Fri. Jul 3rd, 2026

आरटीआई में लापरवाही पड़ी भारी, पंचायत सचिव पर ₹25 हजार का जुर्माना।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग ने ग्राम पंचायत करजी के पंचायत सचिव एवं तत्कालीन जन सूचना अधिकारी (पीआईओ) जयप्रताप सिंह पर ₹25,000 का अधिकतम अर्थदंड लगाया है। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन ने पारित आदेश में जिला पंचायत कोरिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।
मामला अपील प्रकरण क्रमांक A/5209/2023 से जुड़ा है। पटना परसापारा निवासी प्रिंसु पाण्डेय ने 9 अक्टूबर 2022 को आरटीआई आवेदन प्रस्तुत कर वर्ष 2020 से 2022 के दौरान 15वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायत करजी को प्राप्त राशि तथा उससे कराए गए विकास कार्यों का विस्तृत विवरण मांगा था। आवेदन में स्वीकृत कार्यों की सूची, बजट, तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति, भुगतान अभिलेख, मस्टररोल, लेजर रजिस्टर, उपयोगिता प्रमाण-पत्र सहित अन्य दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भी मांगी गई थीं।
निर्धारित 30 दिनों की अवधि में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद प्रथम अपील में भी आवेदक के पक्ष में आदेश होने के बावजूद संबंधित अधिकारी ने सूचना देने में लापरवाही बरती। मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचने पर कई अवसर दिए गए, लेकिन आयोग के अनुसार न तो संतोषजनक जवाब प्रस्तुत किया गया और न ही अंतिम सुनवाई तक पूरी सूचना उपलब्ध कराई गई।
आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत ₹25,000 का अर्थदंड लगाने के साथ निर्देश दिया कि यह राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से वसूलकर शासन के खाते में जमा कराई जाए। साथ ही धारा 20(2) के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू करने तथा जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर के सीईओ को 30 दिनों के भीतर आवेदक को समस्त सूचना निःशुल्क उपलब्ध कराकर अनुपालन प्रतिवेदन आयोग में प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।
सूचना आयोग के इस फैसले को पारदर्शिता, जवाबदेही और आरटीआई अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

Related Post