Fri. Oct 23rd, 2026

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बलरामपुर खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई,चार हाइवा वाहन जब्त।

बलरामपुर। रामानुजगंज जिले में अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले में लगातार अभियान चलाकर अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में खनिज विभाग एवं संयुक्त टीम द्वारा बलरामपुर और पस्ता क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से गिट्टी परिवहन कर रहे चार हाइवा वाहनों को जब्त किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार खनिज विभाग की टीम द्वारा क्षेत्र में नियमित जांच एवं मॉनिटरिंग की जा रही थी। अभियान के दौरान संदिग्ध वाहनों की जांच की गई, जिसमें संबंधित वाहन चालकों द्वारा खनिज परिवहन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज एवं वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं की जा सकी। दस्तावेजों में अनियमितता पाए जाने पर विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चारों हाइवा वाहनों को जब्त कर लिया। जब्त वाहनों के खिलाफ खनिज नियमों के तहत अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
खनिज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में अवैध उत्खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। विभागीय टीम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी रखी जा रही है, ताकि खनिज संपदा का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शासन के निर्देशानुसार अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों एवं वाहन संचालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अवैध खनिज कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि अवैध उत्खनन और परिवहन पर रोक लगने से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण संभव हो सकेगा। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि अवैध खनिज परिवहन या उत्खनन की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई, अवैध परिवहन करते चार हाइवा वाहन जब्त।

बलरामपुर। रामानुजगंज जिले में अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले में लगातार अभियान चलाकर अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में खनिज विभाग एवं संयुक्त टीम द्वारा बलरामपुर और पस्ता क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से गिट्टी परिवहन कर रहे चार हाइवा वाहनों को जब्त किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार खनिज विभाग की टीम द्वारा क्षेत्र में नियमित जांच एवं मॉनिटरिंग की जा रही थी। अभियान के दौरान संदिग्ध वाहनों की जांच की गई, जिसमें संबंधित वाहन चालकों द्वारा खनिज परिवहन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज एवं वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं की जा सकी। दस्तावेजों में अनियमितता पाए जाने पर विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चारों हाइवा वाहनों को जब्त कर लिया। जब्त वाहनों के खिलाफ खनिज नियमों के तहत अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
खनिज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में अवैध उत्खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। विभागीय टीम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी रखी जा रही है, ताकि खनिज संपदा का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शासन के निर्देशानुसार अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों एवं वाहन संचालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अवैध खनिज कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि अवैध उत्खनन और परिवहन पर रोक लगने से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण संभव हो सकेगा। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि अवैध खनिज परिवहन या उत्खनन की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

पेयजल शिकायतों के निराकरण हेतु कंट्रोल रूम और टोल फ्री नंबर जारी।

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में गर्मी के मौसम को देखते हुए पेयजल समस्याओं के त्वरित समाधान और सुचारू जल व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा उपखंड एवं विकासखंड स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि पेयजल संबंधी किसी भी समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारियों अथवा टोल फ्री नंबर पर देकर शीघ्र निराकरण प्राप्त करें।
जारी आदेश के अनुसार विकासखंड कुसमी एवं शंकरगढ़ के लिए सहायक अभियंता उपखंड कुसमी प्रदीप केरकेट्टा को कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी दी गई है। उनसे मोबाइल नंबर 94076-80134 पर संपर्क किया जा सकता है। इसी प्रकार रामचंद्रपुर क्षेत्र के लिए सहायक अभियंता उपखंड रामानुजगंज गुरुदेव सिंह कंवर का मोबाइल नंबर 93999-37660 जारी किया गया है।
वाड्रफनगर क्षेत्र के लिए सहायक अभियंता विमलेश कुमार सिंह का मोबाइल नंबर 94060-29939 तथा बलरामपुर क्षेत्र के लिए सहायक अभियंता सुनील उरांव का मोबाइल नंबर 79871-93334 निर्धारित किया गया है। राजपुर एवं शंकरगढ़ क्षेत्र के लिए सहायक अभियंता सुश्री मंजु खलखो का मोबाइल नंबर 89594-14808 जारी किया गया है।
इसके अलावा कुसमी एवं शंकरगढ़ क्षेत्र के लिए सहायक अभियंता रमेश खलखो का मोबाइल नंबर 96691-67564, रामचंद्रपुर क्षेत्र के लिए विजय कुमार पावले का मोबाइल नंबर 93997-38186 तथा वाड्रफनगर क्षेत्र के लिए भीम राम का मोबाइल नंबर 62615-88789 निर्धारित किया गया है।
जिला प्रशासन ने बताया कि नागरिक पेयजल से जुड़ी शिकायतों के लिए अतिरिक्त टोल फ्री नंबर 18002330008 पर भी संपर्क कर सकते हैं। प्रशासन का उद्देश्य गर्मी के दौरान ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना और शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करना है।

पुनह सामने आए फर्जी वारिस, क्या भू-माफियाओं की गहरी साजिश?

