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September 2026

डिजिटल क्षेत्र में एक बड़ा कदम बलरामपुर में होगा स्थापित प्रदेश का पहला कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर

बलरामपुर में प्रदेश का पहला कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर स्थापित होगा, जिला प्रशासन और प्रिज्मा एआई के बीच हुआ एमओयू

बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले के युवाओं और स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित रोजगार के अवसरों के लिए जिले से बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। जिला प्रशासन बलरामपुर-रामानुजगंज और प्रिज्मा एआई के बीच कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर की स्थापना को लेकर गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। प्रशासन के अनुसार, इसके साथ ही बलरामपुर प्रदेश का पहला जिला बन गया है, जहां डेटा लेबलिंग एवं एआई से संबंधित कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर स्थापित किया जा रहा है।

कलेक्ट्रेट में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी, जिला पंचायत सीईओ श्री आशुतोष चतुर्वेदी, प्रिज्मा एआई के सीईओ डॉ. श्रीराम अय्यर, सीओओ श्री अमिताभ राय चौधरी, सीटीओ श्री विनीत कुमार झा सहित स्व-सहायता समूह की सदस्य सुश्री सपना एवं सुश्री अनुजा उपस्थित रहीं।

10 सीटों से शुरू होगा पायलट सेंटर

पायलट चरण में बलरामपुर में 10 सीटों वाला संचालन केंद्र शुरू किया जाएगा। केंद्र में एक समर्पित प्रशिक्षक और गुणवत्ता पर्यवेक्षक की व्यवस्था रहेगी। चयनित प्रतिभागियों को एआई साक्षरता, डिजिटल कौशल के साथ डेटा लेबलिंग, इमेज एवं ऑब्जेक्ट टैगिंग, वर्गीकरण, सत्यापन तथा गुणवत्ता समीक्षा जैसे कार्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों को विशेषज्ञों की निगरानी में वास्तविक कार्य का अनुभव भी मिलेगा। अभ्यर्थियों की पहचान, छंटनी और चयन के लिए संरचित प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

युवाओं और ‘लखपति दीदी’ के लक्ष्य से जोड़ने की पहल

कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि बलरामपुर का इस पहल में प्रदेश में अग्रणी होना जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि जिले में 12वीं उत्तीर्ण एवं स्नातक सदस्यों वाले बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूह हैं, जिनकी सदस्याएं स्मार्टफोन और कंप्यूटर के उपयोग में दक्ष हैं।

उन्होंने कहा कि डेटा एनोटेशन सेंटर के माध्यम से महिलाओं को पारंपरिक आजीविका के साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें अपने ही जिले में सम्मानजनक और नियमित आय के अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी तथा ‘लखपति दीदी’ के लक्ष्य को भी गति मिल सकती है। वहीं, एआई के बढ़ते दायरे को देखते हुए यह प्रशिक्षण स्थानीय युवाओं के लिए भविष्य के डिजिटल रोजगार के नए अवसरों का आधार बन सकता है।

कंपनी उठाएगी प्रशिक्षण और संचालन का खर्च

एमओयू के अनुसार, केंद्र की तकनीकी व्यवस्था, संचालन, प्रशिक्षण, गुणवत्ता पर्यवेक्षण, प्रतिभागियों के पारिश्रमिक एवं प्रोत्साहन राशि तथा इंटरनेट कनेक्टिविटी से संबंधित व्यय प्रिज्मा एआई द्वारा वहन किया जाएगा।

वहीं, जिला प्रशासन द्वारा केंद्र के लिए परिसर एवं आवश्यक बुनियादी ढांचे की पहचान, हितग्राहियों के चयन तथा एनआरएलएम, कौशल विकास कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ समन्वय में सहयोग किया जाएगा। केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था में भी प्रशासन सहयोग करेगा।

ग्रामीण युवाओं के लिए डिजिटल रोजगार की दिशा में कदम

कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर की स्थापना से जिले के ग्रामीण एवं शिक्षित युवाओं तथा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को एआई और डेटा से जुड़े कार्यों का स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक अनुभव मिलने की उम्मीद है। यह पहल डिजिटल कौशल को आजीविका से जोड़ने के साथ जिले में रोजगार के नए क्षेत्रों को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

