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November 2025

अवैध धान के परिवहन पर मंडी एवं राजस्व विभाग की बड़ी कार्रवाई।

बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले में धान खरीदी की तारीखों के ऐलान के साथ ही बिचौलियों की सक्रियता बढ़ गई है। ये बिचौलिए किसानों से कम कीमत पर धान खरीदकर उसे अवैध रूप से विभिन्न जिलों और राज्यों से लाने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध धान परिवहन के खिलाफ सख्ती दिखाई है। राजपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम चांची बैरियर के पास मंडी एवं राजस्व विभाग और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने दो ट्रकों को पकड़ा। इन ट्रकों में कुल 1580 बोरी अवैध धान भरा हुआ था। जब्त किए गए धान की अनुमानित कीमत करीब ₹16.5 लाख बताई जा रही है। अधिकारियों ने मंडी अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए दोनों ट्रकों को कब्जे में लेकर थाने में खड़ा करा दिया है तथा संबंधित ड्राइवरों और मालिकों से पूछताछ की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, जिले में कई बिचौलिए किसानों से धान को औने-पौने दाम में खरीद कर अवैध रूप से धान खरीदी केंद्रों पर बेचने के फिराक में हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि धान खरीदी केंद्रों पर किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित करने और अवैध व्यापार को रोकने के लिए जिलेभर में निगरानी बढ़ा दी गई है। सभी नाकों, बैरियरों और परिवहन मार्गों पर जांच चौकियां स्थापित की गई हैं। विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम नियमित रूप से कार्रवाई कर रही है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर कोई व्यक्ति या व्यापारी अवैध रूप से धान का परिवहन करते पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी उपज केवल शासन द्वारा निर्धारित खरीदी केंद्रों पर ही बेचें ताकि उन्हें समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिल सके और किसी भी तरह की ठगी से बचा जा सके। इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि प्रशासन धान की अवैध खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क और सख्त है, ताकि जिले में खरीदी व्यवस्था पारदर्शी और किसानों के हित में बनी रहे।

 

डीईओ मनीराम यादव ने एक और प्रधान पाठक को किया निलंबित।

बलरामपुर-रामानुजगंज। जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव ने एक बार फिर सख्त कदम उठाते हुए शासकीय प्राथमिक शाला कन्या आश्रम, पशुपतिपुर (विकासखंड वाड्रफनगर) की प्रधान पाठक श्रीमती सुमित्रा सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। डीईओ द्वारा की गई इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीमती सुमित्रा सिंह के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि उनका व्यवहार संस्था में कार्यरत अन्य कर्मचारियों के प्रति अनुचित था। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया तथा उनके साथ अभद्र भाषा में बातचीत की। इसके अलावा, आश्रम में रह रहे बच्चों के लिए शासन द्वारा निर्धारित मात्रा में खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई।

जांच में यह भी सामने आया कि शासन के निर्देशों के बावजूद श्रीमती सिंह अपने पति के साथ अधीक्षक आवास में निवास कर रही थीं, जबकि ऐसा करना नियमों के विपरीत है। साथ ही, 24 सितंबर 2025 को उन्हें प्रभारमुक्त किए जाने के बाद भी उन्होंने आश्रम के भंडार कक्ष को ताला लगाकर अपने अधिपत्य में रखा, जिससे बच्चों के पोषण और अन्य बुनियादी सुविधाओं में बाधा उत्पन्न हुई।

कार्यालयीन पत्र क्रमांक 12740/रामानुजगंज दिनांक 31 अक्टूबर 2025 के तहत उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, परंतु उन्होंने नोटिस प्राप्त करने से इंकार कर दिया। जांच समिति की रिपोर्ट में पाया गया कि उनका यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन है। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-9 (1)(क) के तहत श्रीमती सुमित्रा सिंह को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, रामचन्द्रपुर निर्धारित किया गया है, तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, डीईओ मनीराम यादव लगातार विभागीय अनुशासन और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम उठा रहे हैं। कुछ शिक्षकों ने कहा कि बरसों से बिगड़े शिक्षा तंत्र को सुधारने की दिशा में डीईओ की यह कार्रवाई एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है।

DEO मनीराम यादव ने एक और प्रधान पाठक को किया निलंबित।

बलरामपुर रामानुजगंज जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव ने शासकीय प्राथमिक शाला कन्या आश्रम, पशुपतिपुर (विकासखंड वाड्रफनगर) की प्रधान पाठक श्रीमती सुमित्रा सिंह को गंभीर आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीमती सिंह के विरुद्ध कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार, मानसिक प्रताड़ना तथा अशोभनीय आचरण की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह सिद्ध हुआ कि उनका व्यवहार संस्था में कार्यरत अन्य कर्मचारियों के प्रति अनुचित और अमर्यादित था। आश्रम में निवासरत बच्चों को शासन द्वारा निर्धारित मात्रा के अनुसार पर्याप्त खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी। साथ ही, शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद श्रीमती सिंह अपने पति के साथ अधीक्षक आवास में निवास कर रही थीं, जो नियमों का उल्लंघन है।

इसके अतिरिक्त, निलंबन आदेश के बाद भी श्रीमती सिंह ने आश्रम के भंडार कक्ष को बंद कर अपने अधिपत्य में रखा, जिससे बच्चों के पोषण और बुनियादी सुविधाओं में बाधा उत्पन्न हुई। कारण बताओ नोटिस प्राप्त करने से इंकार करने की पुष्टि भी जांच में हुई।

इन सभी कृत्यों को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है। अतः जिला शिक्षा अधिकारी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए श्रीमती सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, रामचन्द्रपुर निर्धारित किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।