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बलरामपुर डीईओ पर कार्रवाई कब,विभागीय जांच के बावजूद पदस्थापना पर उठे सवाल ।

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। उनके खिलाफ विभागीय जांच लंबित होने के बावजूद पदोन्नति एवं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब यह मामला राज्यपाल सचिवालय तक पहुंच चुका है, जिसके बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, राज्यपाल सचिवालय लोक भवन रायपुर द्वारा पत्र क्रमांक 1/342624/2026/1898/शि.प्र. रायपुर दिनांक 17 मार्च 2026 को सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग नवा रायपुर को एक महत्वपूर्ण पत्र प्रेषित किया गया है। यह पत्र राष्ट्रीय मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट भारत के प्रदेश संगठन सचिव जोन तिर्की की शिकायत के आधार पर भेजा गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि श्री मनीराम यादव के विरुद्ध विभागीय जांच संस्थित होने के बावजूद उन्हें पदोन्नति तथा प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी का दायित्व सौंपा गया, जो शासन के नियमों और प्रशासनिक नैतिकता के विपरीत है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि श्री यादव के विरुद्ध भ्रष्टाचार, फर्जी बिल भुगतान तथा वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। आरोप है कि विभागीय स्तर पर कई मामलों में संदिग्ध भुगतान किए गए, जिनकी जांच की मांग समय-समय पर उठती रही है। बावजूद इसके, उन पर अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
प्रदेश संगठन सचिव श्री जोन तिर्की ने राज्यपाल सचिवालय को भेजे गए ज्ञापन में मांग की है कि श्री यादव के खिलाफ लंबित जांच प्रतिवेदन एवं पालन प्रतिवेदन सार्वजनिक किया जाए तथा दोष सिद्ध होने की स्थिति में तत्काल विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में प्रभावशाली अधिकारियों के संरक्षण के कारण जांच प्रक्रिया धीमी कर दी जाती है, जिससे भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्त अधिकारियों को राहत मिलती रहती है।
इधर, राज्यपाल सचिवालय से पत्र जारी होने के बाद शिक्षा विभाग में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब निगाहें स्कूल शिक्षा सचिव पर टिकी हुई हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि जांच रिपोर्ट में आरोप प्रमाणित पाए जाते हैं, तो श्री यादव के खिलाफ निलंबन से लेकर पदावनति अथवा अन्य कठोर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
बलरामपुर जिले के शिक्षकों और कर्मचारी संगठनों के बीच भी इस मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। कई शिक्षकों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हों और उसके खिलाफ जांच जारी हो, तो उसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी देना गलत संदेश देता है। इससे विभाग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग इसे राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का परिणाम भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग में लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राज्यपाल सचिवालय के हस्तक्षेप के बाद शिक्षा विभाग कोई ठोस कार्रवाई करेगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। प्रदेशभर के शिक्षा विभाग के कर्मचारी और आमजन इस मामले पर शिक्षा सचिव के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
फिलहाल, श्री मनीराम यादव के खिलाफ कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन राज्यपाल सचिवालय से जारी पत्र ने इस पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

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