एम आर यादव को DEO पद से हटाया गया, अब जवाबदेही और आगे की कार्रवाई पर निगाहें

बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले के शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव को 28 सितंबर 2026 को उनके पद से हटाकर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परसा, विकासखंड अंबिकापुर में प्राचार्य के पद पर पदस्थ किया गया है। वहीं नरेंद्र कुमार निरापुरे को बलरामपुर-रामानुजगंज का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है।
तबादले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जांच हुई और जिनमें करीब 4.51 करोड़ रुपये की खरीदी से संबंधित गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं, उनमें आगे जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।

कई मदों की खरीदी प्रक्रिया पर उठे सवाल

मामला वित्तीय वर्ष 2025-26 में शिक्षा विभाग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और खरीदी प्रक्रियाओं का बताया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार साइकिल, विज्ञान एवं तकनीकी सामग्री, फर्नीचर, स्वच्छता सामग्री, खेल उपकरण और स्टेशनरी सहित कई मदों में खरीदी को लेकर सवाल उठाए गए हैं। जांच से जुड़ी रिपोर्टों में खरीदी प्रक्रिया, स्टॉक एवं भुगतान संबंधी अनियमितताओं का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है।

कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि साइकिल सहित विभिन्न सामग्रियों की खरीदी और उनके स्टॉक एवं भौतिक सत्यापन को लेकर दस्तावेजी स्तर पर सवाल सामने आए। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम जिम्मेदारी और कानूनी निष्कर्ष संबंधित विभागीय प्रक्रिया एवं सक्षम प्राधिकारी के निर्णय से ही स्पष्ट होंगे।

तबादला हुआ, लेकिन आगे की कार्रवाई का सवाल कायम

मनीराम यादव को DEO पद से हटाया जाना प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है, लेकिन इससे जुड़े वित्तीय मामलों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया का क्या होगा, यह अब महत्वपूर्ण सवाल बन गया है।

स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहे है कि यदि जांच में सरकारी राशि के उपयोग में नियमों के उल्लंघन अथवा वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही, यदि सरकारी धन की क्षति प्रमाणित होती है तो उसकी वसूली तथा आवश्यक विभागीय या कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

इस मामले को लेकर सितंबर में कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम का बयान भी सामने आया था। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कहा था कि मामला उनके संज्ञान में है और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में अब जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासनिक स्तर पर हुए तबादले के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ती भी है या नहीं।

जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की मांग—जवाबदेही तय हो

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोगों का कहना है कि सरकारी धन से जुड़े मामलों में केवल पदस्थापना में बदलाव पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल—जवाबदेही कब तय होगी?

शिक्षा विभाग सीधे विद्यार्थियों और सरकारी योजनाओं से जुड़ा संवेदनशील विभाग है। ऐसे में सरकारी राशि की खरीदी, भुगतान, स्टॉक और वितरण से संबंधित प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है।

मनीराम यादव का तबादला हो चुका है, लेकिन कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े सवाल अभी बाकी हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर शासन और विभाग आगे क्या कदम उठाते हैं—क्या मामला केवल प्रशासनिक तबादले तक सीमित रहेगा, या फिर जिम्मेदारी तय कर विभागीय कार्रवाई, वसूली अथवा अन्य कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।

सेमेस्टर व जनभागीदारी शुल्क में कमी की मांग, अभाविप ने प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन।

रामानुजगंज। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) रामानुजगंज इकाई ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक एवं आर्थिक समस्याओं को लेकर शासकीय लरंगसाय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा। परिषद ने स्नातक एवं स्नातकोत्तर के तृतीय एवं पंचम सेमेस्टर के शुल्क में कमी करने, जनभागीदारी शुल्क को कम करने तथा सभी विषयों की कक्षाओं का नियमित एवं लगातार संचालन सुनिश्चित करने की मांग की है।
अभाविप का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में तृतीय एवं पंचम सेमेस्टर में अध्ययनरत विद्यार्थियों से लिया जा रहा शुल्क अधिक है। इससे सामान्य एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है। परिषद ने शुल्क व्यवस्था की समीक्षा कर विद्यार्थियों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उचित शुल्क निर्धारित करने की मांग की।

