Fri. Oct 23rd, 2026

NEWS DESK

विकासखण्ड कुसमी में विभिन्न विकास कार्याे का लिया जायजा।

बलरामपुर जिला,कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री राजेंद्र कटारा एवं पुलिस अधीक्षक श्री बैंकर वैभव रमनलाल जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत सुदूर अंचल पहुंचे। जहां विकासखण्ड कुसमी में विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्राम चरहु से महुआटोली तक बनने वाले पुलिया, सड़क मार्ग का अवलोकन भी किया। साथ ही उन्होंने ग्राम चुनचुना से बन्दरचुआं तक बन रहे सड़क की गुणवत्ता की जांच कर आवश्यक निर्देश देते हुए गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण करने को कहा।

स्कूलों का निरीक्षण कर परखी शिक्षा की गुणवत्ता

कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने मतदान केंद्रों के निरीक्षण के दौरान शाला संचालन का अवलोकन भी किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों की उपस्थिति एवं बच्चों की संख्यात्मक जानकारी ली। कलेक्टर ने बच्चों से उनके विषय संबंधित प्रश्न पूछ शिक्षा की गुणवत्ता को परखा।

विधानसभा सत्र के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त

बलरामपुर,छत्तीसगढ़ के षष्ठम् विधानसभा का पंचम सत्र 24 फरवरी से 21 मार्च 2025 तक आहूत किया गया है। सत्र के दौरान प्राप्त होने वाले तारांकित/अतारांकित विधानसभा प्रश्नों, स्थगन, शून्यकाल, आश्वासनों, ध्यानाकर्षण, अशासकीय संकल्प, याचिका आदि की जानकारी निर्धारित समयावधि में शासन को प्रेषित किये जाने हेतु कलेक्टर श्री राजेन्द्र कटारा द्वारा

अपर कलेक्टर श्री आर.एस. लाल (मो.न.77248-69974) को नोडल अधिकारी तथा प्रभारी अधीक्षक जिला कार्यालय श्री संजय कुमार मरई (मो.न. 79746-61996) को विधानसभा सेल प्रभारी नियुक्त किया गया है।

 

11 फरवरी को हुए नगरीय निकाय निर्वाचन के लिए मतगणना।

ईवीएम स्ट्रांग रूम में सील फरवरी को होगी मतगणना।
बलरामपुर‌। जिले के 02 नगर पालिका परिषद् एवं 03 नगर पंचायतों में 11 फरवरी 2025 को शांतिपूर्ण चुनाव सम्पन्न हुआ। मतदान के पश्चात सभी मतदानकर्मी नगरीय निकाय क्षेत्र अंतर्गत बनाए गए स्ट्रांग रूम में ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को सुरक्षित जमा किये। तत्पश्चात रिटर्निंग अधिकारियों एवं प्रत्याशियों व राजनैतिक दलों की उपस्थिति में सभी नगरीय निकायों के स्ट्रांग रूम को सील किया गया। 11 फरवरी 2025 को हुए नगरीय निकाय निर्वाचन के लिए मतगणना 15 फरवरी 2025 को होगी।

जिले के नगरीय निकाय चुनाव  में 79.85 प्रतिशत मतदान

नगरीय निकाय चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से हुआ सम्पन्न

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में नगरीय निकाय चुनाव 2025 में नगर पालिक परिषद बलरामपुर एवं नगर पालिका रामानुजगंज तथा नगर पंचायत  वाड्रफनगर, राजपुर व कुसमी में शांतिपूर्ण ढंग से मतदान सम्पन्न हुआ। जिले के पांचों नगरीय निकाय चुनाव में कुल 79.85 प्रतिशत् मतदान हुआ जिसमें नगर पालिका परिषद् बलरामपुर में 80.16 प्रतिशत, नगर पालिका परिषद रामानुजगंज में 78.82 व नगर पंचायत वाड्रफनगर में 81.47, राजपुर में 83.95 व कुसमी में 77.72 प्रतिशत् मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।  नगरीय निकाय निर्वाचन में नये युवा मतदाताओं में अपने प्रतिनिधि चुनने तथा लोकतंत्र के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करने हेतु गजब का उत्साह देखा गया। मतदान केन्द्रों में दिव्यांग, वयोवृद्ध एवं महिला मतदाताओं द्वारा भी उत्साहपूर्वक अपने मताधिकार का प्रयोग किया गया, साथ ही मतदाताओं ने सेल्फी वोटर जोन में फोटो भी खिंचवाई। सभी मतदान केन्द्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ सेक्टर अधिकारी एवं अन्य कर्मचारी तैनात थे तथा उन्होंने लगातार अपने क्षेत्रों में घूमकर शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराया।

