Fri. Oct 23rd, 2026

2026

विभिन्न तिथियों पर होगा लर्निंग लाईसेंस शिविर का आयोजन।

बलरामपुर सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत् परिवहन एवं पुलिस विभाग के द्वारा लर्निंग लायसेंस शिविर आयोजित किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत 7 जनवरी को सबाग में एक दिवसीय शिविर, तहसील कार्यालय कुसमी, शंकरगढ़, राजपुर में 8 एवं 9 जनवरी को दो दिवसीय, तहसील कार्यालय रामानुजगंज में 11 एवं 12 जनवरी, पुराना बस स्टैंड बलरामपुर में 7 एवं 8 जनवरी, तहसील कार्यालय वाड्रफनगर में 11 एवं 12 जनवरी को शिविर आयोजित किया जाएगा। जो भी लाइसेंस बनवाना चाहते हैं आधार कार्ड, पेन कार्ड, दसवीं का मार्कशीट लेकर उपस्थित होंगे। लाइसेंस के लिए (शासकीय शुल्क एवं परिवहन सुविधा केन्द्र शुल्क) एक केटैगरी लाइसेंस 400 रूपये, दो केटैगरी लाइसेंस 500 रूपये, शुल्क निर्धारित है। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथियों में शिविर का लाभ उठाकर वैध लर्निंग लाइसेंस प्राप्त करें एवं सड़क सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करें।

धान खरीदी केंद्र में अनियमितता से किसानों में आक्रोश।

बलरामपुर जिले के भंवरमाल धान खरीदी केंद्र में अनियमितताओं को लेकर किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। भंवरमाल किसान एवं निगरानी समिति के सदस्यों ने अनुविभागी अधिकारी रामानुजन द्वारा कलेक्टर बलरामपुर को ज्ञापन सौंपकर धान खरीदी समिति प्रबंधक एवं धान खरीदी प्रभारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। किसानों ने आरोप लगाया है कि दोनों अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि धान खरीदी केंद्र भंवरमाल में प्रत्येक सुतरी बोरी में निर्धारित मात्रा से अधिक, लगभग 41.200 से 41.300 किलोग्राम धान तौला जा रहा है। इससे किसानों को प्रति बोरी 500 से 600 ग्राम धान का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यह खुली लूट है और लंबे समय से यह अवैध प्रक्रिया जारी है।

इसके अलावा किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि शासन के नियमों के अनुसार धान खरीदी केंद्र में किसानों से किसी भी प्रकार की राशि नहीं ली जानी चाहिए, क्योंकि हमाली का भुगतान शासन द्वारा किया जाता है। इसके बावजूद भंवरमाल धान खरीदी केंद्र में किसानों से प्रति बोरी 10 रुपये अवैध रूप से वसूले जा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि समिति प्रबंधक और धान खरीदी प्रभारी आपसी मिलीभगत से इस राशि को हड़प रहे हैं। किसानों ने यह भी बताया कि धान आवक की दैनिक लिमिट कम होने के कारण किसानों को समय पर टोकन नहीं मिल पा रहा है। कई किसान दर्जनों दिनों से धान बेचने के लिए केंद्र के चक्कर काट रहे हैं, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को देखते हुए किसानों ने प्रतिदिन धान आवक की लिमिट बढ़ाकर 2000 क्विंटल किए जाने की मांग की है। इस दौरान पूर्व जिला सदस्य मुमताज अंसारी,नरेंद्र सिंह, संजय बहला, राजा बाबा, महेन्द्र सिंह, रामचंद नगेशिया, सुरेन्द्र गुप्ता, विनोद सिंह, जितेन्द्र सिंह, अशोक सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिवस के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो दिनांक 8 जनवरी 2026 को दोपहर 12 बजे भंवरमाल धान खरीदी केंद्र में एकदिवसीय चक्का जाम कर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

करोड़ों के घोटाले जल संसाधन विभा में, उठते सवाल पूछते लोग आरोपी को उसी कार्यालय में वापसी।

बलरामपुर जिले में जल संसाधन विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2023 में करीब 2 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोपी सुजीत गुप्ता को विभाग द्वारा प्रमोशन देकर रामानुज गंज उप अभियंता पद पर पदस्थ कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद जिलेभर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और आमजन के साथ-साथ विभागीय कर्मचारियों में भी असंतोष देखा जा रहा है।जानकारी के अनुसार संबंधित आरोपी सुजीत गुप्ता पर डीके सोनी द्वारा थाना रामानुजगंज में लिखित शिकायत की गई थी जिसके आधार पर पुलिस थाना रामानुजगंज के द्वारा 420 भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया था उक्त विभाग द्वारा वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी राशि के दुरुपयोग के अधिरूपित करते हुए राशि भुगतान के आदेश भी दिए गए थे । मामले की जांच और कार्रवाई की अपेक्षा के बीच अब उसी आरोपी सुजीत गुप्ता को उसी कार्यालय में वापसी किया जाना कई सवालों को जन्म दे रहा है। लोगों का कहना है कि यदि आरोपी सुजीत गुप्ता पर लगे आरोप सही थे तो उसे पदोन्नति कैसे दी गई, और यदि आरोप गलत थे तो अब तक स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या विभाग में ईमानदार और योग्य अधिकारियों की कमी है, या फिर कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ऐसे फैसले लिए गए हैं। कर्मचारियों के एक वर्ग का आरोप है कि इस तरह के निर्णय से न सिर्फ विभाग की छवि धूमिल होती है, बल्कि ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों का मनोबल भी टूटता है। वहीं, जानकारों का मानना है कि जिस व्यक्ति पर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप रहा हो, उसे जिम्मेदार पद सौंपना भविष्य में फिर से अनियमितताओं की आशंका को बढ़ा सकता है। मामले को लेकर अब प्रशासन और शासन स्तर पर भी जवाबदेही की मांग उठने लगी है। आमजन की अपेक्षा है कि इस प्रमोशन के पीछे की सच्चाई सामने लाई जाए और यदि कोई अनियमितता हुई है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शासन-प्रशासन पर लोगों का विश्वास बना रह सके।