Fri. Oct 23rd, 2026

2026

विश्व मलेरिया दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।

बलरामपुर जिले के रामानुजगंज स्थित 100 बिस्तरये शासकीय अस्पताल में विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व अस्पताल अधीक्षक डॉ. शरदचंद्र, बीएमओ सनावल डॉ. महेश गुप्ता, बीपीएम गुलाब दास डहरिया एवं वीबीडी टेक्निकल सुपरवाइजर जसवंत यादव ने किया। इस अवसर पर अस्पताल के समस्त स्वास्थ्य कर्मचारी, नर्सिंग छात्र-छात्राएं तथा अन्य उपस्थित लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में मलेरिया के लक्षण, रोकथाम, उपचार एवं जनजागरूकता के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई। बीएमओ सनावल डॉ. महेश गुप्ता ने बताया कि मलेरिया एक गंभीर एवं जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर जांच और उचित उपचार से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। सभी उपस्थित लोगों को मलेरिया उन्मूलन के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की शपथ भी दिलाई गई।

इस दौरान अधीक्षक डॉ. शरदचंद्र, गुप्ता द्वारा बताया गया कि हर बुखार की जांच – मलेरिया की पहचान”, “समय पर जांच और पूर्ण उपचार – मलेरिया से बचाव” तथा “मच्छरदानी का नियमित उपयोग – सुरक्षित जीवन की कुंजी” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। साथ ही स्वच्छ वातावरण बनाए रखने और जल जमाव को रोकने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सके।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर जाकर बुखार सर्वे, संदिग्ध मरीजों की त्वरित जांच, पॉजिटिव मामलों का शीघ्र उपचार तथा जनजागरूकता अभियान को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
अंत में सभी ने संकल्प लिया कि सामूहिक प्रयासों से रामानुजगंज सहित पूरे बलरामपुर जिले को मलेरिया मुक्त बनाया जाएगा। “शून्य मलेरिया – स्वस्थ बलरामपुर, स्वस्थ छत्तीसगढ़” के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु जनसहभागिता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।

सड़क हादसे में स्कूल जा रही शिक्षिका की दर्दनाक मौत, एक गंभीर रूप से घायल।

बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर-रामानुजगंज मुख्य मार्ग पर शनिवार सुबह एक हृदयविदारक सड़क हादसे में स्कूल जा रही दो शिक्षिकाएं ट्रक की चपेट में आ गईं। इस दर्दनाक दुर्घटना में एक शिक्षिका की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरी शिक्षिका रजनी केवट गंभीर रूप से घायल हो गई हैं और उनका इलाज जारी है। घटना बसंतपुर थाना क्षेत्र की बताई जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों शिक्षिकाएं करमडीहा स्थित अपने विद्यालय के लिए स्कूटी से निकली थीं। इसी दौरान मुख्य मार्ग पर तेज रफ्तार से आ रहे एक ट्रक ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक शिक्षिका ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दूसरी शिक्षिका गंभीर रूप से घायल हो गईं।

चिकित्सा अधिकारी हेमंत दीक्षित के अनुसार मृतिका, स्वास्थ्य विभाग में सहायक ग्रेड-2 पदस्थ अखिलेश कुजूर की पत्नी थीं। इस घटना से न केवल शिक्षा विभाग बल्कि स्वास्थ्य विभाग में भी शोक का माहौल व्याप्त है। घायल शिक्षिका रजनी केवट को स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से तत्काल वाड्रफनगर सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलने पर बसंतपुर पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है तथा फरार चालक की तलाश शुरू कर दी है।

इस दुखद घटना के बाद स्कूल स्टाफ, परिजनों और स्थानीय लोगों में गहरा शोक व्याप्त है। वहीं, ग्रामीणों ने प्रशासन से तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण और सड़क सुरक्षा के सख्त उपाय करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

