Fri. Oct 23rd, 2026

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रामानुजगंज में 10 अक्टूबर को होगा विराट शिव गुरु महोत्सव

रामानुजगंज। भगवान शिव को अपना गुरु बनाने के आध्यात्मिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 10 शनिवार को बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रामानुजगंज स्थित बालक हाईस्कूल ग्राउंड में विराट शिव गुरु महोत्सव का आयोजन किया जाराहा है। शिव शिष्य परिवार के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को भगवान शिव को अपना गुरु बनाने तथा आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया जाएगा।

जानकारी के अनुसार आयोजन सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलेगा। कार्यक्रम का उद्देश्य शिव शिष्य हरेंद्रानंद जी के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना और लोगों को आध्यात्मिक विचारों से जोड़ना है। आयोजन में शिव शिष्या दीदी बरखा आनंद जी एवं शिव शिष्य अर्चित आनंद जी के पधारने की जानकारी दी गई है।
आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चिंतन का अवसर होगा। इसके माध्यम से लोगों को भगवान शिव को गुरु मानकर उनके प्रति आस्था और समर्पण का भाव विकसित करने का संदेश दिया जाएगा।

शिव शिष्य हरेंद्रानंद फाउंडेशन एवं जिला शिव कार्य समिति, बलरामपुर की ओर से श्रद्धालुओं को सपरिवार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है। आयोजकों ने क्षेत्र के धर्मप्रेमियों और शिव भक्तों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर महोत्सव को सफल बनाने की अपील की है।

मंत्री के आदेशों के बाद भी सरपंच के विरुद्ध कार्रवाई नहीं ग्रामीणों में आक्रोश ।

बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले की ग्राम पंचायत राधाकृष्णनगर में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सरपंच और सचिव पर पंचायत की विभिन्न मदों की राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मामले में पहले भी आवेदन देकर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।
प्राप्त शिकायत आवेदन के अनुसार, पंचायत में मूलभूत राशि सहित विभिन्न मदों से किए गए भुगतान और निर्माण कार्यों में कथित गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है। शिकायत में कुल 14 लाख 73 हजार 472 रुपये की राशि को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने, संबंधित अभिलेखों का सत्यापन कराने और जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।

विभिन्न मदों में भुगतान को लेकर उठाए सवाल

शिकायत में मूलभूत मद से फील्ड सफाई एवं झाड़ू सफाई के नाम पर 1 लाख 40 हजार रुपये के भुगतान, सड़क पर पुलिया निर्माण के नाम पर 50 हजार रुपये की निकासी तथा अन्य विकास कार्यों में भुगतान को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ मामलों में भुगतान के अनुरूप कार्य नहीं हुआ अथवा कार्य की मात्रा और भुगतान की गई राशि में अंतर है।

आवेदन में सड़क के मुरमीकरण, छोटे तालाब के जीर्णोद्धार, पंचायत संचालन के लिए स्टेशनरी एवं फोटोकॉपी, तथा बैंक खातों में जमा राशि और ब्याज के हिसाब-किताब को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में अलग-अलग बिंदुओं पर भुगतान, बिल-वाउचर और कार्यों के भौतिक सत्यापन की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कुछ कार्यों में मुरुम की मात्रा और भुगतान की गई राशि के बीच अंतर होने की आशंका है। वहीं, कुछ भुगतानों को लेकर संबंधित बिल, वाउचर और कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति का मिलान कराने की मांग की गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

धारा 40 के तहत कार्रवाई की मांग

शिकायत में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत सरपंच के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए तथा नियमों के तहत वसूली योग्य राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
दस्तावेजों के अनुसार, इस मामले में प्रदेश के मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक रामविचार नेताम सहित जिला प्रशासन और जिला पंचायत के अधिकारियों को भी आवेदन दिए जाने का उल्लेख है। इसके बावजूद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं कि मामले की जांच कहां तक पहुंची और जिम्मेदारी तय करने में देरी क्यों हो रही है।

अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं ने पंचायत में भुगतान और निर्माण कार्यों के सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाले संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भुगतान बिना उचित सत्यापन या कार्यों की वास्तविक स्थिति की पुष्टि के किया गया है, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि संबंधित प्रक्रिया में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की क्या भूमिका रही।
हालांकि, किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि की संलिप्तता अथवा भ्रष्टाचार की पुष्टि अभी नहीं मानी जा सकती। इसके लिए निष्पक्ष जांच, संबंधित पक्षों का जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण आवश्यक है।

ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की

ग्रामीणों एवं शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की समयबद्ध जांच कराई जाए, संबंधित बैंक खातों, भुगतान संबंधी दस्तावेजों, बिल-वाउचर और निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन किया जाए। साथ ही जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कब तक पूरी होती है। फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

लोकतंत्र की हत्या के विरोध में गरजी कांग्रेस, काला दिवस मनाकर केंद्र सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय निर्देशानुसार 8 अक्टूबर को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी रामचन्द्रपुर द्वारा सनावल बस स्टैंड के समीप केंद्र की भाजपा सरकार के कथित तानाशाही रवैये और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमले के विरोध में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित कर “काला दिवस” मनाया गया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
यह विरोध प्रदर्शन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के निर्देश तथा प्रदेश कांग्रेस कमेटी एवं जिला कांग्रेस कमेटी के आदेशानुसार आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं स्थानीय समर्थक धरना स्थल पर पहुंचे और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

लोकतंत्र पर हमला बर्दाश्त नहीं : मोहन सिंह

सनावल बस स्टैंड में आयोजित विरोध सभा को संबोधित करते हुए ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन सिंह ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए लगातार आवाज उठाती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।
मोहन सिंह ने कहा कि जब भी लोकतंत्र और जनता के अधिकारों पर हमला होगा, कांग्रेस सड़क पर उतरकर जनता की आवाज बनेगी। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह आंदोलन किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और जनता के मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष करने का आह्वान किया।

धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। कार्यक्रम में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस एवं विभिन्न मोर्चा-प्रकोष्ठों के कार्यकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

विधानसभा स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता उप मुख्यमंत्री अरुण साव की मौजूदगी में हुआ भव्य समापन, खेल मैदान के विकास के लिए 3 करोड़ रुपये की भी घोषणा

बलरामपुर रामानुजगंज जिले में रामानुजगंज विधानसभा क्षेत्र के आरागाही-ताम्बेश्वरनगर खेल मैदान में फुटबॉल का रोमांच अपने चरम पर नजर आया। स्व. सूर्यप्रकाश नेताम स्मृति एवं दीन-हीन सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित रामानुजगंज विधानसभा स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता 2026 का भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। समारोह में उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं कृषि मंत्री एवं प्रतियोगिता के संरक्षक रामविचार नेताम ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
समापन समारोह में पहुंचे अतिथियों ने मैदान में खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। वहीं हजारों की संख्या में मौजूद दर्शकों ने फाइनल मुकाबले का रोमांच उठाया और खिलाड़ियों का जमकर हौसला बढ़ाया।

120 टीमों ने लिया प्रतियोगिता में हिस्सा

रामानुजगंज विधानसभा क्षेत्र के बलरामपुर और रामचन्द्रपुर विकासखंड में आयोजित इस प्रतियोगिता में कुल 120 टीमों ने हिस्सा लिया। इनमें बलरामपुर विकासखंड से 64 और रामचन्द्रपुर विकासखंड से 56 टीमें शामिल रहीं। बड़ी संख्या में टीमों की भागीदारी ने प्रतियोगिता को क्षेत्र के सबसे बड़े खेल आयोजनों में शामिल कर दिया।
प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला डौरा सुपर किंग और बगरा-महावीरगंज के बीच खेला गया। रोमांचक मुकाबले में डौरा सुपर किंग ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया।

विजेता टीम को 51 हजार रुपये नगद एवं कप, जबकि उपविजेता टीम को 31 हजार रुपये नगद एवं कप प्रदान किया गया। तीसरे स्थान पर रही बलरामपुर किंग्स को 15 हजार रुपये तथा चौथे स्थान पर रही बलरामपुर बवंडर को 11 हजार रुपये नगद और कप प्रदान किया गया।

महिला खिलाड़ियों ने भी दिखाया दमखम

प्रतियोगिता में महिला वर्ग को भी शामिल किया गया, जिसमें चार टीमों ने हिस्सा लिया। महिला वर्ग का फाइनल मुकाबला धनवार मिशन और तेतरडीह के बीच हुआ। विजेता टीम को 25 हजार रुपये, जबकि उपविजेता टीम को 15 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

