
वहीं विद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों से जानकारी लेने पर उन्होंने भी प्रधान पाठक के आचरण की सराहना करते हुए बताया कि सर बच्चों के साथ सदैव घरेलू व्यवहार करते हैं।
उनका स्वभाव सरल एवं सहयोगी है, जिससे छात्र भयमुक्त होकर विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करते हैं और सामान्य गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। कर्मचारियों का यह भी कहना था कि छात्रों द्वारा पुस्तकों में सील लगाना पूरी तरह स्वेच्छिक प्रक्रिया थी और इसमें प्रधान पाठक की कोई भूमिका नहीं रही है। उन्होंने कहा कि सर हमेशा छात्रों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देते हैं और उनके हित में कार्य करते हैं। इस प्रकार पूरे मामले की जांच के उपरांत यह स्पष्ट होता है कि लगाए गए आरोप निराधार एवं तथ्यहीन हैं। छात्रों और कर्मचारियों के बयानों से यह सिद्ध होता है कि प्रधान पाठक पर लगाए गए आरोप किसी गलतफहमी या उद्देश्यपूर्ण अफवाह का हिस्सा हो सकते हैं। विद्यालय में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने हेतु ऐसी झूठी बातों से बचने की आवश्यकता है।

