूमिपूजन के साथ ही क्षेत्र में सड़क संपर्क, ग्रामीण सुविधाओं के विस्तार और आजीविका संवर्धन से जुड़े विकास कार्यों को लेकर भी चर्चा हुई।

मोरन नदी पुल का भूमिपूजन, 15 से 20 हजार ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ

बलरामपुर, रामानुजगंज आदिम जाति विकास, कृषि विकास एवं किसान कल्याण, जैव प्रौद्योगिकी, मछलीपालन तथा पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम ने आज नवरात्रि की महाअष्टमी पर ग्राम कपिलदेवपुर में मोरन नदी पर बनने वाले उच्चस्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का विधिवत भूमिपूजन किया। लोक निर्माण विभाग सेतु संभाग, अम्बिकापुर यह पुल कपिलदेवपुर-बसेरा मार्ग पर बनाएगा। इसके लिए 591.04 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली है। पुल बनने से चलगली क्षेत्र के 12 से 15 गांवों के 15 से 20 हजार ग्रामीणों को जिला मुख्यालय बलरामपुर पहुंचने के लिए लगभग 15 किलोमीटर कम दूरी तय करनी होगी।

144 मीटर लंबे और 8.40 मीटर चौड़े इस पुल में 24-24 मीटर के 6 स्पैन होंगे। संरचना को मजबूत बनाने के लिए पाइल फाउंडेशन तकनीक अपनाई जाएगी। पुल के दोनों छोरों पर कुल 271 मीटर पहुंच मार्ग भी बनेगा।

समारोह में उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए मंत्री श्री नेताम ने कहा कि महाअष्टमी के शुभ अवसर पर क्षेत्रवासियों को यह सौगात मिली है। पुल न होने से ग्रामीणों को लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। व पुल बनने के बाद आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और रोजगार ग्रामीणों की सहज पहुंच में होंगे। उन्होंने बताया कि चलगली से रामानुजगंज सड़क को स्वीकृति मिल चुकी है और निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही इसका निर्माण शुरू होगा। चलगली को बलरामपुर और वाड्रफनगर से बेहतर सड़क मार्ग से जोड़ने की कार्ययोजना पर भी जनप्रतिनिधियों के समन्वय से काम हो रहा है। मंत्री नेताम ने कहा कि ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके तहत गांवों में सीसी रोड और पंचायतों में आवश्यकतानुसार विकास कार्य कराए जा रहे हैं।कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, ग्रामीणजन, व संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

 

तेज रफ्तार हाईवा की चपेट में आने से एक की मौत, रेत के कथित अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

तेज रफ्तार हाईवा की चपेट में आने से सोनू वर्मन की मौके पर ही मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों ने घटना को लेकर रेत के कथित अवैध उत्खनन और परिवहन तथा पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहडोल। जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र मेंभटिया मंदिर पेट्रोल पंप के पास हुए इस हादसे में सोनू वर्मन की जान चली गई। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे में शामिल हाईवा तेज रफ्तार में था। वहीं, घटना के बाद चालक के मौके से फरार होने की जानकारी भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि संबंधित हाईवा रेत कारोबारी सोनू साहू से जुड़ा हुआ है। हालांकि, वाहन के स्वामित्व, चालक की भूमिका और दुर्घटना की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

रेत परिवहन की निगरानी पर उठे सवाल

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जैतपुर क्षेत्र में रेत के कथित अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने के आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही और उनकी गति पर निगरानी जरूरी है, ताकि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
आक्रोशित लोगों ने जैतपुर थाने में पदस्थ दो आरक्षकों पर रेत कारोबार को कथित संरक्षण देने के आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने मांग की है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता प्रमाणित होती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
मिली जानकारी के अनुसार हादसे से नाराज लोगों ने जैतपुर थाना प्रभारी के निलंबन, आरोपों के घेरे में आए दोनों आरक्षकों की भूमिका की जांच तथा हाईवा के मालिक और चालक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि सड़क सुरक्षा और रेत परिवहन से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि मामले में जवाबदेही तय की जाए और दुर्घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए। उनका कहना है कि एक युवक की मौत केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है।
फिलहाल हादसे के कारणों, हाईवा चालक की भूमिका, वाहन के स्वामित्व और रेत के कथित अवैध कारोबार से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई महत्वपूर्ण है। घटना के बाद क्षेत्र में लोगों का आक्रोश बढ़ता नजर आ रहा है।

मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण 11 दिसंबर तक दर्ज होंगे दावे-आपत्ति।

बलरामपुर रामानुजगंज भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली एवं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार जिला बलरामपुर-रामानुजगंज में अर्हता तिथि 01 जनवरी 2027 के आधार पर फोटोयुक्त निर्वाचक नामावलियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम जारी किया गया है।
जारी कार्यक्रम के अनुसार 02 नवंबर 2026 तक मतदान केंद्रों के युक्तियुक्तकरण का कार्य किया जाएगा। इसके पश्चात 12 नवंबर 2026 को निर्वाचक नामावलियों का प्रारंभिक प्रकाशन होगा तथा 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक दावे-आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। प्राप्त दावे-आपत्तियों का निराकरण 28 दिसंबर 2026 तक किया जाएगा, जिसके बाद 04 जनवरी 2027 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा।

 

चरित्र पर शक के चलते पति-पत्नी के बीच विवाद ने लिया हिंसक रूप,

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के छोला मंदिर थाना क्षेत्र से घरेलू हिंसा का एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति पर अपनी पत्नी के साथ बेरहमी से मारपीट करने और उसके साथ अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि पत्नी के चरित्र पर संदेह को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसा में बदल गया। घटना में घायल महिला को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी प्लंबर और मजदूरी का काम करता है, जबकि उसकी पत्नी दूसरे लोगों के घरों में खाना बनाने का काम करती है। आरोप है कि पति को अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जो धीरे-धीरे बढ़ता चला गया।
बताया जा रहा है कि पत्नी के चरित्र पर संदेह के चलते पति उसे जांच के लिए अस्पताल लेकर गया था। अस्पताल से वापस लौटते समय दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर आसपास मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप कर दोनों को समझाने का प्रयास किया। इसके बाद महिला को घर भेज दिया गया, लेकिन घर पहुंचने के बाद विवाद दोबारा भड़क उठा।

आरोप है कि घर पहुंचने के बाद पति ने पत्नी के साथ बेरहमी से मारपीट की और उसके साथ बेहद अमानवीय व्यवहार किया। सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने महिला के निजी अंगों में लौकी डालने जैसी क्रूर हरकत भी की। बताया जा रहा है कि घटना के दौरान दंपती के बच्चे भी घर में मौजूद थे। इसके अलावा, इससे पहले हुए विवाद के दौरान सड़क पर महिला के कपड़े उतारने की कोशिश किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
घटना के बाद घायल महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसकी तलाश की जा रही है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
यह घटना घरेलू विवादों के हिंसक रूप लेने और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि, मामले के सभी तथ्यों और घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पशुधन विकास विभाग द्वारा सघन टीकाकरण अभियान जारी,

बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले में पशुओं को संक्रामक एवं जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए पशुधन विकास विभाग द्वारा सघन टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। राज्य शासन एवं कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देशानुसार संचालित इस अभियान के तहत अब तक 5 लाख 61 हजार 412 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। अभियान का उद्देश्य पशुधन को बीमारियों से बचाना, पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से राहत दिलाना तथा पशुपालन को अधिक सुरक्षित और लाभकारी बनाना है।
पशुधन विकास विभाग के अनुसार, बकरी एवं भेड़ों को पीपीआर (पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स) बीमारी से बचाने के लिए 20 सितंबर से 7 नवंबर 2026 तक टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। वहीं, गाय एवं भैंसों को लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) से सुरक्षित रखने के लिए 1 अगस्त से 31 अक्टूबर 2026 तक टीकाकरण किया जा रहा है। अब तक जिले में 2 लाख 25 हजार 717 बकरी एवं भेड़ों को पीपीआर तथा 3 लाख 35 हजार 695 गौवंशीय एवं भैंसवंशीय पशुओं को एलएसडी का टीका लगाया जा चुका है।