शिक्षकों के पक्ष में बड़ा फैसला, हाई कोर्ट ने सरकार की अपील की खारिज।

छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से संविलियन से पूर्व सेवा गणना को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में माननीय हाई कोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के पूर्व आदेश को सही ठहराया है।
दरअसल, वर्ष 1998 से नगरीय निकाय एवं पंचायत विभाग में शिक्षा कर्मी के रूप में कार्यरत शिक्षकों ने संविलियन से पहले की सेवा को पेंशन गणना में शामिल किए जाने की मांग को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। मुख्य याचिकाकर्ता राजेंद्र प्रसाद पटेल के प्रकरण से जुड़े इस मामले में प्रदेश के हजारों एलबी संवर्ग के शिक्षकों ने अधिवक्ता संजीव वर्मा के माध्यम से याचिका दायर की थी। याचिका में संविलियन की कंडिका 4 को चुनौती देते हुए यह मांग की गई थी कि उनकी पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने हेतु जोड़ा जाए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि संविलियन के बाद भी उनकी पूर्व सेवा को पेंशन गणना में शामिल नहीं किया जा रहा है, जिससे वे पुरानी पेंशन योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह पूर्व सेवा को पेंशन लाभ में शामिल करने पर विचार करे और इसके लिए 120 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की थी।
हालांकि, इस आदेश का पालन करने के बजाय राज्य सरकार ने सिंगल बेंच के निर्णय को चुनौती देते हुए डबल बेंच में अपील दायर कर दी। 23 अप्रैल को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने दलील दी कि संविलियन के समय निर्धारित शर्तों के आधार पर ही पेंशन का निर्धारण होना चाहिए। साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि 30 जून 2018 से पूर्व शिक्षा कर्मी शासकीय कर्मचारी नहीं थे, इसलिए उनकी सेवा को पेंशन योग्य नहीं माना जा सकता।
इसके विपरीत, शिक्षकों की ओर से यह तर्क रखा गया कि जब शिक्षा कर्मियों से वर्ष 2012 से राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत कटौती की जा रही थी और संविलियन के लिए उनकी सेवा अवधि को मान्यता दी गई थी, तो फिर पेंशन गणना में उनकी पूर्व सेवा को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के निर्णय को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। इस फैसले के बाद प्रदेशभर के शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि न्यायालय के आदेश को जल्द से जल्द लागू किया जाए, ताकि सेवानिवृत्त और सेवा में कार्यरत शिक्षकों को पेंशन का लाभ मिल सके। इस आंदोलन में प्रदेश शिक्षक विधिक समिति के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद पटेल, उपेन्द्र कुमार सिंह, कमलेश मेहता, प्रदीप चौबे, रियाज अंसारी, मुकुट अनिल किंडो और गोपेन्द्र सार्दुल सहित कई शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस ऐतिहासिक निर्णय पर बलरामपुर शालेय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष उपेन्द्र कुमार सिंह ने सभी शिक्षकों को बधाई देते हुए आगे की रणनीति के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।

कनहर नदी के जल प्रवाह रोकने वालों पर सख्ती, संयुक्त टीम ने कि कई मोटर जब्त।

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में कनहर नदी के जल प्रवाह को अवरुद्ध करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर के निर्देशानुसार अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) रामानुजगंज के मार्गदर्शन में तहसीलदार, नगरपालिका, जल संसाधन विभाग (WRD), पंचायत एवं विद्युत विभाग की संयुक्त टीम द्वारा व्यापक कार्रवाई की गई। इस दौरान विद्युत अधिनियम के तहत चार प्रकरण दर्ज किए गए तथा नदी से अवैध रूप से पानी खींचने में उपयोग हो रही कई मोटर पंप जब्त किए गए।

प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ग्रामीण क्षेत्र के कुछ लोग गर्मी के मौसम में फसल सिंचाई के लिए कनहर नदी का जल प्रवाह रोक रहे हैं। इसके लिए अस्थायी बांध बनाकर पानी को रोक लिया जाता है, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है। इसका सीधा असर रामानुजगंज नगर की पेयजल व्यवस्था पर पड़ रहा है। जल स्तर घटने से शहर में जल संकट गहराने लगा है, वहीं पशुओं को भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
कलेक्टर ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सख्त निर्देश जारी किए थे कि नदी के प्रवाह में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्देशों के बाद गठित टीम ने क्षेत्र में पहुंचकर निरीक्षण किया और अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई की।

