Fri. Oct 23rd, 2026

NEWS DESK

श्रेया माही ने जीता मिस फर्स्ट रनर-अप का खिताब, रामानुजगंज का बढ़ाया गौरव।

रामानुजगंज। 23 अगस्त 2026 को अंबिकापुर में आयोजित सावन सुंदरी महोत्सव 2026 में पूरे सरगुजा संभाग से प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी प्रतिभाओं एवं प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति, परंपरा और विविधता को प्रस्तुत किया।
इस गरिमामयी आयोजन में बलरामपुर जिले के रामानुजगंज वार्ड क्रमांक 4 निवासी श्री ओम प्रकाश ठाकुर जी की सुपुत्री श्रेया माही ने भी अपनी शानदार प्रस्तुति देकर पूरे संभाग के प्रतिभागियों के बीच अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। श्रेया माही ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए Miss Chhattisgarh 2026 – 1st Runner Up का खिताब अपने नाम किया।

श्रेया माही की इस उपलब्धि से रामानुजगंज नगर सहित पूरे बलरामपुर जिले के लोगों में हर्ष एवं गर्व का माहौल है। एक छोटे से शहर से निकलकर श्रेया ने संभाग स्तर के मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए अपने नगर और जिले का नाम रोशन किया है।

श्रेया की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने, प्रोत्साहित करने और अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने के लिए उचित मंच उपलब्ध कराने की है। ऐसी प्रतिभावान छात्राओं एवं युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए समाज और स्थानीय संस्थाओं को मिलकर निरंतर प्रयास करना चाहिए, ताकि उनकी प्रतिभा को नई उड़ान मिल सके।

श्रेया माही की इस उपलब्धि पर नगरवासियों, शुभचिंतकों एवं जिलेवासियों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

मानदेय लंबित, फिर सर्वे ड्यूटी से शिक्षकों में आक्रोश

रामचंद्रपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जनपद पंचायत रामचंद्रपुर में शिक्षकों की सर्वे ड्यूटी को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। शिक्षकों का आरोप है कि मई 2023 में कराए गए आर्थिक-सामाजिक सर्वे का मानदेय आज तक उन्हें नहीं मिला है, इसके बावजूद अब जनपद पंचायत स्तर से दोबारा ‘सुघर छत्तीसगढ़’ सर्वे के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। इससे शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

बताया जा रहा है कि मई 2023 में जनपद पंचायत रामचंद्रपुर क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में आर्थिक-सामाजिक सर्वे का ऑफलाइन एवं ऑनलाइन कार्य कराया गया था। इस दौरान शिक्षकों को प्रगणक की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि ग्राम सहायकों को सुपरवाइजर बनाया गया था। शिक्षकों के अनुसार प्रगणक के लिए लगभग 5 हजार रुपये तथा सुपरवाइजर के लिए लगभग 16 हजार रुपये मानदेय निर्धारित किया गया था।

शिक्षकों का आरोप है कि भीषण गर्मी के बीच उन्हें घर-घर जाकर सर्वे का कार्य करना पड़ा। निर्धारित समय में कार्य पूरा कराने के लिए उन पर दबाव भी बनाया गया। लेकिन सर्वे पूरा होने के बाद मानदेय भुगतान में कथित तौर पर भेदभाव की स्थिति सामने आई। शिक्षकों का कहना है कि सुपरवाइजरों को मानदेय का भुगतान कर दिया गया, जबकि प्रगणक के रूप में कार्य करने वाले शिक्षकों को आज तक उनका मानदेय नहीं मिला।

 

पुराना भुगतान लंबित, फिर नई जिम्मेदारी

 

शिक्षकों का कहना है कि जब वर्ष 2023 में किए गए सर्वे कार्य का मानदेय ही लंबित है, तो दोबारा सर्वे कार्य के लिए शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपना कई सवाल खड़े करता है। शिक्षकों का कहना है कि वे अपने मूल दायित्व यानी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए नियुक्त हैं। लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने से विद्यालयों में अध्यापन कार्य भी प्रभावित होने की आशंका रहती है।

 

RTE Act की धारा 27 में क्या है प्रावधान?