खेल मैदान के विकास के लिए 3 करोड़ की घोषणा

समापन समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आरागाही-ताम्बेश्वरनगर खेल मैदान के विकास के लिए 3 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। इसके साथ ही नगरीय निकाय क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों के लिए बलरामपुर को 6 करोड़ और रामानुजगंज को 5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में खेल प्रतिभाएं मौजूद हैं। सरकार का प्रयास है कि इन प्रतिभाओं को बेहतर मंच, सुविधाएं और प्रोत्साहन मिले। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर दे रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बलरामपुर और रामानुजगंज में इंडोर स्टेडियम तथा सनावल और डिण्डो में क्रिकेट स्टेडियम की स्वीकृति से जिले की खेल अधोसंरचना को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने खिलाड़ियों से हार-जीत से ऊपर उठकर खेल भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

फुटबॉल इस अंचल की धड़कन—रामविचार नेताम

कृषि मंत्री एवं प्रतियोगिता के संरक्षक रामविचार नेताम ने स्व. सूर्यप्रकाश नेताम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी स्मृति में आयोजित होने वाला यह फुटबॉल आयोजन अब क्षेत्र की खेल परंपरा का हिस्सा बन चुका है।
उन्होंने कहा कि फुटबॉल इस अंचल की धड़कन है। 120 टीमों की भागीदारी और महिला खिलाड़ियों के उत्साह से स्पष्ट है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों के प्रति युवाओं का जुनून लगातार बढ़ रहा है। ऐसे आयोजन युवाओं में अनुशासन, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी

भव्य समापन समारोह में कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर, वनमंडलाधिकारी आलोक कुमार बाजपेयी, वन परिक्षेत्र अधिकारी डॉ. दिलरुबा बानो, जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक, खिलाड़ी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे।
पूरे आयोजन के दौरान आरागाही-ताम्बेश्वरनगर का खेल मैदान फुटबॉल प्रेमियों और दर्शकों से खचाखच भरा रहा। 120 टीमों की भागीदारी, महिला खिलाड़ियों की मौजूदगी और समापन समारोह में हुई विकास घोषणाओं ने इस प्रतियोगिता को क्षेत्र के लिए यादगार बना दिया।

प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में कोर्ट का सख्त फैसला,

सूरजपुर के बहुचर्चित प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की निर्मम हत्या के मामले में न्यायालय ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने मामले में दोषी पाए गए तीन आरोपियों को फांसी की सजा तथा एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने कुलदीप साहू, रिंकू उर्फ फूल सिंह और चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके को हत्या के मामले में दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई, जबकि आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास की सजा दी गई। वहीं सूरज साहू और निलकेश्वर साहू को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।

13 अक्टूबर 2024 की रात हुई थी सनसनीखेज वारदात

मामला 13 अक्टूबर 2024 की रात का है। सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की उनके घर में चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद दोनों के शवों को पीढ़ा गांव के पास फेंके जाने का आरोप था। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पूरे सूरजपुर जिले में हड़कंप मच गया था।
इसी रात पुलिसकर्मी आरक्षक घनश्याम सोनवानी पर खौलता हुआ तेल फेंकने और पुलिसकर्मियों पर कार चढ़ाने की कोशिश की घटना भी सामने आई थी। इस पूरे घटनाक्रम ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

कार चढ़ाने के मामले में भी हो चुकी थी सजा

इसी घटनाक्रम से जुड़े पुलिसकर्मियों पर कार चढ़ाने के प्रयास के मामले में न्यायालय पहले ही मुख्य आरोपी कुलदीप साहू को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुना चुका है। उस मामले में अन्य पांच आरोपियों को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया था।
वहीं डबल मर्डर मामले में दोषियों की सजा पर सुनवाई के लिए 8 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई थी। आज हुई सुनवाई में अदालत ने तीन आरोपियों को फांसी और एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

डबल मर्डर केस में अदालत का सख्त संदेश

प्रधान आरक्षक की पत्नी और मासूम बेटी की हत्या के इस मामले में अदालत के फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोहरे हत्याकांड में तीन आरोपियों को फांसी की सजा और एक को आजीवन कारावास दिए जाने से मामले ने एक बार फिर पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