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायतों मे विशेष ग्राम सभा।

बलरामपुर,रामानुजगंज अनुसूचित क्षेत्र की ग्रामसभा (गठन सम्मिलन की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन) नियम 1998 के नियम 06 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कलेक्टर श्री राजेन्द्र कटारा ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर जिले के सभी ग्राम पंचायतों में विशेष 24 अप्रैल 2026 को ग्राम सभा आयोजन करने के निर्देश दिये हैं।
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 6 (2) (क) के तहत् गणपूर्ति के साथ-साथ ग्राम सभा में सदस्यों की शत-प्रतिशत उपस्थिति करवाने का दायित्व सचिव, सरपंच एवं पंच का होगा। ग्राम सभा की कार्यवाही छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 129 ख (3) (4) अनुसार संचालित होगी। ग्राम सभा की बैठक में उप मुख्यमंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के रिकार्डेड ऑडियो संदेश का श्रवण, ग्राम संपदा ऐप में ग्राम के समस्त परिसंपत्तियों के अपलोड किये जाने का संकल्प एवं वाचन, ग्राम को स्वच्छ बनाने हेतु संकल्प, मोर गांव-मोर पानी अंतर्गत जल संरक्षण के प्रयासों पर चर्चा, लखपति दीदियों को सम्मानित तथा जनगणना 2027 के संबंध में सभी ग्रामवासियों को आवश्यक जानकारी एवं स्व-गणना तथा जनगणना प्रगणकों को आवश्यक सहयोग किये जाने पर चर्चा किया जाएगा।

जल संरक्षण से खेती के लिए साल भर मिल रही सिंचाई सुविधा।

बलरामपुर,रामानुजगंज जिले के राजपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत उफिया में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत सुई थोपा नाला पर बना चेकडैम ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। चेकडैम जल संरक्षण का माध्यम बनने के साथ ही किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
चेक डैम के निर्माण से वर्षा जल का संरक्षण संभव हुआ है, जिससे क्षेत्र में भू-जल स्तर में वृद्धि हुई है। पहले जहां पानी की कमी के कारण किसान सीमित खेती कर पाते थे, वहीं अब सालभर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है। मनरेगा के अंतर्गत इस निर्माण कार्य में स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिला, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।
चेकडैम से लगभग 16 एकड़ कृषि भूमि सिंचित हो रही है, जिससे 7 किसान सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं और गेंहू, सरसों, मक्का, धान, सब्जियां जैसे बहुफसली खेती कर आय अर्जित कर रहे हैं। साथ ही आस-पास के लगभग 25 से 30 अन्य किसान भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। सिंचाई सुविधा मिलने से किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बहुफसली खेती अपना रहे हैं। चैक डेम बनने के पश्चात जल संरक्षण से किसानों के साथ-साथ मवेशियों को भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।

शिक्षा विभागकी बड़ी कार्रवाई निजी स्कूलों में हड़कंप।

शिक्षा विभाग ने बिना मान्यता संचालित एक निजी स्कूल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सख्त संदेश दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जांच के दौरान सामने आया कि अंबिकापुर में स्वरंग एकेडमी” नामक स्कूल बिना किसी सरकारी मान्यता के संचालित किया जा रहा था। यह खुलासा प्रशासन के लिए भी चौंकाने वाला रहा, क्योंकि लंबे समय से स्कूल में बच्चों का प्रवेश और पढ़ाई जारी थी।
मामले की प्रारंभिक जांच में स्कूल की प्राचार्या ने आरोपों को निराधार बताते हुए किसी भी अनियमितता से इनकार किया था। हालांकि, जब विभागीय टीम ने दस्तावेजों और संचालन प्रक्रिया की गहन जांच की, तो सच्चाई सामने आ गई। जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल प्रबंधन ने कुछ मामलों में बच्चों को प्रवेश देने से मना करने की बात स्वीकार की, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
शिक्षा विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल संचालक पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही, स्कूल के संचालन को तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
इस कार्रवाई के बाद विभाग ने जिले के अन्य निजी स्कूलों की भी जांच शुरू कर दी है। मान्यता, फीस संरचना और संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके। इस घटना के बाद अभिभावकों और आम लोगों के मन में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

पीएटी-2026 के माध्यम से उद्यानिकी एवं वानिकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश का अवसर।

बलरामपुर,प्रदेश में उद्यानिकी एवं वानिकी विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए सुनहरा अवसर उपलब्ध हुआ है। व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा आयोजित प्री एग्रीकल्चर टेस्ट (पीएटी) 2026-27 के माध्यम से महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग में संचालित बी.एससी. ऑनर्स उद्यानिकी एवं बी.एससी. ऑनर्स वानिकी के चार वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाएगा। पीएटी परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए इच्छुक विद्यार्थी 27 अप्रैल 2026 तक व्यावसायिक परीक्षा मंडल के वेबसाइट में जाकर आवेदन कर सकते है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश पूर्णतः पीएटी परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट सूची के माध्यम से किया जाएगा। अभ्यर्थियों को प्रवेश हेतु व्यापम द्वारा निर्धारित प्रक्रिया एवं विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
बी.एससी. ऑनर्स उद्यानिकी पाठ्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय से संबद्ध 16 शासकीय एवं 3 निजी महाविद्यालयों में कुल 1240 सीटें उपलब्ध हैं। वहीं बी.एससी. ऑनर्स वानिकी पाठ्यक्रम हेतु 1 महाविद्यालय में 60 सीटें निर्धारित की गई हैं।
विश्वविद्यालय द्वारा संचालित इन पाठ्यक्रमों में आधुनिक तकनीक, अनुसंधान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया जाता है। वर्तमान में उद्यानिकी एवं वानिकी क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, विशेषकर फल, सब्जी, पुष्प उत्पादन, औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती तथा वन संरक्षण एवं प्रबंधन के क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग निरंतर बढ़ रही है।
जिला प्रशासन ने इच्छुक अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर व्यापम के अधिकृत पोर्टल vyapamcg.cgstate.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर परीक्षा में सम्मिलित हों एवं इस अवसर का लाभ उठाएं।

