रायपुर: छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास निधि (DMF) के कथित दुरुपयोग, राशि में बंदरबांट और सरकारी खरीद में कमीशनखोरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और जनकल्याण के लिए बनाई गई इस अहम निधि के कथित घपले की जांच में अब करोड़ों रुपये की संपत्तियों पर बड़ा एक्शन लिया गया है। जांच एजेंसी ने इस मामले में कठोर कार्रवाई करते हुए कुल 31.70 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इसके साथ ही, रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में इस प्रकरण से जुड़े 17 आरोपियों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में अब तक कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। खास बात यह है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में चर्चित आईएएस अधिकारी रानू साहू का नाम भी शामिल है।
जांच एजेंसी ने एक कथित मुख्य बिचौलिए को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था। आरोप है कि यह बिचौलिया चुनिंदा आपूर्तिकर्ताओं को टेंडर दिलवाने, खरीद आदेश जारी करवाने, बिलों का भुगतान स्वीकृत कराने और इसके एवज में अवैध कमीशन की भारी वसूली एवं उसके वितरण में केंद्रीय भूमिका निभाता था। मंदीप चावला सहित कुल 17 आरोपियों के खिलाफ अब विशेष पीएमएलए न्यायालय के समक्ष पूरक अभियोजन शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज करा दी गई है।
जांच के दौरान ईडी ने पाया कि आरोपियों ने इस अवैध नेटवर्क के जरिए भारी धनार्जन किया है। एजेंसी ने लगभग 35 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित संपत्ति (Proceeds of Crime) को विशेष रूप से चिह्नित किया था। इसी के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 31.70 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है।
दावा है कि इस पूरे प्रकरण में अब तक कुल मिलाकर लगभग 50 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। जानकारों का मानना है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के कल्याण के लिए मिलने वाले फंड की इस तरह की लूट पर लगाम लगाने और भ्रष्टाचार से बनाई गई अवैध संपत्तियों के साम्राज्य को ध्वस्त करने की दिशा में यह एक बेहद निर्णायक और बड़ी कार्रवाई साबित होगी। मामले में आगे की कानूनी और विधिक प्रक्रिया तेजी से जारी है।