नर्सों के वेतनमान को लेकर नर्सेस एसोसिएशन मुखर समान वेतनमान नहीं तो आंदोलन की चेतावनी

बलरामपुर-रामानुजगंज। छत्तीसगढ़ में नर्सिंग संवर्ग के वेतनमान को लेकर एक बार फिर आवाज तेज होती नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ प्रदेश नर्सेस एसोसिएशन ने नर्सों की वेतन विसंगति दूर करने और अन्य राज्यों के अनुरूप सम्मानजनक वेतनमान निर्धारित करने की मांग को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित किया है।

एसोसिएशन की ओर से मुख्यमंत्री के नाम बलरामपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर वर्ष 2018 में नर्सिंग संवर्ग के वेतनमान को लेकर गठित समिति की सिफारिशों को लागू करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि वर्ष 2018 में नर्सिंग संवर्ग की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन किया गया था, जिसके बाद शासन स्तर पर समिति का गठन किया गया था, लेकिन समिति की सिफारिशों के बावजूद वेतन विसंगति का अपेक्षित समाधान अब तक नहीं हो पाया है।

शैक्षणिक योग्यता और जिम्मेदारी के अनुरूप वेतन की मांग

एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष रौसेना कुजूर का कहना है कि प्रदेश की नर्सें लंबे समय से वेतनमान में सुधार और विसंगति दूर करने की मांग करती आ रही हैं। संगठन ने अपने ज्ञापन में विभिन्न राज्यों में नर्सिंग संवर्ग को दिए जा रहे वेतनमान का तुलनात्मक उल्लेख करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ में स्टाफ नर्स सहित अन्य नर्सिंग पदों का वेतन उनकी शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण, कार्य की जटिलता, जिम्मेदारी और जोखिम के अनुपात में अपेक्षाकृत कम है।

ICU से लेकर इमरजेंसी तक 24 घंटे सेवा

एसोसिएशन ने विशेष रूप से स्टाफ नर्स, GNM और B.Sc. Nursing के वेतनमान का मुद्दा उठाया है। संगठन का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ अस्पतालों के ICU, OT, NICU, इमरजेंसी सहित विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे मरीजों की सेवा करता है। स्वास्थ्य व्यवस्था में नर्सों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने के बावजूद उनके वेतनमान में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया है।
एसोसिएशन ने ज्ञापन के साथ विभिन्न राज्यों का तुलनात्मक चार्ट भी प्रस्तुत किया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के साथ महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, ओडिशा, राजस्थान, केरल, दिल्ली सहित अन्य राज्यों में नर्सिंग संवर्ग को मिलने वाले वेतनमान का उल्लेख किया गया है।

2018 की मांग आज भी अधूरी होने का दावा

नर्सेस एसोसिएशन का कहना है कि वर्ष 2018 में उठाई गई मांगों के बाद शासन द्वारा गठित समिति की सिफारिशों को अब धरातल पर लागू किया जाना चाहिए। संगठन ने नर्सिंग संवर्ग की वेतन विसंगतियों को दूर कर अन्य राज्यों के समान अथवा समुचित वेतनमान निर्धारित करने की मांग की है।

एसोसिएशन का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर शासन द्वारा जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि नर्सिंग संवर्ग अपने अधिकारों और वेतन विसंगति के मुद्दे को लेकर आंदोलन को और तेज कर सकता है।
अब देखना होगा कि नर्सिंग संवर्ग की लंबे समय से चली आ रही इन मांगों पर राज्य शासन और स्वास्थ्य विभाग क्या निर्णय लेते हैं। फिलहाल नर्सों के वेतनमान का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

प्रसव पीड़ा से परेशान महिला को कंधे का सहारा अव्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश

