बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रामानुजगंज नगर के वार्ड क्रमांक-1 में जमीन से जुड़ा एक पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। कथित फर्जी वारिसों, संदिग्ध नामांतरण और जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर उठे सवालों ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। स्थानीय निवासी प्रकाश मालाकार सहित अन्य लोगों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
जानकारी के अनुसार मामला रामानुजगंज स्थित खसरा क्रमांक 4/11, रकबा 1.0920 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा हुआ है, जो राजस्व अभिलेखों में गहनी पिता टुक्की के नाम दर्ज बताई जा रही है। आरोप है कि कुछ लोग स्वयं को गहनी का बेटा और नाती बताकर उक्त भूमि का फर्जी तरीके से नामांतरण कराने का प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में प्रकाश मालाकार, दिनेश गुप्ता, कृष्णा गुप्ता, दीपक गुप्ता, संतलाल गुप्ता और अन्य आवेदकों ने तहसीलदार रामानुजगंज को आवेदन सौंपकर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी 14 अक्टूबर 2022 को इसी भूमि की कथित रूप से फर्जी रजिस्ट्री कराई गई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि गहनी पिता टुक्की की लगभग 20 वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है, इसके बावजूद कुछ लोग फर्जी दस्तावेज तैयार कर खुद को उनका वारिस बताकर जमीन की खरीद-बिक्री कर रहे हैं। इस मामले को लेकर पहले भी तहसीलदार न्यायालय रामानुजगंज में नामांतरण संबंधी प्रकरण दर्ज हो चुका है। पूर्व में राजस्व आदेश-पत्र के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार द्वारा ग्राम पंचायत कड़िया के सचिव को आधार कार्ड सत्यापन के निर्देश दिए गए थे तथा संबंधित पक्षों को न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश जारी किया गया था। जांच के दौरान मामला तब और उलझ गया जब ग्रामसभा में प्रस्तुत एक प्रस्ताव में दावा किया गया कि गहनी उर्फ मंगरू नामक व्यक्ति अभी जीवित है और उसका संबंध ग्राम कड़िया से है।
ग्रामसभा में प्रस्तुत कथित वंशवृक्ष में यह भी उल्लेख किया गया कि गहनी उर्फ मंगरू के नाम से पूर्व में भूमि का विक्रय किया गया था। बाद में उस भूमि पर मकान निर्माण कर शेष भूमि को अलग-अलग लोगों को बेचे जाने की बात सामने आई। इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्व रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और जमीन के दस्तावेजों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रकाश मालाकार के अनुसार, इस मामले में कथित फर्जी भूस्वामी गहनी उर्फ मंगरू के खिलाफ पूर्व में कार्रवाई करते हुए उसे जेल भी भेजा गया था। इसके बावजूद अब दोबारा नए दावों और कथित वारिसों के सामने आने से विवाद और गहरा गया है।
प्रकाश मालाकार ने आरोप लगाया कि कुछ लोग फर्जी वारिस बनकर उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, राजस्व रिकॉर्ड और दस्तावेजों की सत्यता की बारीकी से पड़ताल की जाए तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में और भी कई निर्दोष लोग जमीन विवादों में फंस सकते हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाता है और क्या कथित फर्जी वारिसों एवं जमीन कारोबार से जुड़े लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई हो पाती है या नहीं।
पुनह सामने आए फर्जी वारिस, क्या भू-माफियाओं की गहरी साजिश?

