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बलरामपुर में गरीब उम्मीदवार का टिकट रद्द: क्या गरीबों को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं?

बलरामपुर,मिली जानकारी के अनुसार बलरामपुर के वार्ड क्रमांक 15 सीट पर एक विवादास्पद घटना ने लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस पार्टी और स्थानीय समाज के अमीर नेताओं के दबाव में गरीब पृष्ठभूमि की उम्मीदवार संतोषी सिंह का टिकट अचानक रद्द कर दिया गया। यह फैसला न केवल संतोषी के सपनों पर पानी फेरने वाला है,

बल्कि यह सवाल भी पैदा करता है कि क्या गरीबों को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है क्या वो सिर्फ झंडा थामने, कुर्सी उठाने तक सीमित है”

वार्ड क्रमांक 15 से उम्मीदवार कांग्रेस ने प्रारंभ में समाज के वंचित तबके से आने वाली संतोषी सिंह के नाम पर मुहर लगाई थी, संतोषी सिंह जो स्थानीय समुदाय में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए संघर्ष करने वाली एक सक्रिय कार्यकर्ता रही हैं, को पार्टी ने “जमीनी नेता” बताकर प्रचारित भी किया। लेकिन, चुनावी तारीखों के नजदीक आते ही अचानक पार्टी ने उनका नाम वापस ले लिया। सूत्रों के अनुसार, यह फैसला पार्टी के वरिष्ठ नेता और समाज के प्रभावशाली अमीर व्यक्तियों जनप्रतिनिधियों के दबाव में लिया गया, जो चाहते थे कि उनके समर्थक जीते।

गरीब उम्मीदवारों के साथ अन्याय?

यह मामला राजनीति में धन और ताकत के प्रभुत्व की पुरानी समस्या को उजागर करता है। संतोषी जैसे गरीब उम्मीदवारों को अक्सर पार्टियाँ (दिखावटी प्रतिनिधित्व) के लिए इस्तेमाल करती हैं, पर जब वास्तविक निर्णय की बात आती है, तो अमीर और प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। स्थानीय निवासियों को कहना हैं कि यह साफ़ दिखता है कि गरीबों को सिर्फ भीड़ जुटाने या झंडा लहराने के लिए चुना जाता है। असली मौका उन्हें कभी नहीं दिया जाता।”

संतोषी सिंह ने इस फैसले को “लोकतंत्र के साथ धोखा” बताया है। उनके समर्थकों का कहना है कि वे अब निर्दलीय चुनाव लड़ाने पर विचार कर रही हैं, लेकिन बिना पार्टी मशीनरी और फंडिंग के यह लड़ाई और भी मुश्किल होगी। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ा है, जहाँ युवाओं ने गरीब संतोषी का समर्थन कियाहै।

 

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