स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की जमीनी हकीकत सामने आई है। सिकीदाग पंचायत के बुटकुइया गांव में प्रसव पीड़ा से परेशान एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। दो मुहायन नदी पर पुल नहीं होने के कारण रास्ता बाधित था। मजबूरन परिजनों और ग्रामीणों ने महिला को खाट पर लिटाकर कंधे के सहारे करीब एक किलोमीटर से अधिक दूरी तक पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया।
जानकारी के अनुसार बुटकुइया गांव निवासी हरिनाथ गंझू की 28 वर्षीय पत्नी रीता देवी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने एंबुलेंस की मदद लेने का प्रयास किया, लेकिन दो मुहायन नदी पर पुल नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। महिला की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने तत्काल उसे खाट पर लिटाया और कंधे के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाया।
इसके बाद वाहन की मदद से गर्भवती महिला को कुंदा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

बरसात में बढ़ जाती है ग्रामीणों की परेशानी

वार्ड सदस्य अशोक यादव तथा ग्रामीण बृजेश यादव और रामू गंझू ने बताया कि दो मुहायन नदी पर पुल नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में बुटकुइया सहित आसपास के कई गांवों के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद आवागमन की समस्या और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि इसका सबसे अधिक असर मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ता है। आपात स्थिति में जब समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी होता है, तब एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाएं भी गांव तक नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में ग्रामीणों को मरीजों को खाट या अन्य साधनों के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

पुल निर्माण की मांग तेज

घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों ने दो मुहायन नदी पर जल्द से जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से बुटकुइया सहित आसपास के गांवों का मुख्य सड़क से संपर्क बेहतर होगा और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा।

DMFT से पुल निर्माण की उम्मीद

इस संबंध में कुंदा बीडीओ साकेत कुमार सिन्हा ने बताया कि दो मुहायन नदी पर फिलहाल पुल नहीं है और पुल निर्माण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस मामले में उपायुक्त का भी ध्यान आकृष्ट कराया गया है। उन्होंने बताया कि नदी बड़ी होने के कारण यहां बड़े पुल की आवश्यकता होगी। इसके बावजूद DMFT के माध्यम से पुल निर्माण की स्वीकृति दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
ग्रामीणों की मांग अब यही है कि पुल निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू हो, ताकि भविष्य में किसी मरीज या गर्भवती महिला को इलाज के लिए इस तरह खाट पर उठाकर नदी पार करने या लंबी दूरी पैदल तय करने की मजबूरी न हो।

वसीम अंसारी हत्याकांड का खुलासा, पति-पत्नी गिरफ्तार

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के पस्ता थाना क्षेत्र अंतर्गत डौरा पुलिस ने वसीम अंसारी हत्याकांड का खुलासा करते हुए एक पति-पत्नी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपितों ने कथित तौर पर कुल्हाड़ी से हमला कर वसीम अंसारी की हत्या की और पहचान छिपाने के उद्देश्य से शव को अलग-अलग स्थानों पर ठिकाने लगाने का प्रयास किया। घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई और ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
पुलिस के अनुसार, घटना की सूचना मिलने के बाद जांच के दौरान ग्रामीणों से जानकारी मिली कि ग्राम भीतर चिल्मा उबका जंगल में नाले के समीप एक गड्ढे में एक व्यक्ति का कटा हुआ सिर पड़ा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव के हिस्से को बरामद कर वसीम अंसारी के परिजनों को बुलाया गया। मृतक के भाई ने उसकी पहचान वसीम अंसारी के रूप में की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान ग्राम कोटडीह निवासी सोनू खैरवार और उसकी पत्नी मनबासो की कथित भूमिका सामने आई।
आरोप है कि मनबासो और वसीम के बीच पूर्व से संबंध होने की जानकारी सामने आई थी। घटना वाली शाम करीब 7 बजे मनबासो ने मोबाइल फोन के जरिए वसीम को मिलने के लिए बुलाया था। पुलिस के अनुसार, वसीम के मौके पर पहुंचने के बाद मनबासो और सोनू ने कथित तौर पर कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी हत्या कर दी।
पुलिस का आरोप है कि हत्या के बाद आरोपितों ने अपराध छिपाने और मृतक की पहचान मिटाने के उद्देश्य से शव को अलग-अलग स्थानों पर ठिकाने लगाने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई और पूछताछ के बाद मामले की कड़ियां जुड़ती गईं और दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विवेचना कर रही है। हत्या के पीछे की वास्तविक वजह, घटनास्थल और शव को ठिकाने लगाने से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच की जा रही है। इस सनसनीखेज वारदात के बाद इलाके में भय और दहशत का माहौल बना हुआ है।

