बलरामपुर-रामानुजगंज। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय से जिला कलेक्टर के लेटरहेड पर जारी दो अलग-अलग आदेशों के मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले के मीडिया में प्रमुखता से सामने आने के बाद शिक्षा विभाग बैकफुट पर नजर आ रहा है। विभाग ने अपनी ओर से जारी स्पष्टीकरण में इसे “लिपिकीय त्रुटि” बताया है, लेकिन इस सफाई ने विवाद को समाप्त करने के बजाय कई नए प्रश्नों को जन्म दे दिया है।
जानकारों का कहना है कि जिला कलेक्टर के लेटरहेड का उपयोग एक संवेदनशील और जिम्मेदारीपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है। ऐसे में एक ही विषय से संबंधित दो अलग-अलग आदेश जारी होना और बाद में उसे मात्र लिपिकीय त्रुटि बताना पूरे मामले को संदेह के घेरे में खड़ा करता है। सामान्यतः किसी भी कार्यालय से जारी होने वाले आदेश कई स्तरों की प्रशासनिक प्रक्रिया और परीक्षण से गुजरते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इतनी बड़ी त्रुटि अधिकारियों की नजर से कैसे ओझल रही।
मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि आदेश वास्तव में त्रुटिपूर्ण थे, तो विभाग को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई। कई दिनों तक आदेश प्रभावी बने रहे, लेकिन किसी अधिकारी द्वारा उनकी समीक्षा अथवा सुधार की आवश्यकता महसूस नहीं की गई। जैसे ही मामला मीडिया की सुर्खियों में आया, विभाग सक्रिय हुआ और डीईओ मनीराम यादव की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया गया।
विवादित आदेश से प्रभावित कर्मचारियों के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विभाग ने यह तो स्पष्ट कर दिया कि आदेश त्रुटिवश जारी हुए थे, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रभावित कर्मचारियों के हित में कोई संशोधित आदेश जारी किया जाएगा या नहीं। इससे कर्मचारियों में भ्रम और नाराजगी देखी जा रही है।
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू जवाबदेही का है। यदि यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों अथवा कर्मचारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी? या फिर पूरे मामले को केवल “लिपिकीय त्रुटि” बताकर फाइलों में दबा दिया जाएगा, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस संबंध में पत्रकारों द्वारा दूरभाष पर चर्चा किए जाने पर बलरामपुर-रामानुजगंज कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी का पद अत्यंत जिम्मेदारी वाला पद है। उनके कार्यालय से प्रतिदिन बड़ी संख्या में पत्र और आदेश जारी होते हैं, जिन पर जिला शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर होते हैं। ऐसे में संबंधित लेटरहेड पर उनकी नजर क्यों नहीं पड़ी, यह गंभीर विषय है। कलेक्टर ने बताया कि इस मामले में डीईओ को फटकार लगाई गई है तथा उन्हें नोटिस भी जारी किया गया है।
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की एक बड़ी परीक्षा बन गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग केवल स्पष्टीकरण देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मानता है या फिर दोषियों पर कार्रवाई कर यह संदेश देता है कि सरकारी आदेशों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

