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मंडी बोर्ड के संचालक की नियुक्ति निरस्त करने की मांग तेज, कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी

रायपुर,मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक महेंद्र सिंह सवई की संविदा नियुक्ति निरस्त करने की मांग अब तेज होती दिखाई दे रही है। उनकी नियुक्ति और कार्यप्रणाली को लेकर मंडी एवं मंडी बोर्ड के अधिकारियों-कर्मचारियों में असंतोष सामने आया है। अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन शासन को सौंपकर संविदा नियुक्ति निरस्त करने तथा उनके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी की पदस्थापना किए जाने की मांग की है।
आवेदन में श्री सवई की नियुक्ति से लेकर पदोन्नति और विभिन्न पदों पर पदस्थापना तक का उल्लेख करते हुए कई सवाल उठाए गए हैं। आवेदन के अनुसार उनकी पहली नियुक्ति वर्ष 1985-86 में मध्यप्रदेश मंडी बोर्ड, भोपाल में सचिव वर्ग ‘द’ के पद पर हुई थी। इसके बाद भाटगांव, आरंग, बालोद, बेमेतरा, बिलासपुर, कटघोरा, भाटापारा, नेवरा और रायपुर सहित विभिन्न कृषि उपज मंडी समितियों में उन्होंने सेवाएं दीं। बाद में उपसंचालक से लेकर संयुक्त संचालक सहित विभिन्न उच्च पदों पर पदोन्नति मिलने का भी आवेदन में उल्लेख है।

सेवानिवृत्ति के बाद संविदा नियुक्ति पर सवाल

अधिकारी मलिक रामपूर्त्ते के अनुसार श्री सवई 30 जून 2024 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके बाद राज्य शासन द्वारा उन्हें मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक पद पर संविदा नियुक्ति दी गई। इसी नियुक्ति को लेकर अधिकारियों-कर्मचारियों ने सवाल उठाते हुए शासन से पुनर्विचार की मांग की है।

आवेदनकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय तक मंडी विभाग एवं मंडी बोर्ड में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करने के बाद सेवानिवृत्ति के पश्चात पुनः इतने महत्वपूर्ण पद पर संविदा नियुक्ति दिए जाने की प्रक्रिया और आवश्यकता की समीक्षा की जानी चाहिए। साथ ही आवेदन में पूर्व की पदोन्नति एवं पदस्थापना से संबंधित शिकायतों की उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने की मांग भी की गई है।

कार्यप्रणाली को लेकर भी शिकायतें

शिकायत में प्रबंध संचालक की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अधिकारियों-कर्मचारियों का आरोप है कि कार्यालय में दबावपूर्ण एवं कथित तानाशाहीपूर्ण वातावरण बना हुआ है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि असहमति जताने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर कथित रूप से दबाव बनाया जाता है तथा अभद्र व्यवहार एवं प्रताड़ना जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

क्या मंडी बोर्ड में योग्य अधिकारियों की कमी है?

अधिकारियों-कर्मचारियों की शिकायत में यह सवाल भी प्रमुखता से उठाया गया है कि मंडी बोर्ड में वरिष्ठ एवं अनुभवी अधिकारियों की उपलब्धता के बावजूद सेवानिवृत्त अधिकारी को ही संविदा आधार पर प्रबंध संचालक के पद पर बनाए रखने की आवश्यकता क्यों पड़ी। शिकायतकर्ताओं ने नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है।

वहीं, ‘क्या संविदा नियुक्ति के पीछे कोई अन्य कारण है या राजनीतिक संरक्षण। जैसे सवाल भी शिकायत के बाद चर्चा में हैं। हालांकि, इन सवालों के संबंध में कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है, इसलिए इनकी पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।

15 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन

मंडी एवं मंडी बोर्ड के अधिकारियों-कर्मचारियों ने शासन से मांग की है कि 15 दिनों के भीतर महेंद्र सिंह सवई की संविदा नियुक्ति पर पुनर्विचार करते हुए उनके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी की पदस्थापना की जाए। आवेदन में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में मांग पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो अधिकारी-कर्मचारी विरोध प्रदर्शन एवं आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

अब पूरे मामले में निगाहें राज्य शासन और मंडी प्रशासन पर टिकी हैं। देखना होगा कि सामूहिक शिकायत के बाद शासन संविदा नियुक्ति, पदोन्नति एवं पदस्थापना से जुड़े आरोपों की जांच कराता है या नहीं और अधिकारियों-कर्मचारियों की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है।

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