बलरामपुर जिले के कुसमी नगर पंचायत क्षेत्र में प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण कार्रवाई ने क्षेत्र में रोष और चिंता की लहर दौड़ा दी है। कई लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई चयनित और भेदभावपूर्ण ढंग से की जा रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकार एक ओर भूमिहीनों और आवासविहीनों को भूमि और घर मुहैया कराने की योजना चला रही है, वहीं दूसरी ओर लोगों के वर्षों पुराने घरों को अतिक्रमण के नाम पर तोड़ा जा रहा है।
प्रभावित लोगों में स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र सोमनाथ भगत का नाम प्रमुखता से सामने आया है, जो एक भूतपूर्व पंच भी रह चुके हैं। वे कई वर्षों से अपने घर में निवास कर रहे थे, जिसे प्रशासन ने तोड़ दिया। इसी तरह फहीम खान, जिन्हें कई साल पहले वैध रूप से पट्टा मिला था, अपनी दुकान से आजीविका चला रहे थे। उनकी दुकान भी जमींदोज कर दी गई। स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई न केवल अमानवीय है, बल्कि सरकार की योजनाओं की भावना के भी विपरीत है।

लोगों ने शासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है कि अतिक्रमण के नाम पर की जा रही इन कार्रवाइयों की निष्पक्ष जांच हो और जिनके पास वैध दस्तावेज़ हैं, उन्हें बेघर न किया जाए। साथ ही ऐसी कार्रवाई से पहले पीड़ितों को सुनवाई का उचित मौका दिया जाना चाहिए। यह मामला अब सामाजिक न्याय और प्रशासनिक पारदर्शिता का भी प्रश्न बनता जा रहा है।