 

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने पर प्रतिबंध का प्रावधान है। हालांकि इसमें तीन अपवाद निर्धारित हैं—दशकीय जनगणना, आपदा राहत कार्य तथा स्थानीय निकाय, विधानसभा या संसद के चुनाव से संबंधित कार्य।

सुप्रीम कोर्ट ने Election Commission of India बनाम St. Mary’s School मामले में भी चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों और बच्चों की शिक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया था। न्यायालय के निर्देशों के अनुसार चुनाव संबंधी कार्यों में भी शिक्षकों की नियमित शिक्षण व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

 

वहीं, न्यायिक फैसलों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि धारा 27 में दिए गए अपवादों के बाहर सामान्य गैर-शैक्षणिक सर्वे या सत्यापन जैसे कार्यों में शिक्षकों की तैनाती कानूनी सवाल खड़े कर सकती है।

 

अब प्रशासन से जवाब की मांग

 

ऐसे में शिक्षकों की मांग है कि पहले वर्ष 2023 में कराए गए आर्थिक-सामाजिक सर्वे के लंबित मानदेय का भुगतान कराया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि ‘सुघर छत्तीसगढ़’ सर्वे किस विभागीय आदेश और किस नियम के तहत शिक्षकों से कराया जा रहा है तथा इस कार्य के लिए निर्धारित मानदेय का क्या प्रावधान है।

शिक्षकों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि गैर-शैक्षणिक कार्य में ड्यूटी लगाने से पहले RTE Act की धारा 27 तथा शासन के संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

अब सवाल यह है कि 2023 में किए गए सर्वे का मानदेय शिक्षकों को कब मिलेगा? ‘सुघर छत्तीसगढ़’ सर्वे के लिए शिक्षकों की ड्यूटी किस प्रावधान के तहत लगाई गई है? और क्या इस नई जिम्मेदारी के लिए शिक्षकों को मानदेय दिया जाएगा?

इन सवालों पर जनपद पंचायत एवं जिला प्रशासन की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

नीलकंठपुर उभका बांध में दरार से दहशत, 20–25 घरों पर खतरे की आशंका

रामचंद्रपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जनपद पंचायत रामचंद्रपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत नीलकंठपुर स्थित उभका बांध में दरार आने की सूचना से बांध के तटवर्ती एवं निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि बांध की स्थिति और बिगड़ती है तो अचानक पानी का बहाव निचले क्षेत्रों में पहुंच सकता है, जिससे जन-धन के नुकसान का गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार बांध के आसपास करीब 20 से 25 घर प्रभावित होने की आशंका है। लगातार बारिश के बीच बांध में आई दरार को लेकर ग्रामीणों में भय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि समय रहते यदि आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

मामले को लेकर कांग्रेस कमेटी के मंडल अध्यक्ष राजेंद्र श्रीवास के साथ कृष्णा यादव, अवधेश यादव, मनोज यादव, नागेंद्र यादव, महेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों ने कहना है कि आपदा प्रबंधन की SDRF/NDRF टीमों तथा सिंचाई विभाग की तकनीकी टीम को तत्काल मौके पर भेजकर बांध का निरीक्षण कराया जाए।
ग्रामीणों ने बांध की स्थिति को देखते हुए आपातकालीन स्तर पर मरम्मत एवं सुरक्षा कार्य शुरू कराने, संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ाने तथा निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि बांध की मौजूदा स्थिति का तत्काल तकनीकी परीक्षण कराकर संभावित खतरे का आकलन किया जाना बेहद जरूरी है। साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन, सिंचाई विभाग और आपदा प्रबंधन टीमों के बीच समन्वय स्थापित किया जाए।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की त्वरित कार्रवाई पर टिकी है। यदि समय रहते बांध की दरार की मरम्मत और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो बारिश के बीच स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।