जनभागीदारी शुल्क में कटौती की मांग

ज्ञापन में स्नातक कक्षाओं की जनभागीदारी शुल्क राशि 750 रुपये से घटाकर 500 रुपये तथा स्नातकोत्तर कक्षाओं की जनभागीदारी शुल्क राशि 950 रुपये से घटाकर 600 रुपये किए जाने की मांग की गई है। परिषद ने विद्यार्थियों से लिए जा रहे जनभागीदारी शुल्क की समीक्षा कर शुल्क निर्धारण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी मांग रखी।

नियमित कक्षाओं के संचालन का मुद्दा भी उठाया

अभाविप ने महाविद्यालय में विभिन्न विषयों की कक्षाओं के नियमित संचालन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। परिषद के अनुसार जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान सहित कुछ अन्य विषयों की कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। परिषद ने सभी विषयों की कक्षाएं निर्धारित समय-सारणी के अनुसार नियमित रूप से संचालित करने की मांग की।

“एक ही विश्वविद्यालय, फिर अलग-अलग शुल्क क्यों?” — विकास महतो

अभाविप जिला संयोजक विकास महतो ने कहा कि सरगुजा विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों में शुल्क की राशि अलग-अलग है। उन्होंने दावा किया कि अन्य महाविद्यालयों की तुलना में रामानुजगंज के शासकीय लरंगसाय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विद्यार्थियों से लगभग 1,200 से 1,500 रुपये तक अधिक शुल्क लिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जब विश्वविद्यालय एक है तो शुल्क व्यवस्था भी समान एवं तार्किक होनी चाहिए। विद्यार्थियों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए शुल्क में उचित कमी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अभाविप विद्यार्थियों से जुड़े इन मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठाती रहेगी।
विकास महतो ने बताया कि परिषद ने महाविद्यालय प्रशासन को 24 घंटे का समय दिया है। उनका कहना है कि निर्धारित अवधि में शुल्क में उचित कमी एवं अन्य मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर विद्यार्थी परिषद आंदोलन के माध्यम से विद्यार्थियों की समस्याओं को उठाएगी।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नियमित कक्षाओं की मांग

अभाविप रामानुजगंज के नगर मंत्री सत्यम प्रजापति ने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर परिषद लगातार आवाज उठाती रही है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में कक्षाओं का नियमित संचालन, उचित शुल्क निर्धारण और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना महाविद्यालय प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
अभाविप ने महाविद्यालय प्रशासन से तृतीय एवं पंचम सेमेस्टर के शुल्क में कमी, जनभागीदारी शुल्क में कटौती तथा सभी विषयों की नियमित कक्षाएं संचालित करने की मांग पर तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया है। ज्ञापन सौंपे जाने के दौरान अभाविप कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

नौकरी का बाड़ा मौका, रायपुर रोजगार मेले में 5,031 से अधिक पदों पर सीधी भर्ती

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य के सभी 33 जिलों के युवाओं को राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार से जोड़ने के लिए 07 एवं 08 अक्टूबर, बुधवार व गुरुवार को बलबीर सिंह जुनेजा स्टेडियम, बूढ़ापारा, रायपुर में दो दिवसीय राज्य स्तरीय वृहद रोजगार मेला आयोजित किया जा रहा है। प्रातः 10 से सायं 05 बजे तक चलने वाले इस मेले में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के पात्र महिला एवं पुरुष अभ्यर्थी आमंत्रित हैं।
मेले में 25 राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ 5,031 से अधिक पदों पर भर्ती करेंगी। प्रमुख पदों में इलेक्ट्रिक मीटर टेक्नीशियन व इलेक्ट्रीशियन के 750, सिक्योरिटी गार्ड, सुपरवाइजर व नर्सिंग स्टाफ के 749, अप्रेंटिस ट्रेनी व क्वालिटी इंस्पेक्टर के 610, ऑपरेटर व पिकर-पैकर के 370, मशीन ऑपरेटर व असिस्टेंट के 250, बाइक राइडर व फील्ड एग्जीक्यूटिव के 250, मीटर इंस्टालर तथा ब्रांच मैनेजर व स्टोर कीपर के 200-200, कंप्यूटर व टेली कॉलर के 155 तथा डिलीवरी बॉय व सेल्स ऑफिसर के 100 पद शामिल हैं। चयनित अभ्यर्थियों को योग्यता व अनुभव के अनुसार 8,000 से 35,000 रुपये तक मासिक वेतन एवं अन्य सुविधाएँ मिलेंगी। कार्यस्थल बलरामपुर-रामानुजगंज जिला सहित प्रदेश के सभी जिलों के साथ पुणे, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और संभाजीनगर में होंगे।
मेले में शामिल होने के लिए आधार अपडेट जीवित रोजगार पंजीयन अनिवार्य है। पंजीयन सीजी रोजगार मोबाइल ऐप अथवा मतवरहंतण्बहण्हवअण्पद पोर्टल पर किया जा सकता है। अभ्यर्थी 10वीं, 12वीं, स्नातक, आईटीआई, डिप्लोमा या डिग्री के मूल प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, 5 पासपोर्ट फोटो, जीवित पंजीयन पर्ची तथा बायोडाटा के साथ मेला स्थल पर उपस्थित हों। अधिक जानकारी के लिए जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, बलरामपुर के दूरभाष 07831-796486 पर संपर्क किया जा सकता है।