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रामानुजगंज नगर के वार्ड क्रमांक-1 में जमीन से जुड़ा एक पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। कथित फर्जी वारिसों, संदिग्ध नामांतरण और जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर उठे सवालों ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। स्थानीय निवासी प्रकाश मालाकार सहित अन्य लोगों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
जानकारी के अनुसार मामला रामानुजगंज स्थित खसरा क्रमांक 4/11, रकबा 1.0920 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा हुआ है, जो राजस्व अभिलेखों में गहनी पिता टुक्की के नाम दर्ज बताई जा रही है। आरोप है कि कुछ लोग स्वयं को गहनी का बेटा और नाती बताकर उक्त भूमि का फर्जी तरीके से नामांतरण कराने का प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में प्रकाश मालाकार, दिनेश गुप्ता, कृष्णा गुप्ता, दीपक गुप्ता, संतलाल गुप्ता और अन्य आवेदकों ने तहसीलदार रामानुजगंज को आवेदन सौंपकर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी 14 अक्टूबर 2022 को इसी भूमि की कथित रूप से फर्जी रजिस्ट्री कराई गई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि गहनी पिता टुक्की की लगभग 20 वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है, इसके बावजूद कुछ लोग फर्जी दस्तावेज तैयार कर खुद को उनका वारिस बताकर जमीन की खरीद-बिक्री कर रहे हैं। इस मामले को लेकर पहले भी तहसीलदार न्यायालय रामानुजगंज में नामांतरण संबंधी प्रकरण दर्ज हो चुका है। पूर्व में राजस्व आदेश-पत्र के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार द्वारा ग्राम पंचायत कड़िया के सचिव को आधार कार्ड सत्यापन के निर्देश दिए गए थे तथा संबंधित पक्षों को न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश जारी किया गया था। जांच के दौरान मामला तब और उलझ गया जब ग्रामसभा में प्रस्तुत एक प्रस्ताव में दावा किया गया कि गहनी उर्फ मंगरू नामक व्यक्ति अभी जीवित है और उसका संबंध ग्राम कड़िया से है।
ग्रामसभा में प्रस्तुत कथित वंशवृक्ष में यह भी उल्लेख किया गया कि गहनी उर्फ मंगरू के नाम से पूर्व में भूमि का विक्रय किया गया था। बाद में उस भूमि पर मकान निर्माण कर शेष भूमि को अलग-अलग लोगों को बेचे जाने की बात सामने आई। इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्व रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और जमीन के दस्तावेजों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रकाश मालाकार के अनुसार, इस मामले में कथित फर्जी भूस्वामी गहनी उर्फ मंगरू के खिलाफ पूर्व में कार्रवाई करते हुए उसे जेल भी भेजा गया था। इसके बावजूद अब दोबारा नए दावों और कथित वारिसों के सामने आने से विवाद और गहरा गया है।
प्रकाश मालाकार ने आरोप लगाया कि कुछ लोग फर्जी वारिस बनकर उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, राजस्व रिकॉर्ड और दस्तावेजों की सत्यता की बारीकी से पड़ताल की जाए तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में और भी कई निर्दोष लोग जमीन विवादों में फंस सकते हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाता है और क्या कथित फर्जी वारिसों एवं जमीन कारोबार से जुड़े लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई हो पाती है या नहीं।

खबर का असर: अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान हेतु डीईओ ने जारी किया आदेश

बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के लंबे समय से लंबित मानदेय भुगतान के मुद्दे पर आखिरकार प्रशासन हरकत में आ गया है। हाल ही में अतिथि शिक्षकों द्वारा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मानदेय भुगतान में हो रही देरी और परेशानियों को लेकर आवाज उठाई गई थी। इस मामले को मीडिया, विशेषकर जीकेजी न्यूज़ द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद जिला शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी एम आर यादव द्वारा जारी आदेश में वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान हेतु राशि का पुनर्बंटन किया गया है। आदेश के अनुसार, मांग संख्या 27, स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत 1 करोड़ 98 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर संबंधित संस्थाओं को आबंटित की गई है। यह राशि प्राथमिक शिक्षा मद के तहत जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी की गई है, जिसका उपयोग केवल अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान के लिए किया जाएगा।
डीईओ ने जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों एवं शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्यों (आहरण एवं संवितरण) को निर्देशित करते हुए कहा है कि आवंटित राशि का उपयोग निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जाए। साथ ही सभी अभिलेखों का संधारण सही तरीके से किया जाए और ऑडिट के समय प्रस्तुत किया जाए। स्वीकृत राशि से अधिक व्यय या राशि का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में न हो, इस पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अतिथि शिक्षकों का मानदेय छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग के 24 जून 2019 के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही भुगतान किया जाए। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि मानदेय का भुगतान नियमित कर्मचारियों के साथ प्रत्येक माह समय पर किया जाए और किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो।
इस कार्रवाई से जिले के सैकड़ों अतिथि शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से अपने मानदेय के लिए परेशान थे। वहीं, प्रशासन की इस पहल को शिक्षकों ने सकारात्मक कदम बताते हुए समय पर भुगतान की अपेक्षा जताई है।

अतिथि शिक्षकों का डीईओ पर गंभीर आरोप—कलेक्टर से लगाई गुहार

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में अतिथि शिक्षकों की समस्याएं एक बार फिर सामने आई हैं। प्रांतीय अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) संघ, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर वेतन भुगतान में हो रही देरी और प्रशासनिक बाधाओं को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। संघ ने जिला शिक्षा अधिकारी एम.आर. यादव पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि जिले में कार्यरत अतिथि शिक्षकों का पिछले दो माह का वेतन अब तक लंबित है, जिससे शिक्षकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। संघ का आरोप है कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल बनाया जा रहा है। पुराने अभिलेखों और उपस्थिति पत्रकों की मांग कर भुगतान में देरी की जा रही है, जबकि यह प्रक्रिया पहले सरल थी।
संघ ने यह भी बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी के नए आदेश के तहत वेतन भुगतान जिला स्तर से करने की बात कही गई है। इसके लिए सभी शिक्षकों को अपने-अपने विद्यालयों से वेतन पत्रक जिला कार्यालय में जमा करना अनिवार्य किया गया है। लेकिन वर्तमान में ग्रीष्मकालीन अवकाश के चलते अधिकांश शिक्षक अपने गृह जिलों को लौट चुके हैं, जिससे यह प्रक्रिया और कठिन हो गई है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले पांच वर्षों के पुराने अभिलेखों की मांग अव्यावहारिक है और इससे शिक्षकों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। संघ ने आशंका जताई है कि इस प्रकार की प्रक्रिया के जरिए वेतन भुगतान को टालने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके अलावा, एक गंभीर आरोप वाड्रफनगर विकासखंड से सामने आया है, जहां एक अतिथि शिक्षक से जांच के दौरान 20 हजार रुपये की मांग किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया है।
संघ का कहना है कि जिले में कई अतिथि शिक्षक अन्य जिलों से आकर किराए पर रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वेतन न मिलने के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अंत में संघ ने कलेक्टर से मांग की है कि अतिथि शिक्षकों की समस्याओं का शीघ्र निराकरण करते हुए लंबित वेतन का भुगतान जल्द सुनिश्चित किया जाए, ताकि शिक्षकों को राहत मिल सके।

