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कन्हर नदी में डूबने से 14 वर्षीय किशोर की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल,

रामानुजगंज। नगर में दशहरा मेले के दौरान बैलून बेचकर अपने परिवार की मदद करने आए झारखंड के एक परिवार की खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब कन्हर नदी में डूबने से 14 वर्षीय किशोर इरशाद अंसारी की मौत हो गई। सोमवार दोपहर हुई इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद नदी और एनीकट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नगर में चर्चा है कि यदि संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी और सांकेतिक बोर्ड लगाए गए होते, तो शायद इस तरह की घटना को रोकने में मदद मिल सकती थी। हालांकि, सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति और विभागीय जिम्मेदारी की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, झारखंड के डालटनगंज क्षेत्र अंतर्गत एक परिवार दशहरा मेले में बैलून बेचने के लिए रामानुजगंज आया हुआ था। सोमवार को दोपहर करीब एक बजे बैलून बेचने के बाद इरशाद अंसारी अपने दो चचेरे भाइयों शमशाद अंसारी (10) और सफीक अंसारी (9) के साथ राम मंदिर के पास स्थित कन्हर नदी में नहाने चला गया। इसी दौरान इरशाद नहाते हुए महामाया मंदिर के पास स्थित एनीकट की ओर बढ़ गया और गहरे पानी में चला गया। देखते ही देखते वह पानी में डूब गया।
घटना की जानकारी मिलने पर रामानुजगंज पुलिस मौके पर पहुंची और किशोर की तलाश शुरू कराई। करीब दो से तीन घंटे की तलाश के बाद कालिकापुर के एक युवक ने किशोर को पानी में देखा और बाहर निकाला। लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। दोपहर करीब तीन बजे किशोर का शव बरामद होने के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर मर्ग कायम किया और पोस्टमार्टम के लिए रामानुजगंज के सौ बिस्तर अस्पताल भेज दिया। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
इस दर्दनाक हादसे के बाद कन्हर नदी और एनीकट के आसपास सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि क्या नदी के गहरे हिस्सों और एनीकट के समीप पर्याप्त चेतावनी बोर्ड, खतरे के संकेत तथा सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं मौजूद थीं? यदि ऐसे स्थानों पर आम लोगों को सावधान करने के लिए स्पष्ट संकेतक नहीं लगाए गए थे, तो यह जांच का विषय है।
खासकर दशहरा मेले जैसे अवसरों पर दूसरे क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित नगर पहुंचते हैं। ऐसे में नदी और एनीकट जैसे जोखिमपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना और लोगों को संभावित खतरे से आगाह करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
घटना के बाद जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, हादसे के लिए किसी विभाग की लापरवाही को फिलहाल प्रमाणित नहीं माना जा सकता। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित स्थल पर सुरक्षा संकेतक लगाने, खतरे की जानकारी देने और आवश्यक सुरक्षा उपायों की जिम्मेदारी किस विभाग या एजेंसी की थी तथा वहां निर्धारित व्यवस्था लागू थी या नहीं।
नगर वासियों का कहना है कि एक मासूम की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या नदी और एनीकट के संवेदनशील हिस्सों का सुरक्षा ऑडिट किया जाता है? क्या वहां पर्याप्त चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं? और क्या मेले के दौरान लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष सतर्कता बरती गई थी?
इरशाद अंसारी की मौत उसके परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी घटना की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच करें, जिम्मेदारी तय करें और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएं, ताकि किसी दूसरे परिवार को इस तरह का असहनीय दुख न झेलना पड़े।

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