बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में संभावित अल-नीनो की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने जिले के किसानों को मौसम आधारित कृषि प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में मानसून में देरी, सामान्य से कम वर्षा एवं सूखे जैसी परिस्थितियों की संभावना को देखते हुए किसानों को वैज्ञानिक खेती एवं समय पर उचित निर्णय लेने की आवश्यकता है, ताकि फसलों को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।
कृषि उपसंचालक रामचंद्र भगत ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को धान की फसल पर अत्यधिक निर्भरता कम करते हुए कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से दलहन, तिलहन, मक्का एवं अन्य फसलें अपनाकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की अपील की है।
उन्होंने बताया कि शासन द्वारा संचालित कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का अथवा अन्य वैकल्पिक फसल लेने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। इससे किसानों को आर्थिक लाभ मिलने के साथ ही कम वर्षा की स्थिति में खेती के जोखिम को भी कम किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा किसानों को मौसम पूर्वानुमान के आधार पर फसल की योजना बनाने, उन्नत कृषि तकनीकों का उपयोग करने तथा जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। इसके साथ ही सीमित जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
विभाग ने कहा कि फसल विविधीकरण से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, उत्पादन लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। कृषि संबंधी किसी भी समस्या या तकनीकी मार्गदर्शन के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि कार्यालय अथवा कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
कृषि विभाग ने विश्वास जताया है कि समय पर उचित कृषि प्रबंधन, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और फसल विविधीकरण को अपनाकर किसान संभावित कम वर्षा की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे।
दलहन-तिलहन फसल लेने पर किसानों को मिलेगा 15 हजार रुपये।

