बलरामपुर/रामानुजगंज जिले के ग्राम भेदमी-पुटसुरा निवासी विशाल कुमार गुप्ता से जुड़े भूमि विवाद में न्यायिक कार्यवाही के दौरान उन्हें महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिलने का मामला सामने आया है। वर्ष 2019 में दहेजवार स्थित भूमि की रजिस्ट्री से शुरू हुआ विवाद बाद में आपराधिक प्रकरण, सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण और अंततः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक पहुंचा। जानकारी के अनुसार, विभिन्न न्यायिक स्तरों पर हुई कार्यवाहियों को विशाल गुप्ता पक्ष अपनी “दोहरी कानूनी जीत” के रूप में देख रहे हैं।
2019 की जमीन रजिस्ट्री से शुरू हुआ विवाद
मामला ग्राम दहेजवार स्थित खसरा नंबर 221 की करीब 0.18 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा है। विशाल गुप्ता पक्ष के अनुसार, द्वारिका प्रसाद गुप्ता ने उक्त भूमि को अपनी निजी स्वामित्व की जमीन बताते हुए उनसे चेक के माध्यम से राशि प्राप्त की और 20 मई 2019 को विक्रय पत्र का पंजीयन कराया।
बाद में भूमि के स्वरूप और उसके हस्तांतरण की वैधानिकता को लेकर विवाद सामने आया। विशाल गुप्ता पक्ष का आरोप है कि भूमि के संबंध में गलत तथ्य प्रस्तुत करते हुए शपथ पत्र दिया गया था। इसके बाद राजस्व स्तर पर भी भूमि के विक्रय और उसके प्रभाव को लेकर कार्यवाही हुई। इन आरोपों और दस्तावेजों की वैधानिकता से संबंधित अंतिम स्थिति संबंधित न्यायालयों के आदेशों और राजस्व अभिलेखों से निर्धारित होती है।
JMFC के आदेश से आपराधिक प्रकरण
मिली जानकारी के अनुसार, विशाल कुमार गुप्ता की शिकायत एवं प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, बलरामपुर द्वारा 10 फरवरी 2025 को आदेश पारित किया गया। इसके बाद द्वारिका प्रसाद गुप्ता के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 468 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज हुआ, जिसे प्रकरण क्रमांक 222/2025 बताया गया है।
द्वारिका प्रसाद गुप्ता की ओर से इस आदेश को चुनौती देते हुए प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, रामानुजगंज के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुनरीक्षण प्रकरण क्रमांक 09/2025 को 26 मई 2026 को खारिज कर दिया गया। विशाल गुप्ता पक्ष इसे मामले में मिली महत्वपूर्ण न्यायिक राहत मानते हैं।
हाईकोर्ट में भी रिट अपील खारिज
विवाद का एक अन्य पक्ष छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर तक पहुंचा। WA No. 871 of 2026 में 18 सितंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार पीठ में मुख्य न्यायाधीश श्री कृष्ण राम महापात्र एवं न्यायमूर्ति श्री संतोष शर्मा शामिल थे।
विशाल गुप्ता के मुताबिक, इस मामले में अलीमुद्दीन की ओर से दायर रिट अपील को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। मामले में शिकायतकर्ता के वैधानिक अधिकार एवं Locus Standi से संबंधित प्रश्न पर भी न्यायालय के समक्ष विचार हुआ। मामले में अधिवक्ता सौरभ साहू द्वारा प्रस्तुत पक्ष को विशाल गुप्ता ने सराहनीय बताया है।
1987 के भूमि आवंटन से जुड़ा महत्वपूर्ण कानूनी पहलू
मामले में भूमि के मूल आवंटन और वर्ष 2019 के हस्तांतरण को लेकर भी महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु सामने आया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विवादित भूमि 1987 में द्वारिका प्रसाद गुप्ता को आवंटित हुई थी।
हाईकोर्ट की कार्यवाही से संबंधित उपलब्ध विवरण में यह भी बताया गया है कि 20 वर्ष की अवधि पूर्ण होने के बाद उन्हें उक्त भूमि का भूमिस्वामी माना गया और वर्ष 2019 में बिक्री की गई। इसी संदर्भ में भूमि हस्तांतरण के लिए कलेक्टर की पूर्व अनुमति आवश्यक थी या नहीं, इस प्रश्न पर भी न्यायालय के समक्ष विचार हुआ। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, न्यायालय ने उस समय पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं मानी।
विशाल गुप्ता ने कहा—न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत हुआ
विशाल कुमार गुप्ता ने न्यायालयों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूरे विवाद के दौरान उन्हें आर्थिक एवं मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखा।
उनका कहना है कि न्यायालयों में हुई कार्यवाहियों से उनका कानून और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी मामले में कानून के अनुसार ही कार्रवाई होगी।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी
इस पूरे मामले में द्वारिका प्रसाद गुप्ता, विकेश गुप्ता और अलीमुद्दीन के खिलाफ लगाए गए कई आरोप विशाल गुप्ता पक्ष की ओर से किए गए दावे हैं। उपलब्ध सामग्री में इन आरोपों पर संबंधित विपक्षी पक्ष का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए इन आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य के बजाय संबंधित पक्ष के दावे के रूप में देखा जाना उचित होगा।
जमीन विवाद ने उठाए दस्तावेजी पारदर्शिता के सवाल
यह मामला भूमि आवंटन, भूमिस्वामित्व, विक्रय पंजीयन, शपथ पत्र, राजस्व अभिलेख और न्यायिक कार्यवाही जैसे कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं से जुड़ा है। ऐसे मामलों में भूमि का मूल आवंटन आदेश, राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण संबंधी प्रविष्टियां, पंजीकृत विक्रय पत्र तथा संबंधित न्यायालयों के प्रमाणित आदेश महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, JMFC स्तर पर आपराधिक कार्यवाही, उसके विरुद्ध सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण तथा हाईकोर्ट में रिट अपील की कार्यवाही के बाद विशाल गुप्ता पक्ष ने इन आदेशों को अपने पक्ष में महत्वपूर्ण कानूनी राहत बताते हुए न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास व्यक्त किया है।

