छत्तीसगढ़ में संविदा शोषण के खिलाफ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों का आंदोलन लगातार जारी है। आज हड़ताल के छठवें दिन कर्मचारियों ने मुंडन कराकर विरोध जताया और संविदा प्रथा का पुतला दहन कर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश प्रकट किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में 16,000 से अधिक एनएचएम कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इनमें स्थायीकरण, बीमा और पेंशन की सुविधा प्रमुख मांगों में शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएँ नहीं मिल रही हैं।
हड़ताल का असर लगातार हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो चुकी हैं। मरीजों को दवाइयाँ उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। नवजात वार्ड और पोषण आहार केंद्र बंद हैं। शुगर, ब्लड टेस्ट, टूनाट, सीबीनाट और नेत्र जांच जैसी जरूरी जांचें ठप हो गई हैं। स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वास्थ्य परीक्षण पूरी तरह बंद है। टीकाकरण और संस्थागत प्रसव सुविधा भी प्रभावित है। इसके अलावा टीबी, मलेरिया और कुष्ठ जैसी बीमारियों के मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाएं भी बाधित हो गई हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के उप स्वास्थ्य केंद्र, पीएचसी और कई अस्पताल अव्यवस्था की स्थिति में हैं। कई जगहों पर तो स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह बंद पड़े हैं। कर्मचारी संघ का अल्टीमेटम एनएचएम कर्मचारी संघ ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन और भी उग्र होगा। संघ ने कहा कि इस स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। कर्मचारियों के इस हड़ताल से सरकार पर कुछ असर दिखता भी है या नहीं

