बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के अंतर्गत प्राथमिक शाला संकुल लावा के गेरुआ पोखर में एक अनोखा मामला सामने आया है जिसमें विद्यालय के प्रधान पाठक पर छात्रों से उनकी पाठ्यपुस्तकों में सील लगवाने का आरोप लगाया गया।हालांकि इस पूरे मामले में स्वयं छात्र-छात्राओं एवं शाला में कार्यरत कर्मचारियों ने इन आरोपों का खंडन करते हुए प्राचार्य को निर्दोष बताया है। घटना के संबंध में जब छात्र-छात्राओं से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि विद्यालय में मध्यान्ह भोजन के उपरांत खेलकूद का समय था। उसी दौरान प्राचार्य किसी व्यक्ति से वार्तालाप करने बाहर गए हुए थे। इसी बीच अपने स्वेच्छा से अपनी-अपनी पुस्तकों में सील लगाना प्रारंभ कर दिया। छात्रों ने स्पष्ट किया कि प्राचार्य ने इस कार्य के लिए किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया था, बल्कि हमने अपनी मर्जी से यह कार्य किया।

वहीं विद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों से जानकारी लेने पर उन्होंने भी प्रधान पाठक के आचरण की सराहना करते हुए बताया कि सर बच्चों के साथ सदैव घरेलू व्यवहार करते हैं।
उनका स्वभाव सरल एवं सहयोगी है, जिससे छात्र भयमुक्त होकर विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करते हैं और सामान्य गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। कर्मचारियों का यह भी कहना था कि छात्रों द्वारा पुस्तकों में सील लगाना पूरी तरह स्वेच्छिक प्रक्रिया थी और इसमें प्रधान पाठक की कोई भूमिका नहीं रही है। उन्होंने कहा कि सर हमेशा छात्रों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देते हैं और उनके हित में कार्य करते हैं। इस प्रकार पूरे मामले की जांच के उपरांत यह स्पष्ट होता है कि लगाए गए आरोप निराधार एवं तथ्यहीन हैं। छात्रों और कर्मचारियों के बयानों से यह सिद्ध होता है कि प्रधान पाठक पर लगाए गए आरोप किसी गलतफहमी या उद्देश्यपूर्ण अफवाह का हिस्सा हो सकते हैं। विद्यालय में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने हेतु ऐसी झूठी बातों से बचने की आवश्यकता है।