बलरामपुर 05 मई से विकसित कृषि संकल्प अभियान शुरू।

बलरामपुर रामानुजगंज जिले के विकासखंडों में विभिन्न विभागीय योजनाओं तथा नितियों के बारे में विकसित कृषि संकल्प अभियान का आयोजन किया जाएगा। कलेक्टर राजेन्द्र कटारा के मार्गदर्शन में अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न विकासखंडों में ब्लॉक स्तर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिक, कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, मत्स्य विभाग एवं पशुपालन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी सक्रिय रूप से भागीदारी निभाएंगे। अभियान में विशेषज्ञों की टीम द्वारा किसानों से सीधे संवाद कर उनकी कृषि संबंधी समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। साथ ही फसल उत्पादन बढ़ाने, उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक उपयोग, कीट एवं रोग प्रबंधन, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा बागवानी संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी भी प्रदान की जाएगी।
अभियान के दौरान कृषि रथ का भी संचालन किया जाएगा, जो गांव-गांव पहुंचकर किसानों को नैनो उर्वरक, हरी खाद एवं टिकाऊ खेती के महत्व के बारे में जागरूक करेगा। किसानों को एग्रीस्टैक पंजीयन के लिए भी प्रेरित किया जाएगा, ताकि वे शासन की विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकें। कृषि अधिकारी ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेकर वैज्ञानिक सलाह का लाभ लें। कृषि को अधिक लाभकारी एवं उन्नत बनाएं।

निर्धारित दिवसों में लगेगा शिविर*
निर्धारित कार्यक्रम अनुसार 05 मई 2026 को विकासखण्ड बलरामपुर के ग्राम पंचायत महाराजगंज, 06 मई को कुसमी के चांदो, राजपुर के कोटडीह, 07 मई को रामचन्द्रपुर के ताम्बेश्वरनगर, वाड्रफनगर के गुडरू, 08 मई को बलरामपुर के सरनाडीह, शंकरगढ़ के दोहना, 11 मई को राजपुर के अलखडीहा, शंकरगढ़ के चिरई, 12 मई को कुसमी के सबाग, वाड्रफनगर के गैना, 13 मई को बलरामपुर के पाढ़ी, राजपुर के गोपालपुर, 14 मई को शंकरगढ़ के बेलकोना, रामचन्द्रपुर के डिण्डो, 15 मई को बलरामपुर के झलरिया, 18 मई को ऑडिटोरियम बलरामपुर, 19 मई को रामचन्द्रपुर के कामेश्वरनगर, कुसमी के सामरी तथा 20 मई को बलरामपुर के चितमा एवं वाड्रफनगर के लोधी में शिविर का आयोजन किया जाएगा।

विश्व मलेरिया दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।

बलरामपुर जिले के रामानुजगंज स्थित 100 बिस्तरये शासकीय अस्पताल में विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व अस्पताल अधीक्षक डॉ. शरदचंद्र, बीएमओ सनावल डॉ. महेश गुप्ता, बीपीएम गुलाब दास डहरिया एवं वीबीडी टेक्निकल सुपरवाइजर जसवंत यादव ने किया। इस अवसर पर अस्पताल के समस्त स्वास्थ्य कर्मचारी, नर्सिंग छात्र-छात्राएं तथा अन्य उपस्थित लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में मलेरिया के लक्षण, रोकथाम, उपचार एवं जनजागरूकता के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई। बीएमओ सनावल डॉ. महेश गुप्ता ने बताया कि मलेरिया एक गंभीर एवं जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर जांच और उचित उपचार से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। सभी उपस्थित लोगों को मलेरिया उन्मूलन के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की शपथ भी दिलाई गई।

इस दौरान अधीक्षक डॉ. शरदचंद्र, गुप्ता द्वारा बताया गया कि हर बुखार की जांच – मलेरिया की पहचान”, “समय पर जांच और पूर्ण उपचार – मलेरिया से बचाव” तथा “मच्छरदानी का नियमित उपयोग – सुरक्षित जीवन की कुंजी” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। साथ ही स्वच्छ वातावरण बनाए रखने और जल जमाव को रोकने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सके।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर जाकर बुखार सर्वे, संदिग्ध मरीजों की त्वरित जांच, पॉजिटिव मामलों का शीघ्र उपचार तथा जनजागरूकता अभियान को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
अंत में सभी ने संकल्प लिया कि सामूहिक प्रयासों से रामानुजगंज सहित पूरे बलरामपुर जिले को मलेरिया मुक्त बनाया जाएगा। “शून्य मलेरिया – स्वस्थ बलरामपुर, स्वस्थ छत्तीसगढ़” के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु जनसहभागिता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।