पीपीआर और लम्पी स्किन डिजीज से पशुओं को खतरा

पीपीआर बकरी और भेड़ों में होने वाली अत्यंत संक्रामक विषाणुजनित बीमारी है, जिसे बकरी प्लेग के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी संक्रमित पशुओं के संपर्क तथा उनकी लार, छींक और खांसी की बूंदों के माध्यम से फैल सकती है। तेज बुखार, मुंह में घाव एवं छाले, दस्त, मुंह-नाक से पानी बहना और अत्यधिक कमजोरी इसके प्रमुख लक्षण हैं।
इसी तरह लम्पी स्किन डिजीज मुख्य रूप से गाय एवं भैंसों को प्रभावित करने वाली संक्रामक विषाणुजनित बीमारी है। इसमें पशुओं को तेज बुखार, त्वचा पर कठोर उभरी हुई गांठें, पैरों एवं थनों में सूजन, आंख और नाक से पानी बहने तथा चारे की खपत में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पशुओं में ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशुपालकों को तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करने, संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने तथा उसके चारे-पानी की अलग व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।
पशुधन विकास विभाग के अनुसार, इन संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है। टीकाकरण से बीमारी के प्रसार और पशुओं की मृत्यु के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। इससे पशुपालकों को महंगे उपचार तथा पशुधन की क्षति से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने में भी सहायता मिलती है। पशुओं की नियमित देखभाल, उचित पोषण और समय पर टीकाकरण से पशुपालन व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

पशुपालकों से टीकाकरण कराने की अपील

जिले में पशुधन विकास विभाग एवं मोबाइल वेटरनरी यूनिट के माध्यम से टीकाकरण अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन किया जा रहा है। विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने बकरी, भेड़, गाय और भैंस का निर्धारित अभियान के तहत अनिवार्य रूप से टीकाकरण कराएं तथा टीकाकरण कार्य में विभागीय अमले का सहयोग करें।
पशुओं के टीकाकरण, उपचार एवं अन्य पशु चिकित्सा संबंधी जानकारी के लिए पशुपालक अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त मोबाइल वेटरनरी यूनिट की टोल फ्री हेल्पलाइन 1962 पर भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
विभाग का उद्देश्य जिले के पशुधन को संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखते हुए पशुपालकों की आजीविका को मजबूत करना और पशुपालन क्षेत्र को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

महंगाई की मार झेल रहे आम नागरिकों को एक और झटका,

छत्तीसगढ़ शासन के परिवहन विभाग ने यात्री बसों के किराए में वृद्धि करते हुए नई दरें निर्धारित की हैं। इसका सीधा असर रोजाना बसों से सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों, मजदूरों और ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय व अन्य शहरों तक आने-जाने वाले यात्रियों पर पड़ने की संभावना है।
जिला परिवहन अधिकारी, बलरामपुर-रामानुजगंज द्वारा जारी सूचना के अनुसार, नई किराया दरें 8 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार प्रभावशील हो गई हैं। मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 67(1) के तहत जारी यह अधिसूचना 11 मार्च 2025 की पूर्व अधिसूचना का स्थान लेती है। नई दरें नगर सेवाओं को छोड़कर अन्य प्रक्रम वाहनों पर लागू होंगी।
नई दरों के अनुसार, साधारण बस सेवा में पहले 5 किलोमीटर की यात्रा के लिए प्रति यात्री 10 रुपये किराया निर्धारित किया गया है। इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 1.75 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान करना होगा। वहीं, साधारण रात्रिकालीन बस सेवा में निर्धारित किराए से 10 प्रतिशत अधिक किराया देना होगा।
डीलक्स बस सेवा, डीलक्स रात्रिकालीन सेवा तथा बिना वातानुकूलन वाली डीलक्स शयनयान और अर्द्ध-शयनयान बसों के लिए पहले 5 किलोमीटर का किराया 12 रुपये प्रति यात्री तय किया गया है। इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 2.20 रुपये की दर से किराया निर्धारित किया गया है।