नीलकंठपुर उभका बांध में दरार से दहशत, 20–25 घरों पर खतरे की आशंका

रामचंद्रपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जनपद पंचायत रामचंद्रपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत नीलकंठपुर स्थित उभका बांध में दरार आने की सूचना से बांध के तटवर्ती एवं निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि बांध की स्थिति और बिगड़ती है तो अचानक पानी का बहाव निचले क्षेत्रों में पहुंच सकता है, जिससे जन-धन के नुकसान का गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

ग्रामीणों के अनुसार बांध के आसपास करीब 20 से 25 घर प्रभावित होने की आशंका है। लगातार बारिश के बीच बांध में आई दरार को लेकर ग्रामीणों में भय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि समय रहते यदि आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

मामले को लेकर कांग्रेस कमेटी के मंडल अध्यक्ष राजेंद्र श्रीवास के साथ कृष्णा यादव, अवधेश यादव, मनोज यादव, नागेंद्र यादव, महेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों ने कहना है कि आपदा प्रबंधन की SDRF/NDRF टीमों तथा सिंचाई विभाग की तकनीकी टीम को तत्काल मौके पर भेजकर बांध का निरीक्षण कराया जाए।

ग्रामीणों ने बांध की स्थिति को देखते हुए आपातकालीन स्तर पर मरम्मत एवं सुरक्षा कार्य शुरू कराने, संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ाने तथा निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि बांध की मौजूदा स्थिति का तत्काल तकनीकी परीक्षण कराकर संभावित खतरे का आकलन किया जाना बेहद जरूरी है। साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन, सिंचाई विभाग और आपदा प्रबंधन टीमों के बीच समन्वय स्थापित किया जाए।

अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की त्वरित कार्रवाई पर टिकी है। यदि समय रहते बांध की दरार की मरम्मत और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो बारिश के बीच स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।

भारी बारिश से छोटी पुलिया जलमग्न, ग्रामीणों और छात्रों का मुख्य सड़क से टूटा संपर्क

रामचंद्रपुर। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनपद पंचायत रामचंद्रपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत लुर्गी के खुटहनपारा जाने वाले मार्ग पर स्थित छोटी पुलिया जलमग्न एवं बाधित हो गई है। पुलिया पर पानी भर जाने तथा मार्ग की स्थिति खराब होने से ग्रामीणों और स्कूली छात्रों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो रही है। मुख्य सड़क से बस्ती और स्कूल का संपर्क प्रभावित होने से ग्रामीणों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों के अनुसार बारिश के दौरान पुलिया के ऊपर पानी का बहाव बढ़ जाने से इस मार्ग से गुजरना जोखिम भरा हो जाता है। इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, किसी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के साथ-साथ रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के लिए मुख्य सड़क तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया की समस्या लंबे समय से बनी हुई है और प्रत्येक बारिश में स्थिति और गंभीर हो जाती है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। इससे ग्रामीणों में प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल मौके का निरीक्षण कर पुलिया की मरम्मत कराने, सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए स्थायी समाधान की मांग की है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और ग्रामीणों एवं छात्रों के लिए आवागमन कब तक बहाल हो पाता है।

 

भारी बारिश से छोटा पुलिया बाधित, ग्रामीणों और छात्रों का मुख्य सड़क से संपर्क टूटा

रामचंद्रपुर। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनपद पंचायत रामचंद्रपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कनकपुर के खुटहनपारा जाने वाले मार्ग पर स्थित छोटी पुलिया बाधित हो गई है। पुलिया के क्षतिग्रस्त एवं जलमग्न होने से ग्रामीणों और स्कूली छात्रों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। मुख्य सड़क से बस्ती एवं स्कूल का संपर्क टूटने से ग्रामीणों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार बारिश के दौरान पुलिया पर पानी का तेज बहाव होने के कारण इस मार्ग से गुजरना जोखिम भरा हो गया है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। उन्हें स्कूल आने-जाने के लिए पानी और खराब रास्ते के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। वहीं, आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाने तथा रोजमर्रा की आवश्यकताओं के लिए मुख्य सड़क तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया की समस्या नई नहीं है, लेकिन बारिश के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों पर समस्या की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द पुलिया की मरम्मत एवं आवागमन बहाल कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि बारिश के बीच ग्रामीणों एवं छात्रों की इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक आवागमन बहाल कराया जाता है।