निर्दलीय प्रत्याशी को मिल रहे समर्थन क्या मतदान में तब्दील हो पाएगा?

रामानुजगंज नगर निकाय चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी को मिल रहे समर्थन क्या मतदान में तब्दील हो पाएगा?

रामानुजगंज नगर निकाय चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी राहुल जीत सिंह को मिल रहे समर्थन ने चुनावी माहौल को रोचक बना दिया है। फिर भी सवाल यह है कि क्या यह समर्थन चुनावी परिणामों में तब्दील हो पाएगा।

रामानुजगंज नगर निकाय चुनाव में सत्ताधारी पार्टी और अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों के मुकाबले निर्दलीय उम्मीदवार की स्थिति काफी अलग होती है। राजनीतिक दलों के पास संसाधन, संगठनात्मक ढांचा और चुनावी प्रचार-प्रसार की ताकत होती है, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी को इन सबकी कमी होती है। बावजूद इसके, राहुल जीत सिंह ने अपनी सहजता, पारदर्शिता और जनता से सीधे संवाद के माध्यम से लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

राहुल जीत सिंह को जो समर्थन मिल रहा है, वह मुख्यतः उन लोगों से आ रहा है जो पारंपरिक पार्टी राजनीति से निराश हैं। इन लोगों के लिए राहुल एक नया विकल्प प्रतीत हो रहे हैं, जिनकी छवि एक ईमानदार और निष्कलंक नेता की बन रही है। इन समर्थकों का कहना है कि राहुल को जनता का सच्चा प्रतिनिधि मानते हुए उन्होंने अपना समर्थन दिया है। साथ ही, वे यह भी मानते हैं कि राहुल जीत सिंह का नगर के विकास को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण और उनकी कार्यशैली उनकी लोकप्रियता में इजाफा कर रही है।

इसके बावजूद, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह समर्थन वोटों में बदल पाएगा। अक्सर चुनावी माहौल में देखा जाता है कि लोग उम्मीदवारों के प्रति अपनी सहमति तो व्यक्त करते हैं, लेकिन मतदान के दिन कई अन्य कारणों से उनका रुख बदल जाता है। राजनीतिक दलों के दबाव, उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार की ताकत और पुराने राजनीतिक समीकरणों के कारण कई बार निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी जीत हासिल नहीं कर पाते।

रामानुजगंज जैसे छोटे शहर में वोटरों की मानसिकता भी अहम भूमिका निभाती है। यहाँ के लोग पारंपरिक राजनीतिक दलों के प्रति अपनी निष्ठा रखते हैं, और उनकी सोच में बदलाव लाना सरल नहीं होता। हालांकि, राहुल जीत सिंह की छवि एक युवा, ऊर्जावान और नई सोच वाले नेता के रूप में बन रही है, जो बदलाव की बात करता है, लेकिन यह जानना जरूरी होगा कि क्या यह नया जोश मतदान के दिन वोट में तब्दील हो पाएगा।