खाद्य विभाग सभी जनपद पंचायतों में 28 से 30 सितंबर तक लगाएगा सेवा सेतु कैंप।

बलरामपुर रामानुजगंज सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत खाद्य विभाग द्वारा 28 से 30 सितंबर तक जिला मुख्यालय एवं सभी जनपद पंचायतों में सेवा सेतु कैंप लगाए जाएंगे। अभियान अवधि में आयोजित अन्य शिविरों में भी ये सेवाएँ उपलब्ध रहेंगी।
कैंप में राशनकार्ड सदस्यों की ई-केवाईसी, आधार व मोबाइल नंबर सीडिंग तथा राशनकार्ड संशोधन के कार्य किए जाएंगे। नए राशनकार्ड की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया व आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी देकर आवेदनों का मौके पर निराकरण किया जाएगा। साथ ही पीडीएस में वितरित चावल, चना, नमक, शक्कर व गुड़ के नमूने प्रदर्शित होंगे तथा शिकायतों के लिए ‘अन्न सहायता’ पोर्टल, कॉल सेंटर नंबर 1800-233-3663 और सीएम हेल्पलाइन की जानकारी दी जाएगी। खाद्य विभाग ने नागरिकों से कैंप का अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की है।

 

छत्तीसगढ़ न्यायालय की ऐतिहासिक फैसला झूठी शिकायतों के खिलाफ विशाल गुप्ता को मिली दोहरी जीत।

बलरामपुर/रामानुजगंज जिले के ग्राम भेदमी-पुटसुरा निवासी विशाल कुमार गुप्ता से जुड़े भूमि विवाद में न्यायिक कार्यवाही के दौरान उन्हें महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिलने का मामला सामने आया है। वर्ष 2019 में दहेजवार स्थित भूमि की रजिस्ट्री से शुरू हुआ विवाद बाद में आपराधिक प्रकरण, सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण और अंततः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक पहुंचा।  जानकारी के अनुसार, विभिन्न न्यायिक स्तरों पर हुई कार्यवाहियों को विशाल गुप्ता पक्ष अपनी “दोहरी कानूनी जीत” के रूप में देख रहे हैं।

2019 की जमीन रजिस्ट्री से शुरू हुआ विवाद

मामला ग्राम दहेजवार स्थित खसरा नंबर 221 की करीब 0.18 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा है। विशाल गुप्ता पक्ष के अनुसार, द्वारिका प्रसाद गुप्ता ने उक्त भूमि को अपनी निजी स्वामित्व की जमीन बताते हुए उनसे चेक के माध्यम से राशि प्राप्त की और 20 मई 2019 को विक्रय पत्र का पंजीयन कराया।
बाद में भूमि के स्वरूप और उसके हस्तांतरण की वैधानिकता को लेकर विवाद सामने आया। विशाल गुप्ता पक्ष का आरोप है कि भूमि के संबंध में गलत तथ्य प्रस्तुत करते हुए शपथ पत्र दिया गया था। इसके बाद राजस्व स्तर पर भी भूमि के विक्रय और उसके प्रभाव को लेकर कार्यवाही हुई। इन आरोपों और दस्तावेजों की वैधानिकता से संबंधित अंतिम स्थिति संबंधित न्यायालयों के आदेशों और राजस्व अभिलेखों से निर्धारित होती है।