रक्षा बंधन पर्व के पूर्व जिले में सात दिवसीय खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन अभियान।

बलरामपुर,रामानुजगंज नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार एवं कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में जिले के आम नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं मानक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 17 से 23 अगस्त तक सात दिवसीय बने खाबों बने रहिबो 2.0 सघन खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन अभियान संचालित किया जा रहा है। आगामी रक्षा बंधन पर्व को दृष्टिगत रखते हुए अभियान के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट, मिथ्याछाप, भ्रामक जानकारी, असुरक्षित खाद्य पदार्थों तथा प्रतिबंधित एनालॉग डेयरी उत्पादों के निर्माण, वितरण एवं विक्रय पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिले में खाद्य प्रतिष्ठानों की सघन जांच की जा रही है।
अभिहित अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बताया कि रक्षा बंधन पर्व के पूर्व जिले में संचालित मिठाई दुकानों, डेयरी एवं किराना दुकानों का निरीक्षण किया जा रहा है। जांच के दौरान गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर खाद्य पदार्थों के नमूने संकलित कर परीक्षण के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात अमानक पाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के संबंध में नियमानुसार प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

गुणवत्तापूर्ण एवं मानक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य सात दिवसीय चलेगा खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन अभियान।

बलरामपुर,रामानुजगंज नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार एवं कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में जिले के आम नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं मानक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 17 से 23 अगस्त तक सात दिवसीय बने खाबों बने रहिबो 2.0 सघन खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन अभियान संचालित किया जा रहा है। आगामी रक्षा बंधन पर्व को दृष्टिगत रखते हुए अभियान के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट, मिथ्याछाप, भ्रामक जानकारी, असुरक्षित खाद्य पदार्थों तथा प्रतिबंधित एनालॉग डेयरी उत्पादों के निर्माण, वितरण एवं विक्रय पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिले में खाद्य प्रतिष्ठानों की सघन जांच की जा रही है।
अभिहित अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बताया कि रक्षा बंधन पर्व के पूर्व जिले में संचालित मिठाई दुकानों, डेयरी एवं किराना दुकानों का निरीक्षण किया जा रहा है। जांच के दौरान गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर खाद्य पदार्थों के नमूने संकलित कर परीक्षण के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात अमानक पाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के संबंध में नियमानुसार प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

रामानुजगंज डिजिटल कृषि क्रांति की ओर बढ़ते कदम, एग्रीस्टैक पंजीयन के लिए डोर-टू-डोर विशेष अभियान।

बलरामपुर रामानुजगंज। किसानों को डिजिटल कृषि व्यवस्था से जोड़ने तथा शासकीय योजनाओं का लाभ अधिक सुगमता और पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बलरामपुर कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देशानुसार। रामानुजगंज विकासखंड में एग्रीस्टैक पंजीयन को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत प्रशासन एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम गांव-गांव पहुंचकर किसानों का डोर-टू-डोर पंजीयन कराने के साथ उन्हें एग्रीस्टैक के महत्व की जानकारी दे रही है।

संयुक्त टीम के समन्वय से गांव-गांव पहुंच रहा अभियान

अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम), तहसीलदार एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी रामानुजगंज के मार्गदर्शन में कृषि एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा जमीनी स्तर पर अभियान को गति दी जा रही है। अभियान में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO), पटवारी, ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक एवं किसान मित्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
टीम द्वारा किसानों को एग्रीस्टैक पंजीयन के लिए जागरूक करने के साथ पात्र किसानों का पंजीयन कराया जा रहा है, ताकि कोई भी किसान शासन की विभिन्न योजनाओं एवं कृषि संबंधी सुविधाओं से वंचित न रहे। भूमि स्वामियों को भी एग्रीस्टैक पंजीयन के महत्व की जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से भी किसानों का पंजीयन कराया जा रहा है।