एक अधिकारी कई कार्यालय की जिम्मेदारी लगे भ्रष्टाचार के आरोप।

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में जल संसाधन विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें विभाग के एक अधिकारी पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लग ते रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जल संसाधन विभाग में कार्यरत सहायक अभियंता सुजीत कुमार गुप्ता, जिनका मूल पदस्थापन पेंड्रा-मरवाही में बताया जाता है, वर्तमान में बलरामपुर में पदस्थ हैं। आश्चर्य की बात यह है कि उन्हें यहां एक से अधिक कार्यालयों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

सूत्रों के अनुसार, रामानुजगंज में पदस्थ कार्यपालन अभियंता द्वारा भी उन्हें अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जबकि उनके कार्यकाल के दौरान कई बार भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सुजीत कुमार गुप्ता द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार के कई प्रमाण मौजूद हैं। आरोप है कि वर्ष 2022-23 में उन्होंने फर्जी तरीके से चपरासी बनकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बलरामपुर से लाखों रुपये का गबन किया। इतना ही नहीं, वर्तमान समय में भी कार्यपालन अभियंता के साथ मिलकर लगभग 20 लाख रुपये के गबन का प्रयास किए जाने की बात सामने आई है।

इस पूरे मामले ने विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे विभाग की छवि और अधिक खराब हो सकती है। अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

रामानुजगंज वन वाटिका में आब देनी होगी शुल्क।

वन वाटिका रामानुजगंज में प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने नौका विहार का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क का भी शुभारंभ किया, जिससे क्षेत्रवासियों एवं बच्चों में हर्ष का माहौल है।
मंत्री नेताम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विकास केवल पुल, पुलिया एवं भवन निर्माण तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह लोगों की आवश्यकताओं एवं समय के अनुरूप सुविधाओं के विस्तार से जुड़ा होता है।
वनमण्डलाधिकारी आलोक बाजपेयी ने कहा कि वन वाटिका रामानुजगंज एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है, जहां प्रशासन क्षेत्र के समग्र विकास हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि यहां नौका विहार का शुभारंभ किया गया है तथा आगामी समय में कार्ययोजना के तहत इसका विस्तारीकरण किया जाएगा, जिससे राज्य के पर्यटन मानचित्र पर इस स्थल को विशेष पहचान दिलाने का प्रयास रहेगा।
उन्होंने जानकारी दी कि इस क्षेत्र का कुल रकबा लगभग 250 हेक्टेयर है, जिसमें से 5 एकड़ क्षेत्र में वन वाटिका विकसित की गई है। वर्ष 2009 से इस स्थल का संचालन वन प्रबंधन समूह के माध्यम से किया जा रहा है और यह क्षेत्र पर्यटन स्थल के रूप में अपनी पहचान बना चुका है तथा वर्तमान में भी इसका संचालन समूह द्वारा ही किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वन वाटिका के संचालन की जिम्मेदारी विश्वास महिला स्व-सहायता समूह को सौंपी गई है, जिससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
वनमण्डलाधिकारी ने बताया कि यहां बच्चों के मनोरंजन हेतु विभिन्न प्रकार के झूले उपलब्ध हैं तथा भविष्य में और भी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। साथ ही वन वाटिका में प्रवेश एवं नौका विहार के लिए निर्धारित दरें तय की गई हैं, जिससे सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
इस अवसर पर रामानुजगंज रेंज अधिकारी कर्मचारी एवं ओम प्रकाश जायसवाल, सुनील तिवारी, बी डी लाल गुप्ता, अरुण केसरी, अश्वनी गुप्ता, अजय यादव, कमल विश्वास सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, नगर के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।