बलरामपुर। लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर द्वारा VSK ऐप के माध्यम से शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर वेतन भुगतान की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर शिक्षक संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में शालेय शिक्षक संघ बलरामपुर के जिलाध्यक्ष उपेन्द्र कुमार सिंह ने शासन की इस व्यवस्था पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए शिक्षकों के मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
जिलाध्यक्ष उपेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश के शिक्षक पिछले कुछ समय से लगातार शासन के विभिन्न आदेशों के कारण मानसिक दबाव में कार्य करने को विवश हैं। उनका कहना है कि इससे शिक्षकों का ध्यान अध्यापन से भटक रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि VSK ऐप में अभी भी कई तकनीकी खामियां हैं, इसके बावजूद शासन इसे पूरी तरह विश्वसनीय मानकर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। साथ ही निजी मोबाइल फोन से उपस्थिति दर्ज कराने की अनिवार्यता के कारण शिक्षकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर भी आशंका बनी हुई है।
उपेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षकों से शिक्षण कार्य के अलावा अन्य विभागीय और गैर-शैक्षणिक कार्य भी कराए जाते हैं। कई शिक्षकों की ड्यूटी उनकी मूल संस्था से अलग स्थानों पर लगाई जाती है। ऐसे में वे अपनी मूल संस्था से ऑनलाइन उपस्थिति कैसे दर्ज कर पाएंगे, यह एक व्यावहारिक समस्या है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शालेय शिक्षक संघ ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली का विरोध नहीं कर रहा है, बल्कि निजी मोबाइल के उपयोग को अनिवार्य बनाए जाने का विरोध कर रहा है। संघ का सुझाव है कि शासन सभी शैक्षणिक संस्थाओं में बायोमेट्रिक मशीनें स्थापित करे, जिससे पारदर्शी और प्रभावी ढंग से उपस्थिति की निगरानी की जा सके।
संघ ने यह भी कहा कि यदि VSK ऐप के उपस्थिति डेटा के आधार पर शिक्षकों के वेतन में कटौती की जाती है, तो इसका प्रदेशभर में व्यापक विरोध हो सकता है। शिक्षक संघ ने शासन से मांग की है कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर उनका पूरा समय अध्यापन कार्य के लिए सुनिश्चित किया जाए, जिससे विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो सके।

