जिला प्रशासन को दि गई लिखित शिकायत में बताया गया है कि पिछले लगभग ढाई वर्षों से सड़क निर्माण में उपयोग हो रहे सीमेंट मटेरियल और राखड़ को बिना सुरक्षा मानकों के खुले में छोड़ा जा रहा है। इसके कारण सड़क के दोनों ओर लगभग आधा किलोमीटर क्षेत्र में धूल का घना असर फैल चुका है। इससे सैकड़ों परिवार, दुकानें, विद्यालय, बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे तथा दैनिक आवागमन करने वाले लोग गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार धूल के संपर्क में रहने से छोटे बच्चों में फेफड़ों के विकास में बाधा, निमोनिया और सांस संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। किशोरों में एलर्जी, दमा और आंखों की समस्याएं देखी जा रही हैं, जबकि वयस्कों में सांस फूलना, त्वचा व आंखों में जलन और कार्यक्षमता में कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। बुजुर्गों में दमा, ब्रोंकाइटिस, COPD और हृदय रोग का खतरा बढ़ गया है। गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशुओं पर भी इसके नकारात्मक प्रभाव की आशंका जताई गई है।

आरोप है कि निर्माण एजेंसियां नियमित पानी का छिड़काव नहीं कर रही हैं, सीमेंट व राखड़ को ढककर परिवहन नहीं किया जा रहा और प्रभावित आबादी के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है, जो पर्यावरण एवं श्रम सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि चक्का जाम शांतिपूर्ण होगा तथा स्कूल वाहन, एंबुलेंस और आवश्यक सेवाओं को बाधित नहीं किया जाएगा। मुख्य ठेकेदार श्याम इंफ्रा निर्माण प्राइवेट लिमिटेड और पेटी ठेकेदार शिवालिक बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड की कार्यप्रणाली के विरोध में यह आंदोलन किया जा रहा है।