JMFC के आदेश से आपराधिक प्रकरण

मिली जानकारी के अनुसार, विशाल कुमार गुप्ता की शिकायत एवं प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, बलरामपुर द्वारा 10 फरवरी 2025 को आदेश पारित किया गया। इसके बाद द्वारिका प्रसाद गुप्ता के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 468 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज हुआ, जिसे प्रकरण क्रमांक 222/2025 बताया गया है।
द्वारिका प्रसाद गुप्ता की ओर से इस आदेश को चुनौती देते हुए प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, रामानुजगंज के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुनरीक्षण प्रकरण क्रमांक 09/2025 को 26 मई 2026 को खारिज कर दिया गया। विशाल गुप्ता पक्ष इसे मामले में मिली महत्वपूर्ण न्यायिक राहत मानते हैं।

हाईकोर्ट में भी रिट अपील खारिज

विवाद का एक अन्य पक्ष छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर तक पहुंचा। WA No. 871 of 2026 में 18 सितंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार पीठ में मुख्य न्यायाधीश श्री कृष्ण राम महापात्र एवं न्यायमूर्ति श्री संतोष शर्मा शामिल थे।
विशाल गुप्ता के मुताबिक, इस मामले में अलीमुद्दीन की ओर से दायर रिट अपील को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। मामले में शिकायतकर्ता के वैधानिक अधिकार एवं Locus Standi से संबंधित प्रश्न पर भी न्यायालय के समक्ष विचार हुआ। मामले में अधिवक्ता सौरभ साहू द्वारा प्रस्तुत पक्ष को विशाल गुप्ता ने सराहनीय बताया है।

1987 के भूमि आवंटन से जुड़ा महत्वपूर्ण कानूनी पहलू

मामले में भूमि के मूल आवंटन और वर्ष 2019 के हस्तांतरण को लेकर भी महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु सामने आया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विवादित भूमि 1987 में द्वारिका प्रसाद गुप्ता को आवंटित हुई थी।
हाईकोर्ट की कार्यवाही से संबंधित उपलब्ध विवरण में यह भी बताया गया है कि 20 वर्ष की अवधि पूर्ण होने के बाद उन्हें उक्त भूमि का भूमिस्वामी माना गया और वर्ष 2019 में बिक्री की गई। इसी संदर्भ में भूमि हस्तांतरण के लिए कलेक्टर की पूर्व अनुमति आवश्यक थी या नहीं, इस प्रश्न पर भी न्यायालय के समक्ष विचार हुआ। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, न्यायालय ने उस समय पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं मानी।

विशाल गुप्ता ने कहा—न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत हुआ

विशाल कुमार गुप्ता ने न्यायालयों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूरे विवाद के दौरान उन्हें आर्थिक एवं मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखा।
उनका कहना है कि न्यायालयों में हुई कार्यवाहियों से उनका कानून और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी मामले में कानून के अनुसार ही कार्रवाई होगी।

आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी

इस पूरे मामले में द्वारिका प्रसाद गुप्ता, विकेश गुप्ता और अलीमुद्दीन के खिलाफ लगाए गए कई आरोप विशाल गुप्ता पक्ष की ओर से किए गए दावे हैं। उपलब्ध सामग्री में इन आरोपों पर संबंधित विपक्षी पक्ष का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए इन आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य के बजाय संबंधित पक्ष के दावे के रूप में देखा जाना उचित होगा।