सड़क हादसे में स्कूल जा रही शिक्षिका की दर्दनाक मौत, एक गंभीर रूप से घायल।

बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर-रामानुजगंज मुख्य मार्ग पर शनिवार सुबह एक हृदयविदारक सड़क हादसे में स्कूल जा रही दो शिक्षिकाएं ट्रक की चपेट में आ गईं। इस दर्दनाक दुर्घटना में एक शिक्षिका की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरी शिक्षिका रजनी केवट गंभीर रूप से घायल हो गई हैं और उनका इलाज जारी है। घटना बसंतपुर थाना क्षेत्र की बताई जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों शिक्षिकाएं करमडीहा स्थित अपने विद्यालय के लिए स्कूटी से निकली थीं। इसी दौरान मुख्य मार्ग पर तेज रफ्तार से आ रहे एक ट्रक ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक शिक्षिका ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दूसरी शिक्षिका गंभीर रूप से घायल हो गईं।

चिकित्सा अधिकारी हेमंत दीक्षित के अनुसार मृतिका, स्वास्थ्य विभाग में सहायक ग्रेड-2 पदस्थ अखिलेश कुजूर की पत्नी थीं। इस घटना से न केवल शिक्षा विभाग बल्कि स्वास्थ्य विभाग में भी शोक का माहौल व्याप्त है। घायल शिक्षिका रजनी केवट को स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से तत्काल वाड्रफनगर सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलने पर बसंतपुर पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है तथा फरार चालक की तलाश शुरू कर दी है।

इस दुखद घटना के बाद स्कूल स्टाफ, परिजनों और स्थानीय लोगों में गहरा शोक व्याप्त है। वहीं, ग्रामीणों ने प्रशासन से तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण और सड़क सुरक्षा के सख्त उपाय करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

शिक्षकों के पक्ष में बड़ा फैसला, हाई कोर्ट ने सरकार की अपील की खारिज।

छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से संविलियन से पूर्व सेवा गणना को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में माननीय हाई कोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के पूर्व आदेश को सही ठहराया है।
दरअसल, वर्ष 1998 से नगरीय निकाय एवं पंचायत विभाग में शिक्षा कर्मी के रूप में कार्यरत शिक्षकों ने संविलियन से पहले की सेवा को पेंशन गणना में शामिल किए जाने की मांग को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। मुख्य याचिकाकर्ता राजेंद्र प्रसाद पटेल के प्रकरण से जुड़े इस मामले में प्रदेश के हजारों एलबी संवर्ग के शिक्षकों ने अधिवक्ता संजीव वर्मा के माध्यम से याचिका दायर की थी। याचिका में संविलियन की कंडिका 4 को चुनौती देते हुए यह मांग की गई थी कि उनकी पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने हेतु जोड़ा जाए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि संविलियन के बाद भी उनकी पूर्व सेवा को पेंशन गणना में शामिल नहीं किया जा रहा है, जिससे वे पुरानी पेंशन योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह पूर्व सेवा को पेंशन लाभ में शामिल करने पर विचार करे और इसके लिए 120 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की थी।
हालांकि, इस आदेश का पालन करने के बजाय राज्य सरकार ने सिंगल बेंच के निर्णय को चुनौती देते हुए डबल बेंच में अपील दायर कर दी। 23 अप्रैल को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने दलील दी कि संविलियन के समय निर्धारित शर्तों के आधार पर ही पेंशन का निर्धारण होना चाहिए। साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि 30 जून 2018 से पूर्व शिक्षा कर्मी शासकीय कर्मचारी नहीं थे, इसलिए उनकी सेवा को पेंशन योग्य नहीं माना जा सकता।
इसके विपरीत, शिक्षकों की ओर से यह तर्क रखा गया कि जब शिक्षा कर्मियों से वर्ष 2012 से राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत कटौती की जा रही थी और संविलियन के लिए उनकी सेवा अवधि को मान्यता दी गई थी, तो फिर पेंशन गणना में उनकी पूर्व सेवा को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के निर्णय को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। इस फैसले के बाद प्रदेशभर के शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि न्यायालय के आदेश को जल्द से जल्द लागू किया जाए, ताकि सेवानिवृत्त और सेवा में कार्यरत शिक्षकों को पेंशन का लाभ मिल सके। इस आंदोलन में प्रदेश शिक्षक विधिक समिति के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद पटेल, उपेन्द्र कुमार सिंह, कमलेश मेहता, प्रदीप चौबे, रियाज अंसारी, मुकुट अनिल किंडो और गोपेन्द्र सार्दुल सहित कई शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस ऐतिहासिक निर्णय पर बलरामपुर शालेय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष उपेन्द्र कुमार सिंह ने सभी शिक्षकों को बधाई देते हुए आगे की रणनीति के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।