जुलूस में भारी जन समर्थन, गुटबाजी छोड़ विरोधी भी हुए शामिल।

भाजपा प्रत्याशी रमन अग्रवाल द्वारा निकाले गए जुलूस में भारी जन समर्थन, गुटबाजी छोड़ विरोधी भी हुए शामिल।रामानुजगंज नगर निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रमन अग्रवाल ने जब अपनी चुनावी गतिविधियों को तेज किया, तो उनका जुलूस स्थानीय जनसमर्थन का केन्द्र बन गया। इस जुलूस में भाजपा के साथ साथ अन्य समर्थक भी शामिल हुए, जो उनकी बढ़ती लोकप्रियता को देख कर प्रभावित हुए। यह घटना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि इसे क्षेत्रीय राजनीति में एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।रमन अग्रवाल की चुनावी यात्रा के दौरान, उनका जुलूस पूरे शहर में फैल गया और सड़कों पर भारी संख्या में लोग एकजुट हो गए। उनके समर्थकों की संख्या देखकर यह साफ हो गया कि भाजपा के लिए चुनावी मैदान में जीत की संभावनाएं मजबूत हैं। हालांकि, जुलूस के दौरान एक दिलचस्प स्थिति सामने आई जब कई विरोधी भी भाजपा प्रत्याशी रमन अग्रवाल के समर्थन में थे।

राजनीतिक दृष्टिकोण से यह घटना बड़ी अहमियत रखती है। ऐसे समय में जब क्षेत्रीय राजनीति में गुटबाजी और आपसी मतभेद आम बात हो, रमन अग्रवाल की अगुवाई में यह जुलूस एकता और सामूहिक शक्ति का प्रतीक बन गया। सभी भाजपा यों को इस जुलूस में शामिल होना यह संकेत देता है कि वे भी रमन अग्रवाल की नीतियों और उनकी नेतृत्व क्षमता से प्रभावित हैं। इसके अलावा, यह रमन अग्रवाल के पक्ष में एक सशक्त संदेश भी देता है कि उनहों ने स्थानीय मुद्दों को समझते हुए जनहित के लिए कइ ठोस कदम उठाए हैं।

इस जुलूस में असंतुष्ट नेता रमन अग्रवाल के समर्थन में खुलकर सामने आए, जिन्होंने अपनी पार्टी की गुटबाजी और अंतर्कलह को छोड़ दिया। यह संकेत है कि रामानुजगंज में भाजपा की स्थिति अब सिर्फ एक पार्टी के तौर पर नहीं, बल्कि एक व्यापक जन समर्थन के रूप में मजबूत हो रही है।

इस जुलूस ने स्थानीय राजनीति में नए समीकरण स्थापित किए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस समर्थन का कितना असर चुनावी परिणामों पर पड़ेगा। रमन अग्रवाल के समर्थकों और स्थानीय जनता के बीच बढ़ती नजदीकी भाजपा प्रत्याशी रमन अग्रवाल के लिए नगरीय निकाय चुनावों में एक सकारात्मक संकेत है। इस जुलूस के बाद, उनकी जीत की संभावना और भी अधिक मजबूत नजर आ रही है।

इसके अलावा, यह भी माना जा रहा है कि भाजपा की बढ़ती ताकत और विरोधी लोगो का उनके समर्थन में आना आगामी दिनों में कई और राजनीतिक घटनाओं को जन्म दे सकता है। रामानुजगंज नगर निकाय चुनाव में अब तक की स्थिति भाजपा के पक्ष में नजर आ रही है, लेकिन अंतिम परिणामों का निर्धारण आगामी जनसंपर्क और रणनीतियों पर निर्भर

करेगा।

 

भाजपा में गुटबाजी, कांग्रेस में नाराजगी, क्या निर्दलीय मारेगा बाजी?

रामानुजगंज नगर निकाय चुनाव: भाजपा में गुटबाजी, कांग्रेस में नाराजगी, क्या निर्दलीय मारेगा बाजी?

रामानुजगंज नगर निकाय चुनाव के साथ ही राजनीतिक माहौल में हलचल तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों में गुटबाजी और नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे निर्दलीय प्रत्याशी के उभरने की संभावना प्रबल हो रही है। भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी के बीच खींचतान के बीच नगरवासी आशंकित हैं कि कहीं निर्दलीय उम्मीदवार राहुल जीत सिंह बाजी न मार लें।

भा.ज.पा. के प्रत्याशी रमन अग्रवाल के चुनावी मैदान में उतरने के बाद से ही भाजपा में गुटबाजी की स्थिति बनी हुई है। कुछ नेता रमन अग्रवाल को अपना समर्थन दे रहे हैं, वहीं कुछ अन्य नेताओं का कहना है कि उन्हें मौका नहीं दिया गया और वे असंतुष्ट हैं। पार्टी के भीतर की यह गुटबाजी चुनावी रणनीति पर असर डाल सकती है, क्योंकि एकजुट पार्टी की जगह कई गुटों का होना चुनावी परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है।

