
सबसे अधिक चर्चा का विषय बने हुए हैं सदानंद कुशवाहा, जिनका नाम लंबे समय से शिक्षा विभाग में एक ‘स्थायी चेहरा’ बन चुका है। त्रस्त कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि कुशवाहा “सेटिंग” करने में माहिर हैं, जिसकी वजह से वह वर्षों से एक ही स्थान पर टिके हुए थे। कई लोगों का मानना है कि वह फिर से उसी रणनीति का उपयोग कर सकते हैं और बस्तर स्थानांतरण से बच सकते हैं।
अब सवाल यह उठता है कि क्या शिक्षा मंत्रालय इस बार सख्त रुख अपनाएगा और उन्हें बस्तर भेजेगा या फिर वह एक बार फिर सेटिंग के जरिए उसी जगह पर बने रहेंगे?
देखना दिलचस्प होगा कि शिक्षा विभाग की यह ‘साफ-सफाई’ कितनी दूर तक जाती है और क्या इस बार वाकई में बदलाव जमीन पर नजर आता भी है।