भंवरमाल समिति में किसानों को दी गई आधुनिक कृषि की जानकारी

हाल ही में भंवरमाल समिति में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किसानों का कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से एग्रीस्टैक पंजीयन कराया गया। इस दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी रामानुजगंज द्वारा किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के लाभ, नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के वैज्ञानिक उपयोग सहित आधुनिक कृषि तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने किसानों को डिजिटल कृषि व्यवस्था से जुड़ने के साथ ही उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान किसानों में आधुनिक तकनीक के प्रति जागरूकता और उत्साह देखने को मिला।

डिजिटल कृषि सेवाओं से सशक्त होंगे अन्नदाता

प्रशासन का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक पात्र किसान का एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन कराकर उन्हें शासन की विभिन्न डिजिटल कृषि सेवाओं से जोड़ना है। इससे किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी एवं लाभ प्राप्त करने में सुविधा होगी। साथ ही फसल, भूमि एवं कृषि संबंधी आवश्यक जानकारी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासन का मानना है कि एग्रीस्टैक पंजीयन से किसानों तक शासकीय योजनाओं एवं कृषि सेवाओं की पहुंच अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी होगी। डिजिटल कृषि व्यवस्था के विस्तार से किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के साथ क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

खबर का असर: महावीरगंज में केमिकल प्लांट के पानी की वैज्ञानिक जांच शुरू।

रामानुजगंज। ग्राम महावीरगंज में स्थित ग्रेफाइट केमिकल प्लांट से निकलने वाले कथित रासायनिकयुक्त पानी के नदी में प्रवाहित होने को लेकर ग्रामीणों की चिंता और जेके जी न्यूज़ द्वारा प्रमुखता से खबर प्रकाशित किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देश पर संबंधित विभाग की जल विशेषज्ञ टीम ने महावीरगंज पहुंचकर प्लांट एवं आसपास के क्षेत्र से पानी के नमूने एकत्र किए हैं। इन नमूनों की वैज्ञानिक जांच जिला जल प्रयोगशाला में की जा रही है।
दरअसल, विकासखंड रामचन्द्रपुर के ग्राम महावीरगंज स्थित केमिकल प्लांट से निकलने वाले पानी को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए पानी की गुणवत्ता की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी। युवा कांग्रेस नेता इंतखाब अंसारी एवं जिला कांग्रेस कमेटी के व्यास मुनि यादव सहित ग्रामीणों ने इस मामले को उठाते हुए नदी में प्रवाहित हो रहे पानी से संभावित नुकसान की आशंका जताई थी।


ग्रामीणों का आरोप था कि प्लांट से निकलने वाला पानी नदी में प्रवाहित हो रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों और मवेशियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों ने चर्मरोग सहित अन्य समस्याओं की भी आशंका जताई थी। हालांकि, पानी वास्तव में प्रदूषित है या नहीं तथा उसमें किसी प्रकार के हानिकारक रासायनिक तत्व मौजूद हैं या नहीं, इसकी पुष्टि वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, खंड बलरामपुर के कार्यपालन अभियंता को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद विभागीय अमले के साथ जल विशेषज्ञ टीम ने महावीरगंज पहुंचकर प्लांट और आसपास के क्षेत्रों से पानी के नमूने लिए।
अब ग्रामीणों के साथ प्रशासन और क्षेत्रवासियों की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। वैज्ञानिक परीक्षण से यह स्पष्ट होगा कि नदी में प्रवाहित हो रहा पानी निर्धारित मानकों के अनुरूप है अथवा उसमें किसी प्रकार के रासायनिक तत्व या प्रदूषण की मौजूदगी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।