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मानदेय लंबित, फिर सर्वे ड्यूटी से शिक्षकों में आक्रोश

रामचंद्रपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जनपद पंचायत रामचंद्रपुर में शिक्षकों की सर्वे ड्यूटी को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। शिक्षकों का आरोप है कि मई 2023 में कराए गए आर्थिक-सामाजिक सर्वे का मानदेय आज तक उन्हें नहीं मिला है, इसके बावजूद अब जनपद पंचायत स्तर से दोबारा ‘सुघर छत्तीसगढ़’ सर्वे के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। इससे शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

बताया जा रहा है कि मई 2023 में जनपद पंचायत रामचंद्रपुर क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में आर्थिक-सामाजिक सर्वे का ऑफलाइन एवं ऑनलाइन कार्य कराया गया था। इस दौरान शिक्षकों को प्रगणक की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि ग्राम सहायकों को सुपरवाइजर बनाया गया था। शिक्षकों के अनुसार प्रगणक के लिए लगभग 5 हजार रुपये तथा सुपरवाइजर के लिए लगभग 16 हजार रुपये मानदेय निर्धारित किया गया था।

शिक्षकों का आरोप है कि भीषण गर्मी के बीच उन्हें घर-घर जाकर सर्वे का कार्य करना पड़ा। निर्धारित समय में कार्य पूरा कराने के लिए उन पर दबाव भी बनाया गया। लेकिन सर्वे पूरा होने के बाद मानदेय भुगतान में कथित तौर पर भेदभाव की स्थिति सामने आई। शिक्षकों का कहना है कि सुपरवाइजरों को मानदेय का भुगतान कर दिया गया, जबकि प्रगणक के रूप में कार्य करने वाले शिक्षकों को आज तक उनका मानदेय नहीं मिला।

 

पुराना भुगतान लंबित, फिर नई जिम्मेदारी

 

शिक्षकों का कहना है कि जब वर्ष 2023 में किए गए सर्वे कार्य का मानदेय ही लंबित है, तो दोबारा सर्वे कार्य के लिए शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपना कई सवाल खड़े करता है। शिक्षकों का कहना है कि वे अपने मूल दायित्व यानी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए नियुक्त हैं। लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने से विद्यालयों में अध्यापन कार्य भी प्रभावित होने की आशंका रहती है।

 

RTE Act की धारा 27 में क्या है प्रावधान?

 

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने पर प्रतिबंध का प्रावधान है। हालांकि इसमें तीन अपवाद निर्धारित हैं—दशकीय जनगणना, आपदा राहत कार्य तथा स्थानीय निकाय, विधानसभा या संसद के चुनाव से संबंधित कार्य।

सुप्रीम कोर्ट ने Election Commission of India बनाम St. Mary’s School मामले में भी चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों और बच्चों की शिक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया था। न्यायालय के निर्देशों के अनुसार चुनाव संबंधी कार्यों में भी शिक्षकों की नियमित शिक्षण व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

 

वहीं, न्यायिक फैसलों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि धारा 27 में दिए गए अपवादों के बाहर सामान्य गैर-शैक्षणिक सर्वे या सत्यापन जैसे कार्यों में शिक्षकों की तैनाती कानूनी सवाल खड़े कर सकती है।

 

अब प्रशासन से जवाब की मांग

 

ऐसे में शिक्षकों की मांग है कि पहले वर्ष 2023 में कराए गए आर्थिक-सामाजिक सर्वे के लंबित मानदेय का भुगतान कराया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि ‘सुघर छत्तीसगढ़’ सर्वे किस विभागीय आदेश और किस नियम के तहत शिक्षकों से कराया जा रहा है तथा इस कार्य के लिए निर्धारित मानदेय का क्या प्रावधान है।

शिक्षकों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि गैर-शैक्षणिक कार्य में ड्यूटी लगाने से पहले RTE Act की धारा 27 तथा शासन के संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

अब सवाल यह है कि 2023 में किए गए सर्वे का मानदेय शिक्षकों को कब मिलेगा? ‘सुघर छत्तीसगढ़’ सर्वे के लिए शिक्षकों की ड्यूटी किस प्रावधान के तहत लगाई गई है? और क्या इस नई जिम्मेदारी के लिए शिक्षकों को मानदेय दिया जाएगा?

इन सवालों पर जनपद पंचायत एवं जिला प्रशासन की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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