वहीं कांग्रेस में भी स्थिति ठीक नहीं है। कांग्रेस पार्टी की ओर से प्रत्याशी के रूप में मधु गुप्ता को नामित किया गया है, लेकिन उनके चयन को लेकर पार्टी में अंदर ही अंदर नाराजगी फैल रही है। कुछ कार्यकर्ता और नेता इसे अनुचित मानते हैं और उनका कहना है कि उनकी स्थिति को नजरअंदाज कर दिया गया है। इस नाराजगी का असर पार्टी के चुनावी अभियान पर पड़ सकता है और यदि यह असंतोष बढ़ता है तो कांग्रेस के लिए जीत मुश्किल हो सकती है।

राजनीतिक दलों के बीच गुटबाजी और नाराजगी के चलते अब नगरवासी यह सोचने लगे हैं कि क्या किसी निर्दलीय प्रत्याशी को इस चुनाव में जीतने का मौका मिलेगा।

निर्दलीय उम्मीदवार राहुल जीत सिंह का नाम तेजी से चर्चा में आ रहा है। उन्होंने चुनाव प्रचार में सक्रियता दिखाते हुए लोगों से सीधा संपर्क किया है और अपनी जनहित की योजनाओं को सामने रखा है। उनका सरल और निष्पक्ष छवि नगरवासियों को आकर्षित कर रही है।

निर्दलीय प्रत्याशी राहुल जीत सिंह का कहना है कि वे न किसी पार्टी के दबाव में हैं, न ही गुटबाजी का हिस्सा। उनका उद्देश्य केवल नगरवासियों की सेवा करना है। उनका यह दृष्टिकोण उन लोगों के लिए आकर्षक बन गया है जो पार्टी राजनीति से ऊब चुके हैं और बदलाव की चाहत रखते हैं।अंततः, रामानुजगंज नगर निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही उम्मीदवारों के बीच गुटबाजी और नाराजगी का माहौल बना हुआ है। इसके चलते निर्दलीय उम्मीदवार राहुल जीत सिंह की स्थिति मजबूत होती जा रही है। यदि यह स्थिति बनी रही, तो निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी मुकाबला जीतने में सफल हो सकते हैं। चुनाव परिणाम तो केवल समय ही बताएगा, लेकिन अब यह साफ है कि रामानुजगंज नगर निकाय चुनाव में एक नया मोड़आ सकता है।

 

क्या भाजपा के जमीन पर चुनावी फसल काटना चाहते है कांग्रेसी ?

क्या भाजपा के जमीन पर चुनावी फसल काटना चाहते है कांग्रेसी ?

रामानुजगंज नगर परिषद चुनाव में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो चुका है। यहां कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों के प्रत्याशियों पर नगर वासी तीखे आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी पर परिवारवाद और व्यापारी होने जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि भाजपा प्रत्याशी पर भ्रष्टाचार और तानाशाही जैसे गंभीर आरोप हैं। इस राजनीतिक संघर्ष में दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता और नेता अपनी-अपनी प्रत्याशियों का पक्ष लेने में जुटे हुए हैं, और यह मामला हर दिन नए मोड़ पर पहुंचता जा रहा है।
भाजपा समर्थकों का कहना है कि उनके कार्यकर्ता हमेशा जनता के बीच रहते हैं और हर समाज की जरूरतों को समझते हुए काम करते हैं। और कांग्रेसी सिर्फ चुनावी फसल काटना चाहते हैं। भाजपा का दावा है कि उनकी पार्टी को जनता का विश्वास प्राप्त है, क्योंकि पार्टी के जनप्रतिनिधि जनता से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए हमेशा सक्रिय रहते हैं। भाजपा समर्थकों के मुताबिक, उनके नेताओं की यह कड़ी मेहनत और जमीन पर काम करने की शैली ही उन्हें चुनावी जीत दिलवाती है।
इसके विपरीत, कांग्रेस पार्टी के खिलाफ आरोप यह हैं कि उनके जनप्रतिनिधि चुनाव के समय ही जनता के बीच आते हैं और बाकी समय में उनका कहीं कोई पता नहीं चलता। कांग्रेस के नेताओं पर यह भी आरोप है कि वे पार्टी में अपने परिवार के लोगों को ही प्रमुख पदों पर बैठाते हैं और बाक़ी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करते हैं। इस कारण पार्टी के भीतर ही असंतोष की स्थिति बनती है और उनके जनप्रतिनिधियों की सक्रियता भी सवालों के घेरे में रहती है।
कांग्रेस पार्टी के संदर्भ में यह भी कहा जा रहा है कि जब चुनाव का समय आता है, तब ही पार्टी के नेता जनता को याद करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद उनकी सक्रियता में कमी आ जाती है। साथ ही यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि कांग्रेस में पार्टी के कई उम्मीदवारों को इस आधार पर चुना जाता है कि वे पार्टी के करीबी और परिवार से संबंधित होते हैं, न कि उनकी कार्यक्षमता के आधार पर।
इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प बनता जा रहा है, और यह तय करना मुश्किल है कि इस बार रामानुजगंज नगर निकाय चुनाव में जीत किसकी होगी।

