आकाश के पिता विजय लकड़ा मजदूरी करते हैं, जबकि मां कुंशिता लकड़ा मुंबई में काम करती हैं। उसकी एक बड़ी बहन भी है जो पढ़ाई कर रही है। परिवार वालों के अनुसार, आकाश मोबाइल पर घंटों गेम खेलने और यूट्यूब पर रील्स देखने का आदी हो गया था। स्कूल से लौटने के बाद वह ज़्यादातर समय मोबाइल पर ही बिताता था। घरवाले उसे बार-बार समझाते थे और मोबाइल से दूर रखने की कोशिश करते थे, लेकिन आकाश किसी न किसी तरह मोबाइल हासिल कर ही लेता था।
घटना के दिन जब चचेरे भाई ने मोबाइल नहीं दिया, तो वह घर लौट गया और खुद को कमरे में बंद कर लिया। कुछ देर बाद जब दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों ने देखा कि आकाश ने फांसी लगा ली है। तुरंत उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

यह घटना मोबाइल की बढ़ती लत और बच्चों पर इसके गंभीर मानसिक प्रभावों को लेकर समाज के लिए एक चेतावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नियंत्रण और संवाद बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी दुखद घटनाएं रोकी जा सकें।