सब्जी की बाड़ी में गांजे की खेती, 112 पौधों के साथ किसान गिरफ्तार

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और अवैध खेती के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के बीच बरियों पुलिस ने गांजे की खेती के एक और मामले का खुलासा किया है। पुलिस ने ग्राम खुखरी के रखैतपारा में एक घर की बाड़ी में गांजे के पौधे लगाए जाने की सूचना पर कार्रवाई करते हुए 51 वर्षीय एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी के कब्जे से 112 नग गांजे के पौधे बरामद किए गए हैं, जिनका कुल वजन करीब 36 किलो 300 ग्राम बताया गया है। जब्त गांजे की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 3 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है।
जानकारी के मुताबिक, जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा नार्को को-ऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) के तहत राजस्व, वन एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम के माध्यम से जिले में अवैध मादक पदार्थों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में शनिवार, 3 अक्टूबर को फसल गिरदावरी के दौरान ग्राम खुखरी के हल्का पटवारी को कथित रूप से जानकारी मिली कि रखैतपारा निवासी कबीर साय टेकाम ने अपनी सब्जी की बाड़ी के बीच गांजे के पौधे लगा रखे हैं।
सूचना चौकी बरियों पुलिस को दी गई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्वदीपक त्रिपाठी एवं एसडीओपी कुसमी के दिशा-निर्देशन में बरियों पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान बाड़ी से गांजे के पौधे बरामद किए गए।
पुलिस ने बरामद पौधों को जब्त कर आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की और उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।

अवैध खेती को लेकर बढ़ी चिंता

जिले में गांजे की खेती के लगातार सामने आ रहे मामलों ने नशीले पदार्थों की अवैध गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में घर की बाड़ी अथवा कृषि भूमि में मादक पदार्थों की खेती किए जाने के मामले सामने आने से निगरानी और कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है।

शादीशुदा महिला से मिलने गया युवक क्या पुराना लव स्टोरी ग्रामीणों पर पेड़ से बांध कर मारपीट के आरोप ।

गिरिडीह। जिले के गावां थाना क्षेत्र के झाराढाब गांव में एक युवक को शादीशुदा महिला से मिलने पहुंचना कथित तौर पर भारी पड़ गया। आरोप है कि ग्रामीणों ने युवक और महिला को पकड़कर पेड़ से बांध दिया और युवक के साथ मारपीट की। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, बिहार के नवादा जिले के बिशनपुर गांव का रहने वाला एक युवक झाराढाब गांव में रहने वाली एक शादीशुदा महिला से मिलने पहुंचा था। इसी दौरान ग्रामीणों की नजर कथित तौर पर दोनों पर पड़ गई। इसके बाद ग्रामीणों ने दोनों को पकड़ लिया।

पेड़ से बांधकर मारपीट का आरोप

आरोप है कि ग्रामीणों ने युवक और महिला दोनों को पेड़ से बांध दिया। इसी दौरान युवक के साथ मारपीट किए जाने की बात भी सामने आई है। वायरल वीडियो में ग्रामीणों की भीड़ के बीच युवक को पेड़ से बंधा हुआ दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो और सामने आई जानकारी के आधार पर घटना की पूरी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि ग्रामीणों ने दोनों को किस परिस्थिति में पकड़ा और मारपीट की घटना वास्तव में किस तरह हुई। इन सभी बिंदुओं की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस ने दोनों को कराया मुक्त

घटना की सूचना मिलते ही गावां थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों के कब्जे से युवक और महिला को मुक्त कराया और दोनों को थाने ले गई। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि युवक महिला से मिलने किन परिस्थितियों में झाराढाब पहुंचा था, ग्रामीणों ने दोनों को किस आधार पर पकड़ा और युवक के साथ कथित मारपीट क्यों की गई। वायरल वीडियो सहित घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच की जा रही है।

 

जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर

 

फिलहाल इस मामले में पुलिस की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक और महिला के बीच क्या संबंध थे, दोनों की मुलाकात किन परिस्थितियों में हुई और ग्रामीणों द्वारा दोनों को पेड़ से बांधने तथा युवक के साथ कथित मारपीट किए जाने की वास्तविक वजह क्या थी।

पुलिस जांच के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की स्थि

ति स्पष्ट होगी।