रामानुजगंज नगर में कुत्तों का आतंक: जिम्मेदार कौन?

रामानुजगंज नगर में कुत्तों का आतंक: जिम्मेदार कौन?

रामानुजगंज नगर में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक चरम पर है। शहर के विभिन्न इलाकों में आवारा कुत्तों का फैलाव बढ़ता जा रहा है, जिससे नागरिकों में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। आज भारत माता चौक पर एक कुत्ते के झुंड ने एक सूअर पर हमला कर दिया, जिससे यह समस्या और भी गंभीर हो गई है। इस घटना से यह सवाल उठता है कि आखिर इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है?

कुत्तों के हमलों का सिलसिला सिर्फ पशुओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों पर भी बढ़ता जा रहा है। कई बार बच्चों पर कुत्तों ने अचानक हमला कर दिया है, जिससे न सिर्फ शारीरिक चोटें आईं, बल्कि मानसिक आघात भी हो चुके है। इससे स्थानीय लोग इस समस्या से परेशान हैं
कई बार ये कुत्ते बेमहसूस तरीके से समूह में भी इकट्ठे होते हैं, जिससे उनकी आक्रामकता बढ़ जाती है।
वहीं नगर पालिका या स्थानीय प्रशासन का इस पर कोई ठोस कदम न उठाना भी इस समस्या को बढ़ावा दे रहा है।

 

।

अवैध रेत भण्डारण पर एसडीएम ने की कार्यवाही

बलरामपुर जिले में रेत के अवैध उत्खनन व परिवहन पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर श्री राजेन्द्र कटारा के निर्देश पर राजस्व एवं खनिज विभाग के द्वारा कार्यवाही की जा रही है तथा मैदानी अमला भी सक्रियता व गंभीरता के साथ अवैध गतिविधियों के विरुद्ध कार्यवाही में जुटा हुआ है। इसी कड़ी में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व राजपुर श्री राजीव जेम्स कुजूर ने अवैध रेत भंडारण की सूचना के बाद ग्राम सिंगचौरा में छापेमारी की कार्यवाही करते हुए एक जेसीबी, हाईवा व अवैध रूप से भण्डारित 10200 घन फीट रेत जप्त कर अवैध रेत भण्डारण का प्रकरण दर्ज किया है।
गौरतलब है कि ग्रामीणों के द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री राजीव जेम्स कुजूर को रेत के अवैध भण्डारण की सूचना मिली थी और सूचना प्राप्त होने के बाद वे मौके पर पहुंचे तथा ग्रामीणों से अवैध रेत के सम्बंध में जानकारी ली। इस दौरान श्री पंकज गुप्ता के द्वारा अवैध रेत उत्खनन कर गांव सिंगचौरा में रेत का अवैध भण्डारण किया गया था, जिस पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने रेत, जेसीबी व हाईवा को जब्त कर आवश्यक कार्यवाही की गई है।