
यह अनूठा प्रदर्शन न केवल प्रशासन का ध्यान खींचने का प्रयास था, बल्कि ग्रामीण विकास की ठप पड़ी गाड़ी को फिर से पटरी पर लाने की मांग भी। सचिवों का है कि भाजपा सरकार ने उनसे जो वादे किए थे, वे पूरे नहीं किए गए, और अब वे वादाखिलाफी के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं।

इस हड़ताल से ग्राम पंचायतों के विकास कार्य रुक गए हैं, जिससे ग्रामीण जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब देखने वाली बात यह है कि क्या सरकार इस ढोल नगाड़ों की गूंज को सुनेगी या यह आवाज़ भी सियासत की भीड़ में गुम हो जाएगी।