जमीन विवाद ने उठाए दस्तावेजी पारदर्शिता के सवाल

यह मामला भूमि आवंटन, भूमिस्वामित्व, विक्रय पंजीयन, शपथ पत्र, राजस्व अभिलेख और न्यायिक कार्यवाही जैसे कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं से जुड़ा है। ऐसे मामलों में भूमि का मूल आवंटन आदेश, राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण संबंधी प्रविष्टियां, पंजीकृत विक्रय पत्र तथा संबंधित न्यायालयों के प्रमाणित आदेश महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, JMFC स्तर पर आपराधिक कार्यवाही, उसके विरुद्ध सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण तथा हाईकोर्ट में रिट अपील की कार्यवाही के बाद विशाल गुप्ता पक्ष ने इन आदेशों को अपने पक्ष में महत्वपूर्ण कानूनी राहत बताते हुए न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास व्यक्त किया है।

गांजा तस्करी के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 2.345 किलो गांजा जब्त

अनूपपुर/बिजुरी। अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बिजुरी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति को कथित रूप से गांजा रखने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी के कब्जे से 2 किलो 345 ग्राम गांजा बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 25 हजार रुपये बताई गई है।
मिली जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अनूपपुर विक्रान्त मुराब के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगन्नाथ मरकाम एवं एसडीओपी कोतमा आरती शाक्य के मार्गदर्शन में की गई।

मुखबिर की सूचना पर पहुंची पुलिस

पुलिस के अनुसार मुखबिर से सूचना मिली थी कि ठाकुर बाबा धाम (लोहसरा) के पास बरगद के पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर एक व्यक्ति काले रंग के बैग में गांजा लेकर बैठा है। सूचना की तस्दीक के लिए पुलिस टीम साक्षियों के साथ मौके पर पहुंची।
पुलिस का कहना है कि मौके पर एक व्यक्ति काला बैग लेकर बैठा दिखाई दिया। पुलिस को देखकर वह बैग सहित झाड़ियों की ओर भागने लगा, जिसे पुलिस टीम ने घेराबंदी कर पकड़ लिया।

बैग की तलाशी में मिला गांजा

पूछताछ में पकड़े गए व्यक्ति ने अपना नाम बबलू बेनिया (44 वर्ष), पिता निलंबर बेनिया, मूल निवासी बक्सी तुलसी पाली, थाना जूनागढ़, जिला कालाहांडी, ओडिशा तथा वर्तमान निवासी वार्ड क्रमांक 07, पड़रीपानी, बिजुरी बताया।
पुलिस के अनुसार आरोपी के पास मौजूद काले बैग की तलाशी लेने पर उसमें हरी सूखी पत्तियां, डंठल एवं बीजयुक्त पदार्थ मिला। आरोपी ने इसे गांजा बताया। इलेक्ट्रॉनिक तराजू से तौल करने पर पन्नी एवं टेप सहित कुल वजन 2 किलो 345 ग्राम पाया गया।

NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज

पुलिस ने मौके पर पंचनामा तैयार कर बरामद गांजे को विधिवत सील कर अपने कब्जे में लिया। आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 8/20(b) के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत पेश करते हुए मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई इस कार्रवाई में बिजुरी पुलिस टीम की विशेष भूमिका रही।

छत्तीसगढ़ में व्याख्याता भर्ती का रास्ता साफ, 854 पदों पर सीधी भर्ती

रायपुर। छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का एक और अवसर सामने आया है। जानकारी के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग में व्याख्याता के 854 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग ने भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है। यह भर्ती मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत घोषित पांच हजार शिक्षकीय पदों पर भर्ती की प्रक्रिया का हिस्सा है।
जानकारी के अनुसार व्याख्याता के कुल 854 पद निर्धारित किए गए हैं। इनमें ई-संवर्ग के 424 पद तथा टी-संवर्ग के 430 पद शामिल हैं। विभिन्न विषयों के लिए पद निर्धारित किए गए हैं, जिसमें हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत विषय में 120-120 पद रखे गए हैं।

नवंबर में हो सकती है परीक्षा

भर्ती प्रक्रिया के तहत परीक्षा की संभावित तिथि 29 नवंबर 2026 बताई गई है। अभ्यर्थियों को परीक्षा की अंतिम तिथि, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, पाठ्यक्रम एवं अन्य महत्वपूर्ण शर्तों के लिए विभाग द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञापन और आगामी निर्देशों पर नजर रखने की आवश्यकता होगी।
व्याख्याता के इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच उम्मीदें जगी है। लंबे समय से शिक्षकीय पदों पर भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह भर्ती महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है ।

