बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले के शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव को 28 सितंबर 2026 को उनके पद से हटाकर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परसा, विकासखंड अंबिकापुर में प्राचार्य के पद पर पदस्थ किया गया है। वहीं नरेंद्र कुमार निरापुरे को बलरामपुर-रामानुजगंज का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है।
तबादले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जांच हुई और जिनमें करीब 4.51 करोड़ रुपये की खरीदी से संबंधित गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं, उनमें आगे जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।
कई मदों की खरीदी प्रक्रिया पर उठे सवाल
मामला वित्तीय वर्ष 2025-26 में शिक्षा विभाग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और खरीदी प्रक्रियाओं का बताया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार साइकिल, विज्ञान एवं तकनीकी सामग्री, फर्नीचर, स्वच्छता सामग्री, खेल उपकरण और स्टेशनरी सहित कई मदों में खरीदी को लेकर सवाल उठाए गए हैं। जांच से जुड़ी रिपोर्टों में खरीदी प्रक्रिया, स्टॉक एवं भुगतान संबंधी अनियमितताओं का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि साइकिल सहित विभिन्न सामग्रियों की खरीदी और उनके स्टॉक एवं भौतिक सत्यापन को लेकर दस्तावेजी स्तर पर सवाल सामने आए। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम जिम्मेदारी और कानूनी निष्कर्ष संबंधित विभागीय प्रक्रिया एवं सक्षम प्राधिकारी के निर्णय से ही स्पष्ट होंगे।
तबादला हुआ, लेकिन आगे की कार्रवाई का सवाल कायम
मनीराम यादव को DEO पद से हटाया जाना प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है, लेकिन इससे जुड़े वित्तीय मामलों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया का क्या होगा, यह अब महत्वपूर्ण सवाल बन गया है।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहे है कि यदि जांच में सरकारी राशि के उपयोग में नियमों के उल्लंघन अथवा वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही, यदि सरकारी धन की क्षति प्रमाणित होती है तो उसकी वसूली तथा आवश्यक विभागीय या कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
इस मामले को लेकर सितंबर में कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम का बयान भी सामने आया था। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कहा था कि मामला उनके संज्ञान में है और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे में अब जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासनिक स्तर पर हुए तबादले के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ती भी है या नहीं।
जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की मांग—जवाबदेही तय हो
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोगों का कहना है कि सरकारी धन से जुड़े मामलों में केवल पदस्थापना में बदलाव पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल—जवाबदेही कब तय होगी?
शिक्षा विभाग सीधे विद्यार्थियों और सरकारी योजनाओं से जुड़ा संवेदनशील विभाग है। ऐसे में सरकारी राशि की खरीदी, भुगतान, स्टॉक और वितरण से संबंधित प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है।
मनीराम यादव का तबादला हो चुका है, लेकिन कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े सवाल अभी बाकी हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर शासन और विभाग आगे क्या कदम उठाते हैं—क्या मामला केवल प्रशासनिक तबादले तक सीमित रहेगा, या फिर जिम्मेदारी तय कर विभागीय कार्रवाई, वसूली अथवा अन्य कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।