एसी बसों में सफर करना भी पड़ेगा महंगा

वातानुकूलित डीलक्स शयनयान एवं अर्द्ध-शयनयान बस सेवाओं के लिए पहले 5 किलोमीटर का किराया 12 रुपये प्रति यात्री निर्धारित किया गया है। इसके बाद प्रत्येक किलोमीटर के लिए सीट और बर्थ, दोनों श्रेणियों में 3.20 रुपये प्रति यात्री की दर से किराया देना होगा।
बस किराए में इस वृद्धि का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो रोजाना कामकाज, पढ़ाई, इलाज या अन्य जरूरी कार्यों के लिए बसों से यात्रा करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय पहुंचने वाले लोगों के साथ-साथ लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों को भी अब यात्रा के लिए पहले से अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
पहले से खाद्य सामग्री, ईंधन और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए परिवहन खर्च में यह बढ़ोतरी एक अतिरिक्त आर्थिक चुनौती बन सकती है। हालांकि, किराया वृद्धि से यात्रियों पर पड़ने वाले वास्तविक अतिरिक्त खर्च का आकलन यात्रा की दूरी और बस सेवा की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग होगा।
परिवहन विभाग द्वारा नई किराया दरों की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के बाद यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले संबंधित बस सेवा की निर्धारित किराया दरों की जानकारी प्राप्त कर लें। इससे किराए को लेकर किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति से बचा जा सकेगा।
अब सवाल यह है कि महंगाई के इस दौर में आम यात्रियों के बढ़ते परिवहन खर्च से राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे? फिलहाल, नई किराया दरों के प्रभावी होने के बाद यात्रियों को अपनी जेब का बजट नए सिरे से तय करना पड़ सकता है।

स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को हटाने की मांग तेज,स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के आरोप,

बलरामपुर-रामानुजगंज। जनपद पंचायत रामचंद्रपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी सामने आई है। रामचंद्रपुर स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी धनंजय कुमार चंद्रा को पद से हटाने की मांग करते हुए जनप्रतिनिधियों ने जनपद पंचायत अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित आवेदन सौंपा है। आवेदन में स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली, मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिलने और आपातकालीन सेवाओं में कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

स्वास्थ्य केंद्र में नियमित उपस्थिति नहीं होने का आरोप

दिए गए आवेदन में जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि धनंजय कुमार चंद्रा लंबे समय से ग्रामीण चिकित्सा सहायक के रूप में कार्य करते हुए प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। आवेदन के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र में उनकी नियमित उपस्थिति नहीं होने से मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता और कई बार सामान्य बीमारियों में भी प्राथमिक उपचार के बिना मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।

आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी उठाए सवाल

ग्रामीण एवं जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया गया है कि स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध एंटी रेबीज वैक्सीन और एंटी स्नेक वेनम जैसी जरूरी दवाओं को निजी निवास पर रखे जाने तथा रात के समय मोबाइल बंद रहने से आपातकालीन स्थिति में मरीजों को परेशानी होती है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि रात में मरीजों के परिजनों द्वारा संपर्क करने पर कथित रूप से दुर्व्यवहार भी किया जाता है।
जनप्रतिनिधियों ने जनपद पंचायत अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मांग की है कि धनंजय कुमार चंद्रा को प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के प्रभार से हटाकर डॉ. सुशील कुमार मिश्रा को जिम्मेदारी सौंपी जाए। उनका कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था में सुधार और ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए इस मामले में उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य केंद्र से संबंधित शिकायत सामने आने के बाद अब संबंधित स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। वहीं, ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और आपातकालीन व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

मंत्री रामविचार नेताम के प्रयासों से रामचंद्रपुर को बड़ी सौगात, 3 करोड़ 40 लाख रुपये स्वीकृत

बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले के रामचंद्रपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम के प्रयासों से जनपद पंचायत रामचंद्रपुर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन एवं स्टाफ क्वार्टर निर्माण के लिए कुल 3 करोड़ 40 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है। इस स्वीकृति से क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती मिलने और ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की उम्मीद है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामचंद्रपुर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण के लिए 2 करोड़ 50 लाख रुपये तथा स्टाफ क्वार्टर निर्माण के लिए 90 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से क्षेत्र में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार का मार्ग प्रशस्त होगा।
रामचंद्रपुर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण होने से क्षेत्र के मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों के लोगों के लिए समय पर उपचार की सुविधा बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र के लिए नए भवन का निर्माण क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ स्टाफ क्वार्टर निर्माण की स्वीकृति भी महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य कर्मियों के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध होने से उनकी कार्यस्थल पर उपलब्धता बेहतर बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारु संचालन में मदद मिल सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है
स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण जनता की बुनियादी जरूरतों में शामिल है। रामचंद्रपुर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन और स्टाफ क्वार्टर निर्माण के लिए मिली स्वीकृति को क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब क्षेत्रवासियों को निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होने और निर्धारित समय-सीमा में पूरा होने की उम्मीद है, ताकि स्वीकृत राशि का लाभ आम जनता को जल्द मिल सके और ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।