बलरामपुर-रामानुजगंज। छत्तीसगढ़ में नर्सिंग संवर्ग के वेतनमान को लेकर एक बार फिर आवाज तेज होती नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ प्रदेश नर्सेस एसोसिएशन ने नर्सों की वेतन विसंगति दूर करने और अन्य राज्यों के अनुरूप सम्मानजनक वेतनमान निर्धारित करने की मांग को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित किया है।
एसोसिएशन की ओर से मुख्यमंत्री के नाम बलरामपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर वर्ष 2018 में नर्सिंग संवर्ग के वेतनमान को लेकर गठित समिति की सिफारिशों को लागू करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि वर्ष 2018 में नर्सिंग संवर्ग की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन किया गया था, जिसके बाद शासन स्तर पर समिति का गठन किया गया था, लेकिन समिति की सिफारिशों के बावजूद वेतन विसंगति का अपेक्षित समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
शैक्षणिक योग्यता और जिम्मेदारी के अनुरूप वेतन की मांग
एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष रौसेना कुजूर का कहना है कि प्रदेश की नर्सें लंबे समय से वेतनमान में सुधार और विसंगति दूर करने की मांग करती आ रही हैं। संगठन ने अपने ज्ञापन में विभिन्न राज्यों में नर्सिंग संवर्ग को दिए जा रहे वेतनमान का तुलनात्मक उल्लेख करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ में स्टाफ नर्स सहित अन्य नर्सिंग पदों का वेतन उनकी शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण, कार्य की जटिलता, जिम्मेदारी और जोखिम के अनुपात में अपेक्षाकृत कम है।
ICU से लेकर इमरजेंसी तक 24 घंटे सेवा
एसोसिएशन ने विशेष रूप से स्टाफ नर्स, GNM और B.Sc. Nursing के वेतनमान का मुद्दा उठाया है। संगठन का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ अस्पतालों के ICU, OT, NICU, इमरजेंसी सहित विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे मरीजों की सेवा करता है। स्वास्थ्य व्यवस्था में नर्सों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने के बावजूद उनके वेतनमान में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया है।
एसोसिएशन ने ज्ञापन के साथ विभिन्न राज्यों का तुलनात्मक चार्ट भी प्रस्तुत किया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के साथ महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, ओडिशा, राजस्थान, केरल, दिल्ली सहित अन्य राज्यों में नर्सिंग संवर्ग को मिलने वाले वेतनमान का उल्लेख किया गया है।
2018 की मांग आज भी अधूरी होने का दावा
नर्सेस एसोसिएशन का कहना है कि वर्ष 2018 में उठाई गई मांगों के बाद शासन द्वारा गठित समिति की सिफारिशों को अब धरातल पर लागू किया जाना चाहिए। संगठन ने नर्सिंग संवर्ग की वेतन विसंगतियों को दूर कर अन्य राज्यों के समान अथवा समुचित वेतनमान निर्धारित करने की मांग की है।
एसोसिएशन का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर शासन द्वारा जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि नर्सिंग संवर्ग अपने अधिकारों और वेतन विसंगति के मुद्दे को लेकर आंदोलन को और तेज कर सकता है।
अब देखना होगा कि नर्सिंग संवर्ग की लंबे समय से चली आ रही इन मांगों पर राज्य शासन और स्वास्थ्य विभाग क्या निर्णय लेते हैं। फिलहाल नर्सों के वेतनमान का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

