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दीपावली पर खाद्य प्रतिष्ठानों की सघन जांच: सेहत की फिक्र या सिर्फ कागजी खानापूर्ति।

त्योहारी सीजन में मिलावटखोरों की सक्रियता और खाद्य विभाग की अचानक जागी नींद ने कई सुलगते सवाल छोड़ दिए हैं।

त्योहारों के दौरान गुणवत्ताविहीन मिठाइयों, अमानक खोवा और मिलावटी खाद्य पदार्थों की आशंका के मद्देनजर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा बलरामपुर रामानुजगंज जिलेभर में औचक निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है।मिली जानकारी के अनुसार, जिले के सभी 6 विकासखंडों में होटल, ढाबा, मिठाई की दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।

अब तक कुल 22 प्रतिष्ठानों की औचक जांच की जा चुकी है। इस दौरान बालूशाही, रसगुल्ला, मोतीचूर लड्डू, बेसन लड्डू, जलेबी, खोवा, कलाकंद, चमचम और गुलाबजामुन जैसी लोकप्रिय मिठाइयों के 11 संदिग्ध नमूने (सैंपल्स) जब्त किए गए हैं। इन सभी नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, कालीबाड़ी, रायपुर भेज दिया गया है। विभाग का दावा है कि रिपोर्ट आने के बाद अमानक पाए जाने वाले उत्पादों और संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कार्रवाई का यह प्रशासनिक आंकड़ा भले ही अपनी पीठ थपथपाने के लिए काफी लगे, लेकिन आम जनता के मन में उठ रहे तीखे सवाल इस पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हैं:

क्या शुद्ध मिठाइयां और खाद्य सामग्रियां सिर्फ दीपावली या गिने-चुने त्योहारों के समय ही मिलावट की जद में आती हैं। क्या साल के बाकी महीनों में आम जनता को ज़हर परोसा जाता है और विभाग ‘कुंभकर्णी नींद’ सोता रहता है।

सिर्फ त्योहारों पर ही क्यों आती है सेहत की चिंता? आम नागरिकों के स्वास्थ्य की सुध सिर्फ उत्सव के दिनों में ही क्यों ली जाती है?

कहीं पर्दे के पीछे कोई खेल तो नहीं? क्या इस मौसमी औचक निरीक्षण और कार्रवाई के पीछे फाइलों को बंद करने की महज खानापूर्ति है, या इसके पीछे किसी बड़े ‘रिश्वत के खेल’ की बू आ रही है।

इन सवालों के दो टूक जवाब विभाग को देने होंगे, क्योंकि जनता का स्वास्थ्य किसी औपचारिकता का मोहताज नहीं है।

इस पूरे मामले पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. विजय कुमार सिंह ने नागरिकों से सजग रहने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। केवल साफ-सुथरे और विश्वसनीय प्रतिष्ठानों से ही खरीदारी करें और किसी भी प्रकार की संदिग्ध या मिलावटी सामग्री की सूचना तुरंत विभाग को दें।

साथ ही, खाद्य प्रतिष्ठान संचालकों को सख्त चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि त्योहार के दौरान आमजन को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मानकों की अनदेखी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तय है।

निष्कर्ष: विभाग की यह कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन यह सवाल अपनी जगह कायम है कि क्या यह अभियान सिर्फ एक ‘वार्षिक रस्म अदायगी’ बनकर रह जाएगा, या सालभर चलने वाली एक पारदर्शी और सख्त निगरानी व्यवस्था का रूप लेगा? जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ रोकने के लिए अब सिर्फ बयानों से नहीं, बल्कि ठोस और निरंतर कार्रवाई की दरकार है।

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