छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से संविलियन से पूर्व सेवा गणना को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में माननीय हाई कोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के पूर्व आदेश को सही ठहराया है।
दरअसल, वर्ष 1998 से नगरीय निकाय एवं पंचायत विभाग में शिक्षा कर्मी के रूप में कार्यरत शिक्षकों ने संविलियन से पहले की सेवा को पेंशन गणना में शामिल किए जाने की मांग को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। मुख्य याचिकाकर्ता राजेंद्र प्रसाद पटेल के प्रकरण से जुड़े इस मामले में प्रदेश के हजारों एलबी संवर्ग के शिक्षकों ने अधिवक्ता संजीव वर्मा के माध्यम से याचिका दायर की थी। याचिका में संविलियन की कंडिका 4 को चुनौती देते हुए यह मांग की गई थी कि उनकी पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने हेतु जोड़ा जाए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि संविलियन के बाद भी उनकी पूर्व सेवा को पेंशन गणना में शामिल नहीं किया जा रहा है, जिससे वे पुरानी पेंशन योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह पूर्व सेवा को पेंशन लाभ में शामिल करने पर विचार करे और इसके लिए 120 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की थी।
हालांकि, इस आदेश का पालन करने के बजाय राज्य सरकार ने सिंगल बेंच के निर्णय को चुनौती देते हुए डबल बेंच में अपील दायर कर दी। 23 अप्रैल को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने दलील दी कि संविलियन के समय निर्धारित शर्तों के आधार पर ही पेंशन का निर्धारण होना चाहिए। साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि 30 जून 2018 से पूर्व शिक्षा कर्मी शासकीय कर्मचारी नहीं थे, इसलिए उनकी सेवा को पेंशन योग्य नहीं माना जा सकता।
इसके विपरीत, शिक्षकों की ओर से यह तर्क रखा गया कि जब शिक्षा कर्मियों से वर्ष 2012 से राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत कटौती की जा रही थी और संविलियन के लिए उनकी सेवा अवधि को मान्यता दी गई थी, तो फिर पेंशन गणना में उनकी पूर्व सेवा को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के निर्णय को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। इस फैसले के बाद प्रदेशभर के शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि न्यायालय के आदेश को जल्द से जल्द लागू किया जाए, ताकि सेवानिवृत्त और सेवा में कार्यरत शिक्षकों को पेंशन का लाभ मिल सके। इस आंदोलन में प्रदेश शिक्षक विधिक समिति के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद पटेल, उपेन्द्र कुमार सिंह, कमलेश मेहता, प्रदीप चौबे, रियाज अंसारी, मुकुट अनिल किंडो और गोपेन्द्र सार्दुल सहित कई शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस ऐतिहासिक निर्णय पर बलरामपुर शालेय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष उपेन्द्र कुमार सिंह ने सभी शिक्षकों को बधाई देते हुए आगे की रणनीति के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।
शिक्षकों के पक्ष में बड़ा फैसला, हाई कोर्ट ने सरकार की अपील की खारिज।

