बलरामपुर जिले के शिक्षा विभाग में रिश्वतखोरी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को एक चर्चित मामले में बड़ी सफलता मिली है, जहां विशेष न्यायालय ने विकासखंड शिक्षा कार्यालय वाड्रफनगर में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 गौतम सिंह आयम को रिश्वत लेने का दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के कठोर कारावास एवं 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व माध्यमिक शाला ढढ़िया में भृत्य पद पर कार्यरत नितेश रंजन पटेल का वर्ष 2013 से 2017 तक का लगभग 92 हजार रुपये एरियर्स भुगतान लंबित था। लंबे समय तक भुगतान नहीं मिलने पर उन्होंने विकासखंड शिक्षा कार्यालय वाड्रफनगर में संपर्क किया। आरोप है कि वहां पदस्थ सहायक ग्रेड-02 गौतम सिंह आयम ने सेवा पुस्तिका सत्यापन एवं बिल प्रक्रिया पूरी कराने के एवज में पहले 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। बाद में बातचीत के दौरान आरोपी 12 हजार रुपये लेने पर सहमत हुआ।
प्रार्थी ने मामले की शिकायत एसीबी अम्बिकापुर कार्यालय में दर्ज कराई। शिकायत के सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर एसीबी ने 13 अगस्त 2024 को ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। कार्रवाई के दौरान आरोपी गौतम सिंह आयम को 12 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच पूरी होने के बाद एसीबी ने 8 अक्टूबर 2024 को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, बलरामपुर में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा पर्याप्त साक्ष्य एवं गवाह पेश किए गए, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना।
विशेष न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को 3 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इस फैसले को एसीबी की बड़ी सफलता माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, अतिथि शिक्षकों द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी पर भी 20 हजार रुपये रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों की जांच एवं कार्रवाई में कितनी तत्परता दिखाता है।
शिक्षा विभाग में रिश्वत का खेल उजागर, एसीबी को बड़ी सफलता।