ATS की कार्रवाई में मारा गया झारखंड का 30 लाख इनामी बृजेश गंझू।

चतरा प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) के सुप्रीमो और झारखंड के चतरा निवासी बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता को उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने वाराणसी में हुई मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस के अनुसार, रविवार 20 सितंबर 2026 की सुबह रामनगर थाना क्षेत्र में लंका मैदान के पास यह कार्रवाई हुई। बृजेश गंझू पर झारखंड सरकार और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

बाइक से जा रहा था बृजेश, रोकने पर हुई फायरिंग

सूत्रों के मुताबिक, यूपी ATS को सूचना मिली थी कि बृजेश गंझू अपने एक साथी के साथ बाइक से टेंगरा मोड़ से मुगलसराय की ओर जा रहा है। सूचना के आधार पर ATS और रामनगर पुलिस की संयुक्त टीम ने लंका मैदान के पास उसे रोकने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान फायरिंग हुई। जवाबी कार्रवाई में बृजेश को गोली लगी।

घायल अवस्था में उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं, उसका साथी मौके से फरार होने में सफल रहा। पुलिस द्वारा पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।

दो पुलिसकर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी गोली

मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम पर भी फायरिंग किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, ATS के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोली लगी। दोनों पुलिसकर्मियों के सुरक्षित होने की जानकारी दी गई है।

झारखंड सरकार ने रखा था 25 लाख का इनाम

मिली जानकारी के अनुसार बृजेश गंझू चतरा जिले का रहने वाला बताया गया है। उस पर झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख रुपये तथा NIA की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस तरह उस पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम था। NIA के कई मामलों में भी उसकी तलाश बताई गई थी।

रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया है कि उस दौरान बृजेश की गतिविधियों और विभिन्न स्तरों पर संपर्क को लेकर जांच एजेंसियों की नजर थी। पिछले कुछ वर्षों से उसके भूमिगत रहने की बात सामने आ रही थी। अब वाराणसी में हुई ATS की कार्रवाई के बाद उसके मारे जाने की पुष्टि पुलिस की ओर से की गई है।

लंबे समय से एजेंसियों के निशाने पर था

बृजेश गंझू के खिलाफ उग्रवादी गतिविधियों और टेरर फंडिंग से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों द्वारा कार्रवाई की जा रही थी। उस पर घोषित 30 लाख रुपये का इनाम उसकी तलाश की गंभीरता को दर्शाता था। वाराणसी में हुई मुठभेड़ के बाद अब जांच एजेंसियां उसके फरार साथी और मुठभेड़ से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल में जुटी हैं।

घटिया निर्माण की भेंट चढ़ा चेकडेम क्षतिग्रस्त, निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल।

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में जनपद पंचायत शंकरगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत कमारी में मनरेगा योजना से करीब 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित चेकडेम पहली ही बारिश में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि निर्माण को अभी महज तीन महीने ही हुए थे। चेकडेम के बड़े हिस्से में दरारें पड़ने के साथ ही पक्का निर्माण कई स्थानों से टूटकर बह गया है।
ग्रामीणों के अनुसार चेकडेम का निर्माण जल संरक्षण और सिंचाई सुविधा के उद्देश्य से कराया गया था, लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद इसकी स्थिति खराब होने लगी। मानसून की बारिश के बाद चेकडेम का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

पहली बारिश में खुली निर्माण की पोल?

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब 20 लाख रुपये की लागत से तैयार हुआ कोई निर्माण महज तीन महीने में ही क्षतिग्रस्त हो जाए, तो इसकी गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की जांच आवश्यक है।
हालांकि, निर्माण में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे में पूरे मामले में तकनीकी जांच और निर्माण की गुणवत्ता का परीक्षण कराए जाने की मांग उठ रही है।

जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल

इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद चेकडेम के क्षतिग्रस्त होने से संबंधित विभागीय अधिकारियों की निगरानी और निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर है।
यदि जांच में निर्माण कार्य में तकनीकी खामी, मानकों की अनदेखी या अन्य अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई के साथ-साथ सरकारी राशि की जवाबदेही तय किए जाने की मांग की जा रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं।