बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में सुशासन समाधान शिविर का आयोजन किया गया था जब पत्रकार एवं भाजपा ओबिसी मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष शैलेश कुमार गुप्ता ने रामानुजगंज रिंग रोड में निर्माण कार्य की जानकारी लेने के उद्देश्य से मौके पर पहुंचकर। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता और प्रक्रिया से संबंधित कुछ सवाल रामानुजगंज के PWD संभाग-2 के EE अभियंता मोहन राम भगत से पूछे, जिस पर अधिकारी तिलमिला उठे शैलेश गुप्ता और पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार करने लगे। बात यहीं नहीं रुकी — उन्होंने पत्रकार का मोबाइल फोन छीनने की कोशिश की और छीना-झपटी की ।

इस घटना ने न केवल प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भाजपा सरकार के ‘भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी शासन’ के दावों पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। एक ओर भाजपा कार्यकर्ता और पत्रकार के साथ इस प्रकार का दुर्व्यवहार वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी का दबंगईपूर्ण रवैया — यह सब प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस घटना की निंदा करते हुए दोषी अधिकारी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों को उनके कर्तव्यों से रोका जाएगा, तो लोकतंत्र और जनहित दोनों ही खतरे में पड़ जाएंगे। देखन ने वाली बात यह होगी कि प्रशासन क्या कार्रवाई करती है।

